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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आवास पर की मीडिया से बातचीत

स्व.कन्हैयालाल हत्याकांड ऐसी घटना थी जिसने पूरे देश को हिला के रख दिया था,जिस रूप में मारा गया था उसको वो ऐसी मार्मिक घटना थी और हमनें चार घंटे में मुलजिम पकड़ लिए,चार घंटे में और फिर भी केस ले लिया एनआईए ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने,हमनें कोई ऐतराज नहीं किया,उसी रात को ले लिया केस।क्योंकि वो राष्ट्रीय एजेंसी है, हो सकता है उसमें कोई और एंगल हो, तो हमनें ऐतराज नहीं किया और उसके बावजूद भी उस केस को आजतक वो, तीन साल हो गए हैं एनआईए कोर्ट जो है वहां कोई जज बैठते ही नहीं हैं खाली पड़ा रहता है आज तक बयान एनआईए करा नहीं पाई उस केस के अंदर,परिवार और प्रदेशवासी न्याय मांग रहे हैं कब मिलेगा न्याय उनको? वो घटना खाली एक परिवार की नहीं थी पूरे प्रदेशवासियों की थी चाहे कोई जाति धर्म के लोग हों, सबको उस घटना ने बहुत पीड़ा पहुंचाई। उसका जवाब इनके पास नहीं है और चुनाव में हमारे खिलाफ में मुहिम खड़ी कर दी हम ने तो देखिए उनको अरेस्ट कर लिया और सरकार क्या कर सकती थी, उनके दोनों बच्चों को नौकरी दे दी, पचास लाख का पैकेज दे दिया,पहली बार आजादी के बाद में किसी को इतना बड़ा पैकेज मिला है वो कन्हैयालाल जी के परिवार को मिला था।

फिर भी चुनाव में इसको मुद्दा बनाया गया हमारे खिलाफ में और उसका हमें नुकसान भी हुआ,वो ऐसा मुद्दा था मार्मिक,झूठ बोल बोल कर के,झूठ बोल बोल कर के कि पचास लाख दे दिए मुस्लिम को और पांच लाख दे दिए कन्हैयालाल की फैमिली को हिंदू को , इतना बड़ा झूठ कोई बोल सकता है क्या ? इतना बड़ा झूठ,और बोलने वाले अमित शाह जी भी थे मुख्य रूप से,और पूरे प्रदेश के अंदर यह बात फैल गई वास्तव में पांच लाख पचास लाख हिंदू मुस्लिम,आप बताइए,हमें चुनाव हारने में ये भी एक बहुत कारण था हमारा जिसमें लोगों को गलतफहमी हो गई इस प्रकार से हिंदू मुस्लिम वहां भी किया गया, प्रदेशवासी कभी माफ नहीं करेंगे।

साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा की अब मैं पूछना चाहता हूं अमित शाह जी से कृपा करके आप राजस्थान पधारे हैं आपका स्वागत है पर कम से कम आज मीटिंगों में प्रदेशवासियों को जवाब दें भई वास्तव में ये घटना क्यों नहीं अभी तक सजा हुई इन लोगों को,सजा क्यों नहीं हुई आज तक।हो सकता है राजस्थान सरकार इसको देखती, एसओजी देखती,एटीएस देखती,हो सकता है आज तक इनको सजा हो जाती चाहे वो आजीवन हो या फांसी की सजा हो कुछ भी हो पर सजा होके रहती इतना बड़ा केस था वो,सब काम छोड़ के मैं गया वहां पर,दौरे मेरे खत्म करके गया चीफ सेक्रेटरी गए,डीजी पुलिस गए, विश्वास दिला दिया वहां उदयपुर की जनता को कि सरकार पूरी गंभीर है इसलिए कोई वहां पर हिंदू मुस्लिम का तनाव नहीं हुआ,ये हम ने किया उस वक्त में,पूरे देश में तारीफ हुई मीडिया के अंदर और ये लोग बीजेपी वाले उस वक्त भी चले गए हैदराबाद के अंदर इन की कोई मीटिंग थी हैदराबाद के अंदर इनको कोई चिंता नहीं उदयपुर में कहीं आग लग सकती है इतनी बड़ी घटना हुई है सब नेता चले गए,बताइए,गुलाबचंद कटारिया वहां के एमएलए हैं चले गए सब लोग,तो कहने का मतलब इतना बड़ा गंभीर केस था पूरे देश में उसकी बहुत बड़ी प्रतिक्रिया हुई उसके लिए भी इनका ये अप्रोच है देश के अंदर बताइए आप,ये मुझे कहना था आपको कि कृपा करके पूछिए अमित शाह जी से आज वो पब्लिक को बताएं न्याय कब मिलेगा कन्हैयालाल के परिवार को और प्रदेशवासियों को यह मैं पूछना चाहता हूं।

