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राजस्थान सरकार ने हरियाणा की 5 रोड बंद की:यहां से खनन माफिया गुजर रहे थे; CM भजनलाल ने नायब सैनी को चिट्‌ठी भेजकर बताया

हरियाणा से जुड़ी अरावली पर्वत माला की पहाड़ियों में अवैध खनन को लेकर राजस्थान सरकार ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हरियाणा को जोड़ने वाली 5 अवैध सड़कों को बंद करा दिया है, इन्हें खनन माफियाओं द्वारा अवैध रूप से तैयार किया गया था। उन्होंने इस कार्रवाई की जानकारी हरियाणा सरकार को देने के लिए इस संबंध में एक पत्र हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी भेजा है।

बता दें कि हरियाणा-राजस्थान सीमा पर खनन माफिया लगातार अवैध तरीके से खनन कर रहे हैं। दोनों राज्यों ने इसे रोकने के लिए कई तरह के प्लान बनाए, कई अभियान चले और कई समन्वय बैठकें की गईं, लेकिन सरकारों के प्रयासों के बावजूद अवैध खनन नहीं रुका।

हरियाणा में अवैध खनन को रोकने के लिए रास्ते पर खाई बनाती मशीन। फाइल फोटो।
हरियाणा में अवैध खनन को रोकने के लिए रास्ते पर खाई बनाती मशीन। फाइल फोटो।

राजस्थान सीएम भजन लाल के पत्र से जुड़ी 3 अहम बातें…

1. अवैध खनन के प्रति हमारी नीति शून्य-सहिष्णुता वाली राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा है कि अवैध खनन के प्रति हमारी नीति शून्य-सहिष्णुता वाली है और हमने इसे रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। ऐसी खबरें हैं कि खनन माफिया राजस्थान और हरियाणा के बीच अवैध सड़कें बना रहे हैं। इनका इस्तेमाल अवैध रूप से खनन किए गए संसाधनों को ले जाने के लिए किया जा रहा है।

सरकार ने इन सभी अवैध सड़कों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। पर्यावरण संरक्षण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है।

2. स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत, नेटवर्क तोड़ना होगा मुख्यमंत्री भजन लाल ने अवैध खनन पर स्थानीय अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लोकल अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। हम इसकी जांच कर रहे हैं और इसमें शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेंगे।

सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में ऐसी सड़कें बंद करने के लिए कहा गया है, जिनका प्रयोग अवैध खनन के लिए हो रहा है। साथ ही अपेक्षा जताई है कि दोनों राज्यों को मिलकर इस खतरनाक माफिया गठजोड़ के खिलाफ साझा रणनीति बनानी होगी।

3. खनन माफियाओं की हो रही गिरफ्तारी राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा, हमने इस संबंध में उचित कार्रवाई के लिए हरियाणा को सतर्क कर दिया है। पुलिस और डीग प्रशासन की संयुक्त टीम ने बाद में हरियाणा को जोड़ने वाली कम से कम 5 अवैध सड़कों पर कार्रवाई शुरू की। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है और पुलिस द्वारा एफआईआर भी दर्ज की गई है।

राजस्थान सरकार की प्राथमिकता में अरावली की सुरक्षा, पर्यावरण का संरक्षण और कानून का शासन सर्वोपरि है और इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

अब जानिए हरियाणा में अवैध खनन के कारोबार का हाल…

5 सालों में प्रतिदिन सामने आए अवैध खनन के 5 मामले विधानसभा में 17 मार्च को आर्थिक सर्वेक्षण-2024-25 पेश किया गया। इसमें अवैध खनन के बारे में जानकारी दी गई। हरियाणा में पिछले पांच सालों में प्रतिदिन अवैध खनन के पांच मामले सामने आए हैं। सरकार ने 28 अगस्त, 2019 से 30 नवंबर, 2024 तक 13,118 वाहन जब्त किए। यानी राज्य में प्रतिदिन करीब सात वाहन हुए। इसके अलावा 185.81 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया।

सबसे ज्यादा 2,815 वाहन यमुनानगर से जब्त किए गए, इसके बाद गुरुग्राम और नूंह (1,637), फरीदाबाद और पलवल (1,366), महेंद्रगढ़ (1,309), पंचकुला (1,054) और अंबाला (979) का स्थान रहा।

वर्तमान में 42 खदान चालू, कम हो रहा राजस्व संग्रह आर्थिक सर्वेक्षण-2024-25 के दौरान जानकारी दी गई की वर्तमान में केवल 42 खदानें चालू हैं जबकि 7 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इनमें यमुनानगर में 4, पंचकूला, भिवानी और चरखी दादरी में 1-1 लाइसेंस निलंबित किया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार विभाग का राजस्व संग्रह कम होता जा रहा है। 2019-20 में यह 702.25 करोड़ रुपए था, जो 2020-21 में बढ़कर 1,019.94 करोड़ रुपए हो गया। 2021-22 में यह घटकर 838.34 करोड़ रुपए और 2022-23 में 837.02 करोड़ रुपए रह गया।

इसके अलावा 2020-21 से 2024-25 तक जिला खनिज फाउंडेशन फंड से 126.71 करोड़ रुपए एकत्र किए गए, लेकिन केवल 80.63 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। पंचकूला में एकत्र किए गए 6.91 करोड़ रुपए में से मात्र 1.21 करोड़ रुपए खर्च किए गए और 2021-22 से 2024-25 तक कुछ भी खर्च नहीं किया गया। पलवल, अंबाला और रेवाड़ी में एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया।

पर्यावरणविदों ने खटखटाया NGT का दरवाजा वन विभाग ने आरोप लगाया कि चकबंदी अधिकारी और सरपंच ने रास्तों को वैध कराने के लिए खसरा नंबर बदल दिया। विभाग ने अधिकारी पर 99 लाख रुपए और सरपंच पर 31 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। जुर्माना अदा न किए जाने पर फिरोजपुर झिरका कोर्ट में मामला दायर किया गया और पर्यावरणविदों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाया।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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