जोधपुर के राइकाबाग रेलवे स्टेशन पर पार्किंग ठेकेदार के साथ मिलकर अपने ही विभाग से 21 लाख की धोखाधड़ी करने वाली ऑफिस सुपरिटेंडेंट के खिलाफ सीबीआई जोधपुर ने एफआईआर दर्ज की है। इसमें रेलवे के कॉमर्शियल जनरल ब्रांच की ऑफिस सुपरिटेंडेंट मनीला चौहान और अहमदाबाद के जनकपुरी न्यू अंजली सोसाइटी राघव अपार्टमेंट की ठेका फर्म श्री आरोही एंटरप्राइजेज को नामजद किया गया है।
रेलवे ने राइका बाग रेलवे स्टेशन की पार्किंग का ठेका 28 लाख में अहमदाबाद की फर्म श्री आरोही एंटरप्राइजेज को दिया था। इसकी लाइसेंस फीस के रूप में 21 लाख रुपए जरिए डिमांड ड्राफ्ट रेलवे में जमा कराए गए, लेकिन इन डीडी को रेलवे के खाते में जमा होने से पहले ही जाली रसीद लगाकर धांधली करते हुए ठेका फर्म को डीडी वापस लौटा दिए गए। रेलवे की इंटरनल ऑडिट में यह मामला पकड़ में आया, तो जोधपुर रेलवे मंडल के सीनियर डीसीएम विकास खेड़ा ने इसकी शिकायत सीबीआई में दी। साथ ही महिला अधिकारी को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
बोली लगाकर लिया जनवरी 2023 से जनवरी 2025 तक का ठेका
जानकारी अनुसार-जोधपुर रेल मंडल प्रशासन ने शहर के उप नगरीय राइका बाग स्टेशन पर पार्किंग के लिए टेंडर जारी किया था। इसमें अहमदाबाद की फर्म श्री आरोही एंटरप्राइजेज ने सर्वाधिक 28 लाख रुपए की बोली लगाकर में ठेका लिया था। उसे यह राशि रेलवे में जमा करवा कर इसकी वसूली यात्रियों से रेलवे द्वारा तय पार्किंग शुल्क लेकर करनी थी।
श्री आरोही एंटरप्राइजेज के कर्मचारी ने जनवरी 2023 से जनवरी 2025 के दौरान इस राशि में से 21 लाख रुपए रेलवे के खाते में जमा करवाने के लिए डिमांड ड्राफ्ट बनाकर सौंपे। इन्हीं डिमांड ड्राफ्ट को रेलवे के अकाउंट में जमा किया जाना था, लेकिन ठेका फर्म के कर्मचारी ने रेलवे वाणिज्यिक विभाग की महिला कर्मचारी मनीला चौहान से साठगांठ कर वो ही डीडी वापस ले लिए। जबकि, नियमानुसार डीडी जमा होने के बाद इन्हें लेखा शाखा के सुपुर्द कराना था और इसके लिए कर्मचारी को लेखा विभाग को पत्र लिखकर उसमें ड्राफ्ट की जानकारी और जिस काम के लिए यह राशि जमा हो रही है, उसका उल्लेख भी करना था। लेखा विभाग उन्हीं डीडी के मिलने पर संबंधित विभाग के पत्र पर उसकी रसीद देकर ड्राफ्ट को रेलवे के बैंक खाते में जमा करवा देता है।
बना दी लेखा विभाग की फर्जी रिसिप्ट
ठेका फर्म के कर्मचारी से मिलीभगत के चलते वाणिज्यिक विभाग की महिला कर्मचारी ने ड्राफ्ट मिलने के बाद फाइल में उस ड्राफ्ट की फोटो कॉपी लगा दी, जिसमें ड्राफ्ट लेखा विभाग को भेजने का पत्र भी लगाया। इस पत्र पर लेखा विभाग की फर्जी रिसिप्ट लिख जाली हस्ताक्षर भी कर दिए। इसके बाद 21 लाख के ड्राफ्ट ठेका फर्म के कर्मचारी को लौटा दिए गए। ठेका कर्मचारी ने इन ड्राफ्ट को वापस अपनी बैंक में ले जाकर रद्द करवा दिया।
आबूरोड में भी फूड स्टॉल्स से साठगांठ, इसी तर्ज पर 1.18 करोड़ का गबन
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही आबूरोड में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, यहां स्टेशन पर फूड स्टॉल संचालकों ने स्टॉल्स की फीस जमा कराने के लिए बैंक से जारी किए गए डिमांड ड्राफ्ट से हेर फेर कर 1.18 करोड़ से अधिक का गबन किया गया। उस मामले में रेलवे की ओर से जीआरपी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
उस प्रकरण में गिरफ्तारी भी हुई थी। उनमें मैसर्स साहिल एंटरप्राइजेज, मैसर्स यूएसबी कॉरपोरेशन और मैसर्स साईं बालाजी फर्म के खिलाफ दर्ज हुए मामले के अनुसार इन तीनों फर्मों ने 18 जनवरी 2023 से 17 अगस्त 2024 तक की अवधि में फूड स्टॉल्स की फीस जमा कराने के लिए बैंक से डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) जारी करवाए। असली डीडी जमा कराने की बजाय डीडी की सिर्फ फोटोकॉपी जमा करवाई गई। असली डीडी को बैंक में जमा कर राशि वापस अपने खाते में ट्रांसफर करवा दी गई।