साथ ही गहलोत ने कहा की तीन वर्ष हो गए तीन वर्ष किसे कहते हैं अरे छह छह महीने में फैसले हो जाते हैं कई तो,कई ऐसे केस हुए हैं आजतक कि तीन तीन महीने में छह छह महीने में फैसले हुए हैं, फांसी की सजा हो जाती है आजीवन कारावास हो जाती है,इस केस के अंदर आप बता दीजिए कुछ भी नहीं हो रहा है, एक तो केस ये है।

आज अखबार में मुख्यमंत्री जी का आर्टिकल प्रकाशित होने और प्रदेश के हालातों पर

दूसरा जो है,आज आर्टिकल आया है मुख्यमंत्री का,आर्टिकल आया अच्छी बात है।पांच साल बनाम डेढ़ साल, कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं पूरे प्रदेशवासियों और प्रदेश के गांव गांव में तो ऐसी सरकार का निकम्मापन नाकारापन मैने कभी नहीं सुना किसी सरकार का।सरकारें बीजेपी की भी रही हैं सरकारें राजस्थान में कांग्रेस की भी बनी हैं बीजेपी की भी रही हैं इतना निकम्मा नकारापन मैंने कही देखा नहीं,और इतने कम समय के अंदर,आप बताइए तीन साल बाद में सरकार के बारे में लोग प्रतिक्रिया देते हैं काम नहीं हो रहे हमारे,करप्शन बहुत है सुनवाई नहीं हो रही है किस के पास जाएं सब बातें बोलते हैं लोग तीन साल के बाद में।यही सरकार ऐसी है 6 महीने में ही लोगों को समझ पड़ गया पूत के पांव पालने में होते हैं न वो कहावत चरितार्थ हुई है तो राजस्थान में हुई है।

अरे ये क्या हो गया हम ने ये क्या कर दिया,चुनाव तो,सरकार तो पहले वाली चली गई कांग्रेस की पर नई सरकार में ये क्या हो रहा है जिसके पास जाएं,वो सरकार का मुख्या अगर दावा करे तो मैं ये बार बार कहता हूं ये उनका बहुत बड़ा साहस है हिम्मत है कि वो ये मुकाबला कर रहे हैं।और आज ही जिस अखबार में आर्टिकल लिखा गया कम से कम सीएमओ को चाहिए था डीआईपीआर को चाहिए था मैनेज करते आज तो उनके खिलाफ न्यूज नहीं आती।

आज भास्कर के अंदर आर्टिकल भी आया है और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं वो ऐसी ऐसी घटनाएं आज आई हैं उसके अंदर कानून व्यवस्था की हो या अन्य घटनाएं हों तो आज तो मैनेज करना चाहिए था कम से कम।मैनेजमेंट भी नहीं किया आर्टिकल की खुद की धज्जियां उड़ गईं उसके अंदर ही।पत्रिका में क्या आता है अलग बात है और अखबारों में क्या आता है वो तो लंबी चौड़ी बाते हैं लगातार आ रही हैं।

