राजस्थान लोकतंत्र के सेनानियों का सम्मान विधेयक 2024 पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि इस तरह के बिल सही नहीं है। वे लाते हैं, हम इसे बंद कर देते हैं। बिल में क्या लिखा है, ये तो मैंने अभी देखा नहीं है। पता नहीं वे ऐसा क्यों सोचते हैं। ऐसे बिल आएंगे तो फिर कई सवाल उठेंगे। गहलोत रविवार को जयपुर में आजादी के लिए जान देने वाले क्रांतिकारियों के परिजनों के सम्मान समारोह के बाद मीडिया से बात कर रहे थे।
गहलोत ने कहा-

2014 के बाद में देश में कई पत्रकार, साहित्यकारों और लेखक, जिन्होंने सरकारों के खिलाफ लिखा। उनको बंद कर दिया गया, वे एक-एक साल तक जेल में रहे। कल को कोई सरकार कहेगी कि उन्हें भी पेंशन दी जाए। एक पत्रकार केरल से आया, वो डेढ़ साल बिना किसी कारण जेल में बंद रहा। कोई सरकार उसके लिए भी बिल लेकर आ जाएगी।
पूर्व सीएम ने कहा- क्रांतिकारियों ने जो रास्ता चुना, वह बहुत मुश्किल था। आजादी मिलेगी या नहीं, पता नहीं था। फिर भी उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। देश में जिस तरह का माहौल है, वो खतरनाक है। नफरत का माहौल है।

आने वाली पीढ़ी क्रांतिकारियों के बारे में विश्वास नहीं करेगी गहलोत ने कहा- मैंने आइंस्टीन का उदाहरण दिया। इतने बड़े वैज्ञानिक ने कहा था कि आने वाली पीढ़ी को विश्वास नहीं होगा कि महात्मा गांधी नाम का हाड़ मांस का कोई व्यक्ति धरती पर चला है। अगर आइंस्टीन महात्मा गांधी के बारे में ये कह सकते हैं।
सभी क्रांतिकारियों के लिए स्मारक स्थल बनें शहीद सुखदेव के पोते अनुज थापर ने कहा – इस तरह के कार्यक्रम अच्छे हैं। मगर हमारी मांग है कि भगत सिंह को भारत रत्न मिलना चाहिए। गांधी जी की तरह ही सभी शहीदों के लिए स्मारक स्थल बनने चाहिए। लोग उनकी विरासत को जानना चाहते हैं, इसके लिए ऑनलाइन पुस्तक और अन्य सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। तभी शहीदों की शहादत के बारे में लोग जान पाएंगे।
