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राजस्थान के जलदाय विभाग में करोड़ों का घोटाला:हैंडपंप सही करने के लगाए फर्जी बिल, मंत्री बोले- दोषियों से होगी वसूली

राजस्थान के जलदाय विभाग में अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत से बिना काम किए ढाई करोड़ रुपए के बिल उठा लिए। जहां 300 से ज्यादा हैंडपंप को सही करने का दावा किया गया था, वहां एक भी हैंडपंप सही नहीं मिला है।

इतना ही नहीं नलकूपों की गहराई में भी घोटाला कर बिलों का भुगतान किया गया। मेंटेनेंस के लिए जिन काम का रिकॉर्ड बताया गया वे मौके पर ही नहीं मिले।

मामला अलवर के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी (P.H.E.D) विभाग का है। इस मामले में प्रमुख शासन सचिव को शिकायत की गई। जब जांच कमेटी ने मामले की पड़ताल की तो कई खुलासे हुए।

थानागाजी के भांगडोली गांव का हैडपंप। बताया गया कि इसका प्लेटफॉर्म बनाया गया था। जांच दल मौके पर पहुंचा तो प्लेटफॉर्म का नामोनिशान नहीं था।

पहले जानें क्या था पूरा मामला

29 अगस्त 2023 को हुए थे टेंडर: अलवर जिले के एनसीआर द्वितीय खंड में मेंटेनेंस के लिए 29 अगस्त 2023 को टेंडर मांगे गए थे। इनमें नलकूपों की गहराई बढ़ाने, हैंडपंप के मेंटनेंस और अन्य सामान की खरीदी के टेंडर थे। 12 दिसंबर 2023 को ये टेंडर जारी किए गए थे। टेंडर की शर्तों के अनुसार 6 महीने से एक साल के अंदर ये पूरे काम करने थे।

प्रमुख शासन सचिव के नाम शिकायत : इस मामले में 26 नवंबर 2024 को प्रमुख शासन सचिव के नाम एक शिकायत हुई। शिकायत में बताया- जिन कामों के लिए विभाग ने टेंडर जारी किए है, उनमें से कोई भी काम नहीं हुआ है। इस शिकायत पर मुख्य अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण) ने 4 मार्च 2025 को एक जांच कमेटी बनाई। जांच कमेटी को 12 मार्च 2025 तक इसकी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया।

ये दावा किया गया कि जिले के हैंडपंप को सुधारा गया। टीम जांच के लिए पहुंची तो हैंडपंप इस हालात में मिले।

कमेटी ने शुरू की जांच : जांच कमेटी ने 6 मार्च 2025 को अपनी जांच शुरू की। मामला उजागर होने के डर से कर्मचारियों ने जांच में देरी करवाने की कोशिश की। इसके लिए डॉक्यूमेंट मांगे गए, लेकिन दिए नहीं गए। इस पर 6 मार्च, 1 अप्रैल और 5 मई 2025 को लैटर लिख संबंधित अधिकारियों को डॉक्यूमेंट और रिकॉर्ड देने के निर्देश दिए गए। ये रिकॉर्ड नहीं दिए गए।

रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश : तीन लैटर लिखने के बाद भी डॉक्यूमेंट नहीं मिले तो मुख्य अभियंता ने रिकॉर्ड पेश करने के सख्त निर्देश जारी किए। तब जाकर जांच दल को कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध करवाए गए। इसके बावजूद भी बानसूर एक्सईएन ने जांच दल को कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए। कई रिकॉर्ड अधूरे दिए गए। जैसे – किसी भी नलकूप की पहले की गहराई के रिकॉर्ड नहीं दिए गए। साथ ही कई जगहों पर काम की स्पेसिफिक लोकेशन नहीं बताई गई। अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची नहीं दी गई।

इन तीन मामलों से समझे कैसे किया पूरा घोटाला

रामगढ़ के इसी ट्यूबवेल को लेकर बताया गया था कि इसे गहराई में किया गया है। जबकि मौके पर गहराई वाटर लेवल से भी कम थी। न ही यहां मरम्मत के कोई निशान मिले।

रिपोर्ट में लिखा नलकूप 110 मी. गहरा करवाया, हकीकत में केवल 62 मीटर

विभाग ने रिकॉर्ड बुक में बताया कि रामगढ़ में एक नलकूप को 110 मीटर गहरा करवाया। इसके बाद इसके बिल का भुगतान किया गया। लेकिन, जब जांच दल ने निरीक्षण किया तो नलकूप की गहराई 62 मीटर ही मिली।

इससे पहले नलकूप कितना गहरा था, यह जानकारी भी रिकॉर्ड बुक में नहीं मिली। इससे साफ पता चलता है कि विभाग द्वारा नलकूप की मेंटेनेंस और गहराई करने का कोई काम नहीं हुआ।

इसके साथ ही कई जगहों पर नलकूप को गहरे किए जाने का रिकॉर्ड और उसकी पहले की गहराई की गणना वाटर लेवल से मैच भी नहीं हुई।

सामने आया कि बिल पास करने के लिए नलकूपों की गहराई को भी छिपाया गया। मेजरमेंट के हिसाब से जब इसकी जांच की तो पता चला कि नलकूपों की गहराई में घोटाला किया है।

जैसे – रामगढ़ में ही एक जगह पर नलकूप को 100 मीटर गहरा कराने का बताया गया। जांच में वह 122 मीटर ही मिला, जो रामगढ़ के वाटर लेवल के हिसाब से गलत था।

राजपूत श्मशान जहां हैंडपंप नहीं है, केवल केसिंग मिली। रिकॉर्ड में बताया गया कि इस हैंडपंप को सही किया गया और प्लेटफॉर्म को भी सुधारा गया।

जिस जगह हैंडपंप की मरम्मत होना बताया, वहां एक भी हैंडपंप सही नहीं मिला

रामगढ़ के ही राजपूत श्मशान में हैंडपंप और प्लेटफॉर्म की मरम्मत किए जाना बताया गया। लेकिन जब जांच दल वहां पहुंचा तो मौके पर हैंडपंप ही नहीं मिला।

हैंडपंप को प्लेटफॉर्म भी आयताकार मिला जबकि विभाग गोल प्लेटफॉर्म बनवाता है। इसी तरह मुकुन्द बास बस स्टैण्ड के पास हैंडपंप का प्लेटफॉर्म ही नहीं मिला।

रामगढ़ उपखंड में 341 जगहों पर हैंडपंप सही करने का दावा किया गया। वहां एक भी हैंडपंप सही नहीं मिला। किसी भी जगह हैंडपंप का प्लेटफॉर्म नया नहीं था और वे खराब हालत में थे।

रिकॉर्ड बुक में नहीं दी पूरी जानकारी

नियमों के मुताबिक किए गए किसी भी काम का रिकॉर्ड बुक (माप पुस्तिका) में पूरी डिटेल देनी होती है। इसमें किया गया काम, लोकेशन, दिनांक जैसी जानकारियां लिखनी होती है।

विभाग ने थानागाजी उपखंड में 469 हैंडपंपों की मरम्मत का काम बताया गया, लेकिन किसी भी काम की पूरी जानकारी माप पुस्तिका में नहीं लिखी। जब निरीक्षण दल ने मौके पर हैंडपंपों की जांच की तो कहीं भी मेंटेनेंस का काम नहीं मिला।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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