दलित युवक के अपहरण और नंगा करके वीडियो बनाए जाने पर

और आज तो मुझे बहुत दुःख हो रहा है एक मैंने देखा अभी वीडियो,वीडियो तो मैं आपके सामने नहीं दिखा सकता हूं इतना खतरनाक है वो,पर पता नहीं प्रदेश में हो क्या रहा है, प्रदेश में क्या हो रहा है भई ये चिंता का विषय होना चाहिए प्रदेशवासियों के लिए।ये दलित लड़का, दलित, दलित लड़के को पूरा नंगा करके, किडनैप करके अलवर से बूंदी ले जाया गया, पूरा नंगा किया गया इसको और वीडियो आप हम देख नहीं सकते ,ये वीडियो देखें तो पता नहीं क्या दिमाग में उसकी रिएक्शन पैदा हो, इतना खतरनाक वीडियो है ये। मैंने मेरी लाइफ के अंदर ऐसा वीडियो पहली बार देखा है जिसमें इस प्रकार से हिम्मत कर जाए, हिम्मत कर जाए लोग कि किडनैप भी कर ले, पूरा नंगा करे पूरा और उसका वीडियो बनाए और घर वालों को भेज दे उसके , इतनी हिम्मत जिस प्रदेश में हो जाए आप बताइए उस प्रदेश का क्या हाल होगा चिंता लग गई है चिंता लग गई है , पूरा नंगा करके, पूरा वीडियो आ रहा है वीडियो कोई देख नहीं सकता उसको , ये डेढ़ साल बनाम पांच साल है ? अब डेढ़ साल में ये घटना होने लग गई है तो पांच साल आते आते पता नहीं क्या होगा प्रदेश के अंदर। ये चिंता का विषय होना चाहिए प्रदेशवासियों के लिए। धन्यवाद।

RGHS की स्थिति को लेकर पूछे गए सवाल पर गहलोत का कटाक्ष

बहुत दुर्भाग्य है, मैं कल बैंगलोर में था परसों मैं बॉम्बे में था,जहां मैं जा रहा हूं देश के अंदर,दिल्ली जाते हैं , दिल्ली में पूरे देश के लोग आते हैं सब जगह चर्चा ये है कि राजस्थान सरकार ने जो स्कीमें बनाई थीं अपने वक्त में कांग्रेस सरकार ने, उसकी चर्चा पूरे देश के अंदर है खाली हेल्थ की नहीं है, हेल्थ की तो है ही है बाकी हमारी स्कीमों की चर्चा है और पच्चीस लाख का बीमा तो देश में दुनिया में कहीं नहीं है मैं बार बार बोल रहा हूं लोग समझ नहीं रहे हैं कि मोदी जी की योजना जो हैं आयुष्मान भारत वो सिर्फ पचास पर्सेंट लोगों के लिए है मुश्किल से , पचास पर्सेंट लोगों के लिए देश के अंदर ,हमारी स्कीम सौ पर्सेंट लोगों के लिए है।सबके लिए है, पैसे वाले हैं, 850 रुपए जमा कर दो खाली बस, 25 लाख का बीमा, घर घर में गांव गांव में आज इस योजना की चर्चा हो रही है और ये सरकार दावा उल्टा कर रही है क्या इनको कहें, ये डेढ़ साल बनाम पांच साल की बात जो करने वाली है उनको हम क्या कह सकते हैं, आपने क्या क्वेश्चन किया ? RGHS, RGHS शानदार स्कीम थी , CGHS भारत सरकार की स्कीम है , मैं खुद मेंबर ऑफ पार्लियामेंट था मुझे उसका लाभ मिल रहा है आज भी, एक्स एमपी को मिलता है एमपी को मिलता है हम ने उसी तर्ज पर एमएलए को, एक्स एमएलए को और सरकारी कर्मचारियों को भी पत्रकारों को भी सभी को हम ने उससे जोड़ लिया RGHS से कि आप भी जो है सीजीएचएस की तरह कैशलैस इलाज करा सकते हो, कैशलैस। उसकी खासियत कैशलैस है। उसका आपने आठ सौ नौ सौ करोड़ रुपए अगर बकाया कर दिया प्राइवेट अस्पताल का तो उन्होंने धमकी दे दी आपको कि हम स्ट्राइक करेंगे अब आपने लीपापोती करके उनको शांत किया है अच्छी बात है मैं उसको एप्रिशिएट करता हूं कि स्ट्राइक नहीं होने दी,अच्छी बात है। पर ये योजना ऐसी है जिसमें खर्चा एक्स्ट्रा होता है आदमी का चाहे नौकरी करने वाला हो चाहे आम नागरिक हो पत्रकार हो, अचानक घर में बीमार कोई हो जाए, कोई पांच हजार, पच्चीस हजार, एक लाख दो लाख का ऑपरेशन या जांचें करवाओ, एमआरआई फ्री सीटी स्कैन फ्री दवाएं फ्री वो एक्स्ट्रा खर्चा होता है तनख्वाह से अलावा अपनी जो आमदनी होती है किसी व्यक्ति की, उससे अलावा इसको कहते हैं आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर,अचानक आ गया उसको सरकार फ्री कर रही है तो उसको अपनी प्लानिंग करने में घर चलाने में आसानी रहती है।ये हमनें किया था , दुर्भाग्य से जो है उसको कमजोर कर रहे हैं इनकी टॉप प्रायोरिटी शिक्षा के साथ में स्वास्थ्य होना चाहिए, अगर किसी नागरिक का परिवार का, शिक्षित होगा परिवार, स्वास्थ्य अच्छा होगा, बाकी जो भी जिंदगी बितानी है उसको वो अपना स्वत ही समझदार बन जाएगा स्वास्थ्य अच्छा होगा शिक्षित होगा सब कुछ हो जाएगा।

