भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर मदन राठौड़ और 40 जिलाध्यक्ष के नामों की भी घोषणा हो चुकी है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में 44 में से 4 जिलाध्यक्ष की सीटों पर अब तक पार्टी नाम तय नहीं कर सकी है। इनमें जोधपुर देहात (उत्तर), झुंझुनूं, दौसा और धौलपुर हैं।
यहां जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं हो पाने के पीछे कारण बड़े नेताओं में सहमति नहीं बन पाना है। चुनाव प्रभारी नारायण पंचारिया के गृह क्षेत्र से संबंधित जोधपुर देहात (उत्तर) में सबसे ज्यादा समीकरण उलझे हुए हैं।
यहां जिलाध्यक्ष की घोषणा के लिए कैबिनेट मंत्री पहुंचे भी, लेकिन ऐनवक्त पर घोषणा टाल दी गई। भाजपा सूत्रों के अनुसार, इसकी वजह है एक उम्मीदवार का पीहर-ससुराल का फेर।
ज्योति जाणी जोधपुर देहात-दक्षिण में ओसियां से प्रधान रह चुकी हैं। तब तर्क दिया गया था कि दक्षिण में उनका पीहर है। वहीं, ज्योति ने अब देहात (उत्तर) से फाॅर्म भरा है।
अब तर्क है कि उत्तर में उनका ससुराल है। उनकी दावेदारी को लेकर विरोध जताया जा रहा है। इस वजह से यह घोषणा अटक गई।

जिलाध्यक्ष पद के लिए ये उम्मीदवार
जोधपुर देहात (उत्तर) से अध्यक्ष पद के लिए 16 दावेदारों ने आवेदन किए हैं। इनमें मनोहर पालीवाल, माधोसिंह देवड़ा, बाबूलाल गर्ग, रेवतसिंह राजपुरोहित, नरपतसिंह रिड़मलसर, ज्योति ज्याणी हैं।
साथ ही रामनारायण जांगू, मुन्नाराम सुथार, सुरेश सामरिया, प्रेमाराम जाखड़, विक्रमादित्य सिंह आमला, जेपी जोशी, शिव कुमार व्यास ने भी आवेदन किया है। इनमें ओसियां से प्रधान रहीं ज्योति जाणी, रामनारायण जांगू और प्रेमाराम जाखड़ का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
ज्याणी के नाम की पर्ची आने की चर्चा फैली
पिछले दिनों कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत फलोदी में जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा करने वाले थे। उससे पहले ही ज्योति ज्याणी के नाम की पर्ची आने और नाम की घोषणा को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
इसको लेकर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मंत्री के सामने आपत्ति जताई। इसी विरोध को देखते हुए घोषणा ऐनवक्त पर टाल दी गई।
बताया जा रहा है कि विरोध करने वाले पदाधिकारियों का कहना था कि जब संभाग के सिरोही में जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी महिला को दी जा चुकी है, तो ऐसे में यहां किसी अन्य को मौका मिलना चाहिए।
वहीं, चर्चा ये भी है कि भाजपा के संगठनात्मक लिहाज से संभाग के कुल 9 जिलाध्यक्षों में से 8 की घोषणा हो चुकी है, लेकिन इनमें जाट समाज या किसी ओबीसी को मौका नहीं मिला है। इसलिए इन समाजों से भी कोई नाम आ सकता है।
प्रस्तावकों की इस गणित में उलझ गया प्रदेश नेतृत्व?
दरअसल, भाजपा जोधपुर देहात (उत्तर) अध्यक्ष पद के लिए कुल 16 आवेदन पार्टी के उच्च पदाधिकारियों को मिले। इन प्रत्येक दावेदार के फार्म पर दो प्रस्तावकों के साइन जरूरी होते हैं। इससे माना जा सकता है कि कुल 32 प्रस्तावकों के साइन हुए ही होंगे।
हैरानी की बात ये है कि देहात (उत्तर) के तीन विधानसभा क्षेत्र शेरगढ़, लोहावट और फलोदी से कुल प्रस्तावक ही अधिकतम 30 होते हैं।
क्योंकि, प्रत्येक विधानसभा में 5-5 मंडल हैं। यानी तीनों से कुल 15 मंडल अध्यक्ष और इन सभी के साथ एक-एक मंडल प्रतिनिधि ही किसी भी जिलाध्यक्ष पद के उम्मीदवार के प्रस्तावक बन सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो इनमें से शेरगढ़ विस के सभी मंडल अध्यक्ष और प्रतिनिधि सहित सभी 10 इस प्रक्रिया से ही दूर रहे। यानी, वे किसी के प्रस्तावक ही नहीं बने।
ऐसे में शेष बचे सिर्फ 20 प्रस्तावक, जो अधिकतम 10 दावेदारों के ही फार्म पर ही साइन कर सकते थे। इसका कारण है पार्टी का नियम, जिसमें स्पष्ट है कि कोई भी प्रस्तावक सिर्फ एक ही उम्मीदवार का प्रस्तावक बन सकता है।
वहीं, फर्जी प्रस्तावकों के दावों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि- ये गंभीर विषय है, मैं इसकी जांच कराऊंगा।
