उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल को भी स्थान दिया गया है। डिग्री पर डिग्री लेने से कुछ नहीं होगा। किसी काम का कौशल रखने से आप समाज को अपना योगदान दे सकते हैं।
उपराष्ट्रपति बुधवार को सीतापुरा (जयपुर) में लघु उद्योग भारती की ओर से सोहन सिंह स्मृति कौशल विकास केंद्र के लोकार्पण समारोह में पहुंचे थे। समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल ने कहा- हमारे युवा 12 से 15 हजार की नौकरियों के लिए देशभर में जा रहे हैं। विकास का यह मॉडल हमारे देश के लिए सही नहीं है। गांव के पास उन्हें रोजगार मिलना चाहिए ताकि वो परिवार के पास अच्छे से जीवन यापन कर सकें।

उपराष्ट्रपति बोले- हम भारतीय राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रेम से समझौता नहीं करते उपराष्ट्रपति ने कहा- मैं वक्ता के तौर पर नहीं बल्कि श्रोता के तौर पर यहां डॉक्टर साहब को सुनने आया हूं। ऐसे स्थान पर आने से आईना दिख जाता है। हम भारतीय हैं, राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रेम से कभी समझौता नहीं कर सकते हैं। देश में जो बड़ी समस्या उभर रही है, उसका समाधान हमारे सामने है। लघु उद्योगों के मामले में भारत सरकार का मंत्रालय भी बहुत सक्रिय है। भारत ने कौशल के ज्ञानी लोग दुनिया को दिए हैं। आज शिक्षा और कौशल दोनों जरूरी हैं।
उन्होंने कहा- आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही संस्कारवान होना भी बेहद जरूरी है। हम भौतिक आवश्यकताओं में इतने व्यस्त हैं कि बच्चों को संस्कार और नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा पा रहे हैं। पर्यावरण को लेकर आज पूरी दुनिया चिंतित है। क्योंकि कोई दूसरी पृथ्वी हमारे पास रहने के लिए नहीं है। क्लाइमेट चेंज हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
उपराष्ट्रपति ने कहा- कुछ ऐसी ताकत देश में और बाहर हैं, जो भारत की प्रगति को पचा नहीं पा रही हैं। वह देश को खंडित और देश की संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से अपमानित करने का काम कर रही हैं।

‘हमारे देश में अमेरिका और जर्मनी का मॉडल नहीं चलेगा’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल ने कहा- हमारे देश में अमेरिका और जर्मनी का मॉडल नहीं चलेगा। क्योंकि वो देश कृषि पर आधारित नहीं हैं। हमारे देश में 60 से 65 प्रतिशत लोग कृषि पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा- राजस्थान के युवा अपने कौशल के लिए परेशान रहते थे। उनके लिए लघु उद्योग भारती की ओर से कौशल विकास केंद्र बनाया गया है। एक ओर जहां IIT, MBA हैं, वहीं दूसरी ओर कोई बच्चा अगर 12वीं में फेल हो गया तो उसके लिए कुछ नहीं है। अब यह केंद्र उन्हें कौशल देगा।
कृष्ण गोपाल ने कहा- कपड़ों से लेकर हीरे-जवाहरात भारत से पूरी दुनिया में जाते हैं। हमारा देश सिर्फ कृषि प्रधान नहीं बल्कि छोटे-छोटे उद्योगों वाला देश था। लेकिन, अंग्रेजों के आने के बाद भारत सिर्फ कृषि तक सीमित रह गया।
भारत गरीब देश नहीं था। अंग्रेजों ने भारत को गलत दिशा में मोड़ दिया था। अब हम फिर से अलग दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। MSME के माध्यम से 8 करोड़ लोगों को आज रोजगार मिल रहा है। बड़े-बड़े उद्योग कम लोगों रोजगार देते हैं, जबकि छोटे उद्योग ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं।

सीतापुरा में बनाया गया है कौशल केंद्र लघु उद्योग भारती की ओर से सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में सवा लाख स्क्वायर फीट क्षेत्र में बहुमंजिला कौशल केंद्र बनाया गया है। जहां प्रदेश के युवाओं को अकाउंट्स, फैशन, हैंडीक्राफ्ट, इलेक्ट्रिशियन, डिजिटल स्केल के साथ ही स्टार्टअप को विकसित करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