दो प्रायोरिटी मुख्य, प्रायोरिटी सब मुख्य होती है, सबकी मुख्य होती हैं सबकी अपनी अपनी महत्वता होती है पर ये दो बातें, हमनें ध्यान दिया इन पे, इंग्लिश स्कूलें खोल दीं अंग्रेजी स्कूले, ये हमारे बच्चे हिंदुस्तान में जो है सबसे आगे निकलेंगे इंग्लिश बच्चे गांव के गरीब दलित पिछड़े बच्चे बच्चियां इंग्लिश बोलती हैं हम जवाब ही नहीं दे पाते हैं, हमारी इंग्लिश कमजोर है वो हम से आगे निकल गए बच्चे, गर्व होना चाहिए सरकार को, उसको बंद करने की योजना बनाई अब पब्लिक दबाव में चुप हो गए।

राजीव गांधी स्कॉलरशिप स्कीम के हाल को लेकर प्रश्न पर गहलोत ने दिया जवाब

अरे भैया इनको समझाए कौन, कौन समझाए, डेढ़ साल बनाम पांच साल है ये तो, इसका नाम ही डेढ़ साल बनाम पांच साल सरकार पड़ गया है अभी से ही, आप कह रहे हो भीख मांग रहे हैं विदेश के अंदर वो जिनको हमने भेजा विदेश पढ़ने के लिए अगर ये पैसा रिलीज नहीं कर रही है उनके लिए जो वादा किया हुआ था तो भीख ही मांगेंगे, नौकरी करेंगे और क्या करेंगे और उसकी संख्या कम कर दी इन्होंने, पांच सौ से दो सौ मेरे ख्याल से, ये तमाम जो गवर्नेंस चल रही है अच्छी नहीं चल रही, बार बार मैं आगाह कर रहा हूं सीएम साहब को, वो बात तो अच्छी करते हैं पर वो, उनका या तो कंट्रोल नहीं रहा ये, कंट्रोल नहीं रहा दिखता सीएमओ भी सीएमआर भी।

स्मार्ट मीटर के प्रश्न पर गहलोत ने भाजपा की करी खिंचाई

ये मेरे ख्याल से भारत सरकार की और पूरे देश की योजना है ये, रिफॉर्म्स में आता है ये इसलिए तो आपको पब्लिक को समझाना पड़ेगा इसके मायने क्या हैं नंबर 1, नंबर 2 ये जो परसेप्शन बन गया है कि बिल बहुत तेज चल रहे हैं या ज्यादा बिल आ रहे हैं वो सच्चाई बतानी चाहिए इनको कि भई कहीं मीटर में गड़बड़ तो नहीं है गड़बड़ तो कही भी हो सकती है वो इनको खुद को स्पष्टीकरण करना चाहिए।

