होली के पांचवे दिन रंग पंचमी पर मंगलवार को सागवाड़ा में कंडो (गोबर के उपले) की राड़ खेली गई। युवाओं की 2 टोलिया ने एक दूसरे पर जमकर कांडे बरसाए। जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए।
होली को लेकर आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में अनूठी परंपराएं है। इसमें से एक है कंडो की राड़। सागवाड़ा नगर के पुराने बस स्टैंड पर कंडो की राड़ का आयोजन हुआ। नेहरू पार्क के पास मुख्य रोड पर बड़ी संख्या में लोग ढोल कुंडी की थाप पर गैर खेलते हुए इकट्ठे हुए। इसके बाद युवाओं की 2 टोलिया बना दी गई। दोनों तरफ कंडो के ढेर लगा दिए गए और फिर देखते ही देखते युवाओं ने एक दूसरे पर कंडे बरसाना शुरू कर दिया।
करीब घंटेभर तक चले इस रोमांचकारी कंडो की राड़ को देखने सागवाड़ा समेत आसपास के कई गांवों के लोग इकट्ठे हुए। वहीं, सड़क के दोनों तरफ खड़े लोगों को भी कई बार कंडे लगे। हालांकि इसमें कोई चोटिल नहीं हुआ। लोगों ने इस राड़ के खेल का जमकर लुत्फ उठाया।