फिल्म उदयपुर फाइल्स को लेकर न्यायालय में चल रही सुनवाई पर गहलोत ने दिया संदेश

देखिए न तो मैंने फिल्म देखी है ,हां तो सुप्रीम कोर्ट ने सोच समझकर रोक लगाई, जो घटना हुई है उसके अंदर अगर मान लीजिए कोई उनके दिमाग में ऐसी बात आई है तो रोक लगाई है तो सोच समझ के लगाई होगी।

भाजपा के प्रदेश प्रभारी ल राधामोहन दास अग्रवाल के डॉ मनमोहन सिंह पर टिप्पणी के विषय में गहलोत का बयान

वो तो कई कमेंट्स कर चुके हैं हमारे नेताओं के बारे में राजस्थान में, जब आते हैं तो वो मीडिया में ही छाए रहें वो सोच के आते हैं दिल्ली से आज मुझे न्यूज कौन सी बनवानी है। कल मुझे मिल गए थे वो एयरपोर्ट पर , मैं आप लोगों से मिल रहा था तब भी वो मेरे पास आ गए अगर वो थोड़ा रुक जाते अंदर मान लीजिए कोई बात नहीं थी, आ गए तो मैंने उनके लिए जगह खाली कर दी, भई सत्ता पक्ष है सम्मान करना चाहिए उनका।

आप समझ सकते हो वो सोच के आते हैं बोलने के लिए ये उचित नहीं है।मनमोहन सिंह जी के बारे में ये देश सुनना कभी नहीं चाहेगा,मनमोहन सिंह जी को पूरी दुनिया के मुल्कों में जो उनके बारे में ओपिनियन है आप और हम लोग कल्पना नहीं कर सकते, दुनिया के मुल्कों को उस वक्त आश्चर्य होता था जब कभी इनकी आलोचना होती थी तो लोग कहते थे कि हो क्या गया है हिंदुस्तान को, जो दुनिया का माना हुआ इकोनॉमिस्ट है उसके बारे में लोगों की अलग ओपनियन है दुनिया के अंदर, जो चाहे कुछ भी बोल दे तो वो बोलेंगे तो आलोचना इन्हीं की होगी।

राइट टू हेल्थ लागू करने के मुद्दे पर गहलोत ने कही बड़ी बात

राजस्थान ने इतिहास बनाया है, हमारी सरकार ने इतिहास बनाया है इतिहास बनाया है, राइट टू हेल्थ एक्ट करके हमनें चिरंजीवी को, RGHS को और जो दवाईयां फ्री, टेस्ट फ्री, और हेल्थ का पूरा ध्यान रखो कानूनी अधिकार दे दिया हम ने आम जनता को प्रदेशवासियों को पूरे मुल्क में दुनिया में चर्चा इसकी हो रही है, इनको कौन समझावे भई, गिग वर्कर्स एक्ट बनाया हमनें साथ में,गिग वर्कर्स एक्ट बनाया तो गिग वर्कर बेचारा आप देखते हो जोमैटो,जो भी है, डिलीवरी बॉय, इन सबके लिए है वो, ठेला वाले के लिए भी है रिक्शा वाले के लिए भी है, अब ये ऐसी क्लास है जो कब तकलीफ में आ जाए, कानून पास कर दिया तो आर्टिकल लिखा न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार ने कि राजस्थान सरकार पहली सरकार है जिसने कानून बनाया है, और ऐसा कानून हर राज्य में बनना चाहिए देश के अंदर और दुनिया के मुल्कों में बनना चाहिए इसका मतलब वहां दुनिया के मुल्कों में भी दो चार जगह होगा तो होगा ये इतना बड़ा क्रांतिकारी कानून हम ने बनाया, राइट टू हेल्थ किसे कहते हैं पहला राज्य राजस्थान बना है, अब अगर ये सरकार बंद कर रही है, तो इनकी गवर्नेंस में अप्रोच यही होगी इनकी और ये सब बातें इनको ले डूबेगी।

अमित शाह के दौरे और राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर पूछे गए प्रश्न पर गहलोत के विचार

ये इनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है, मैंने तो जो है पब्लिक इंटरेस्ट के अंदर जो मुझे उचित लगा कि जो हम लोग विपक्ष में हैं जो सुनते हैं जो अफवाहें मीडिया में अखबारों में आ रही थीं अभी भी आ रही हैं कि भई दो चार राज्यों में मुख्यमंत्री हटाए जाएंगे, ठीक है, तो मैंने भी कमेंट कर दिया, जो षडयंत्र हो रहे हैं प्रदेश में या देश में, तो ये तो मेरा एक कैजुअल कमेंट था अब कोई षड्यंत्र तो मैंने देखा नहीं है षड्यंत्रकरियों को वो क्या षड्यंत्र कर रहे हैं ै पर कम से कम सरकार आई है अभी डेढ़ साल ही हुआ है आए, अब एक डेढ़ साल में सरकार बदलती है तो वो राज्य के इंटरेस्ट में नहीं रहता है इसलिए मैंने आगाह कर दिया सरकार को, आगाह कर दिया।

अब कमेंट का फर्क पड़ना,पड़ता है अच्छी बात है, अगर विपक्ष को वो सम्मान देंगे,तो लोकतंत्र मजबूत होगा ये मेरा मानना है, ये बात मैं मोदी जी के लिए भी कहता हूं कि आप विपक्ष को दुश्मन नहीं समझें। आज का टाइम इतना खराब आ गया है कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें हों वो दुश्मन समझती हैं विपक्ष को, वो दुश्मन नहीं हैं, अगर आप इन्वॉल्व करके अगर आप फैसले करेंगे आप अच्छी गवर्नेंस दे पाएंगे ये मेरा मानना है , अगर आप इस प्रकार से सोचेंगे कि दुश्मन हमारे हैं हर बात को आप काट करेंगे,मान सम्मान नहीं देंगे तो नुकसान उनको भी है।

आईपीएस अधिकारी के साथ धक्का मुक्की होने संबंधी खबर अखबार में आने संबंधी प्रश्न पर गहलोत का जवाब

वो मैंने भी सुना है काफी दिन से सुन रहा हूं कोई घटना हुई है वो तो अब क्या घटना हुई है मुझे, आप को जानकारी है तो बता दीजिए, क्या हुआ है ? कोई मारपीट कर रहे हैं,थप्पड़ लगा दी, कोई मारपीट हो गई ये अफवाहें चल रही हैं ऐसी अफवाहें सीएमओ के बारे में सीएमआर के बारे में चलना मैं समझता हूं मैंने कभी सुना नहीं और मुझे इस पर यकीन भी नहीं होता है व्यक्तिगत मुझे यकीन नहीं होता है पर अगर इतनी चर्चा चल पड़ी है तो या तो सच्चाई बताए सरकार या फिर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए पब्लिक को। लोगों में इकबाल खत्म हो जाता है कि अगर सीएमआर के अंदर सीएम की मौजूदगी के अंदर अगर ऐसी कोई ऐसी घटनाएं होती हैं और सीएमओ में या सीएमआर में पता ही नहीं क्या हुई की नहीं हुई ये पता ही नहीं तो वो उचित नहीं है तो उनको स्पष्टीकरण देना चाहिए पब्लिक को।
ये बात उचित नहीं है कि जहां नंबर वन ऑथोरिटी हमारी है प्रदेश की है मुख्यमंत्री तो बहुत बड़ा पद है वहां पर अगर ये घटना होती है तो स्पष्टीकरण आना चाहिए।

विद्यालयों के मर्जर के मुद्दे पर क्यों चुप हैं भाजपा

कोई बात नहीं, जो जस्टिफाई है वो करो। अगर जस्टिफाई लगता है, हमें जस्टिफाई लगा होगा तो हम ने कर दिया होगा, इनको जस्टिफाई लगता है, हमारी शिकायत यही हो सकती है कि भई राजनीतिक तौर से आप कोई फैसला मत करो, अगर आप जस्टिफाई करते हैं तो फैसला करे सरकार।

ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल की बैठक और राहुल गांधी के मिशन पर गहलोत ने रखे विचार

राहुल गांधी का जो मिशन है, यह मिशन बन गया राहुल गांधी का जातिगत जनगणना हो देश के अंदर 1931 में हुई थी लास्ट उसके बाद कभी हुई नही, तो वो यह कहते है एक बार मान लीजिए देश मे 76 साल के बाद में भी जिस प्रकार से गरीब, गरीब होता जा रहा है, गरीबी बढ़ती जा रही है, अमीर ज्यादा बढ़ते जा रहे है, तो अमीर गरीब की खाई बहुत ज्यादा बढ़ गई है, इसलिए जरूरी है कि एक बार जातिगत जनगणना हो, सोशल इकोनॉमिक सर्वे भी हो जायेंगे तो इसे कम से कम सरकारों को, सरकारें कौनसी होगी कोई पता नही, उनको सुविधा हो जायेगी, किस प्रकार से हम अपनी योजना बनायें, प्लान करे, बजट बनाये ,तो तमाम तरह के ऐसे साइंटफिक तरीके से फैसले होंगे वह जनहित के अंदर होंगे, और ज्यादा पिछडे है एससी के है, एसटी के है, ओबीसी के है, या जो इकोनॉमिक बेकवर्ड है, उन सब का मतलब इस प्रकार से जस्टीफाई हो जायेगा, उनको अब 10 प्रतिशत आरक्षण मिल गया अभी ईडब्लयूएस को आपको जानके खुशी होगी या गर्व होगा, यह मैने सबसे पहले हिन्दुस्तान के अंदर 21 मई 2003 को मैने खुद ने इसको पहला मेरा राज्य है कांग्रेस सरकार थी, जब हमने इसको उठाया था, जब चर्चा ही नही थी इसकी, जो बैकवर्ड़ लोग है इकोनॉमिक बैकवर्ड़ है उनको भी आरक्षण मिलना चाहिए, यह मैने पहली बार उठाया था, देश के अंदर उसके बाद मे फिर वाजपेयी सरकार चली गयी, मनमोहन सरकार ने कमीशन बनाया इसके लिये चलता रहा चलता रहा, फिर इन्होने कमीशन बनाया होगा, अब जाकर के वह दो- तीन साल पहले 10 प्रतिशत आरक्षण मिल गया है, पालार्यमेण्ट के कानून बनाकर मिल गया है ठीक है, तो 50 प्रतिशत सीमा की जो बात करते है राहुल जी वह 60-70 पर तो ऐसे ही आ गये है, कानूनी तौर से आ गये है, तो सीमायें ही नही है, तो वह कहते है कि आप अगर मान लीजिए यह सब सीमायें तोड़े और पूरा सर्वे हो उस वक्त यह फैसला करो कि वास्तव में आरक्षण किस रूप में किन-किन बातों पर कैसे हो, आपको आसानी हो जायेगी, राहुल गांधी कोई जनरल कास्ट के खिलाफ नही है, वह यह कहते है कि वह बोलता है आदमी, जब सुनते होंगे एससी, एसटी, ओबीसी, और ईडब्ल्यूएस सबके लिए बोल रहे है, आज कोई कम्यूनिटी है, जनरल कास्ट की भी है, उन में ही गांवो मे आप जाओगे तो गरीबी मिलेगी, कोई कम्यूनिटी हो, शादी नही होती है बच्चियों की ऐसे- ऐसे गांव है, ऐसे- ऐसे इलाकें है, ऐसे -ऐसे परिवार है, उनके बच्चियों की शादिया नही होती है, मै खुद देखता हूँ ,कई जगह सुनता हूँ बहुत दुख होता है कि भाई इसलिये कि इस परिवार मे गरीबी है, इसलिये बच्ची की शादी नही हो पा रही है, क्योकि दहेज प्रथा आज भी है, वह तो कुरीतियाँ समाज में है, उस पर आजकल तो राजनीति पार्टियां जो है इमरजेंसी के बाद में नसबंदी पर है, दहेज प्रथा है, पहले हमारें भाषण होते थें तो सामाजिक सरोकार से होते थे, सामाजिक सरोकार मे क्या-क्या कर सकते है, मीडिया का फोकस भी सामाजिक सरोकार पर होता था, अब तो हम अखबार देखते है तो ढूँढना पडता है, खबर कहा मिलेगी, तो यह स्थिति है, तो कहने का मतलब यह है कि यह तमाम बातें हमारे सामने है। यह बात है।

यह जो है राहुल जी की जो सोच है अब उसको लोग है क्या है जनरल कार्स्ट वाले कुछ नेता लोग है बीजेपी के अंदर या आरएसएस के लोग है जिन्होने कभी संविधान को ही स्वीकार नही किया, अब तो यह अम्बेड़कर, अम्बेड़कर, अम्बेड़कर की बात करते है, और वह अमित शाह जी बोल गये थे हाउस के अंदर कटाक्ष कर दिया है, क्या किया है, पर उसको लेकर इशू बन गया था कंट्री में कहने का मतलब है कि जो जिस प्रकार से इन्होने किया है, यह अपने आप मे राहुल गांधी का स्पष्ट सोचना है कंट्री के हित में सोचना है, क्योंकि ये रिफॉर्म्स कोई एकदम लागू होते नहीं हैं, सालों लग जातें है इसके अंदर तब जाकर के आपको उसका फल मिलता है, ज्योतिबा फूले ने और सावित्री बाई फूले ने सौ साल पहले जो फैसलें किये या जो अभियान चलाया था, रिफॉर्म के तो उसमें कितना टाइम लगा होगा, अब जाकर के 20 से 25 सालों में यह सब शिक्षा हुई लडकियो की, लोग माइंड नही करते है लडकियो को पढ़ाने में या महिलाओं को वह तो कह रहे है उस वक्त तो पाप समझते थे लडकियों को पढाना रिफॉर्म शुरू उस वक्त किया, कितना लम्बा अरसा लगा, तो यह राहुल गांधी चाहते हैं, जो एससी, एसटी, ओबीसी के लोग है, उनको मुख्यधारा मे लाया जायें, मुख्यधारा में लायेंगे तो देश की ताकत बडेगी, एक तबका भी आपका अगर परिवार मे एक भाई कमजोर रहता है, और एक भाई आगे बढ़ जाता है, तो परिवार मे भी वह एक जो स्पीड़ होती है आगे बढ़ने की वह टूट जाती है, यह देश है सब तबके कम से कम मुख्यधारा में आ जाये तब तो कोई एक से हो नही सकते तो उसमे उनकी सोच है वह क्रांतिकारी सोच है,

मैं पूरा समर्थन कर रहा हूं उनको मैंं चाहता हूँ कि एसटी,एससी,ओबीसी को मालूम पड़े,मुख्य रूप से ओबीसी के लोगो को उनको पता ही नही राहुल गांधी जी जो बोल रहें है, उसका फायदा हमें मिलेगा कि नही, ओबीसी के अधिकांश लोगो को जिन्होने बीजेपी ने गुमराह कर रखा है, उन लोगो को धर्म के नाम पर उनके समझ में बाद में आयेगी, क्योकि इतना बड़ा मुद्दा राहुल गांधी उठा चुकें है, इतना बड़ा मुद्दा यह कि उनको खुद को भी नही मालूम है, उनके नेताओं को मालूम हो रहा है, यह सामाजिक संगठन है ओबीसी के उनको मालूम है कि यह बहुत बड़ा मुद्दा हो गया, हमारे इंटरेस्ट कें अंदर आम जनता को मालूम नही है, तो यह भी अभियान चलना चाहियें, अभियान खाली ओबीसी वालें क्यो चला रहें है, अभियान जनरल कास्ट वालें क्यो नही चला रहें है, क्योकि जब यह मैं मुख्यधारा की बात कर रहा हूँ, पब्लिक इंटरेस्ट में है, तो कोई वर्ग हो, उनको आपस में इन अभियानों को चलाना चाहियें, जिससे की यह सर्वे होकर रहें, एनड़ीए गवर्नमेंट ने अभी फैसला कर लिया, कैबिनेट में अभी आशंका लोगो को ऐसा नही है, बिहार चुनाव के बाद में कोई ना कोई बहाना करकें इसकों वापस पीछे छोड़ दें, यह अभियान जो फैसला हुआ है, इसके ऊपर भी लोग डाऊट कर रहें है, हम चाहेंगे कि वो फैसला लागू हो, एनड़ीए गर्वेमेंट अभी है तो यह सेंसस लागू करे, सेंसस के माध्यम से ओबीसी जो है, यह जातिगत जनगणना वह पूरा करें ।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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