जयपुर में 30 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में फरार पटवारी नरेन्द्र मीणा (31) की तलाश में एसीबी टीम लगातार दबिश दे रही है। एसीबी का दावा है- जल्द ही घूसखोर पटवारी शिकंजे में होगा। एसीबी ने रिश्वत लेते पटवारी को पकड़ने के लिए 21 सितम्बर जाल बिछाया था। घेराबंदी कर घूस की रकम के साथ दलाल ही पकड़ में आया। पटवारी फरार हो गया था। इस घटना का वीडियो भी सामने आया।
जल्द अमीर बनने की चाह में पटवारी मोटी घूस वसूलने लगा था। पहले भी वह भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में नोटिस मिलने के बाद बचकर निकल चुका है।
इस तरह पकड़ा गया दलाल, PHOTOS देखिए…





रिश्वत की रकम कम करने को लेकर कई बार बातचीत एडि. एसपी (एसीबी) संदीप सारस्वत ने बताया- 19 सितम्बर-2025 को झोटवाड़ा निवासी प्रॉपर्टी कारोबारी ने एसीबी में रिश्वतखोर पटवारी नरेन्द्र मीणा के खिलाफ शिकायत दी। प्रॉपर्टी कारोबारी ने एसीबी को बताया कि कुछ समय पहले उसने हाथोज में 10 बीघा जमीन खरीदी है। नामान्तरण खुलवाने के लिए पटवारी नरेन्द्र मीणा से कॉन्टैक्ट किया।
नरेन्द्र मीणा जानता है कि नामान्तरण खुलने पर ही जमीन उसके नाम रजिस्टर्ड हो सकती है। इसके एवज में नरेन्द्र मीणा ने 50 लाख रुपए की मांग की। वॉट्सएप कॉल पर डिमांड के रुपए कम करने को लेकर बातचीत हुई। 50 लाख रुपए में से 5 लाख रुपए का डिस्काउंट देकर नरेन्द्र मीणा ने 45 लाख रुपए मांगे।
मिलने पर 30 लाख रुपए में हुई डील पटवारी नरेन्द्र मीणा से वॉट्सएप कॉल पर प्रॉपर्टी कारोबारी ने बात की। पटवारी ने शाम करीब 7 बजे कालवाड़ रोड पर मंगल चाय घर पर मिलने के लिए बुलाया। चाय पीते-पीते प्रॉपर्टी कारोबारी के साथ बैठकर पटवारी बात करने लगा।
बातचीत में नामातंरण खोलने के एवज में लास्ट 35 लाख रुपए की डिमांड रखी गई। इसके बाद 30 लाख रुपए में डील तय हुई। रिश्वत के 30 लाख रुपए भी 15-15 लाख रुपए की दो किस्तों में देना तय हुआ।

दलाल को लेकर पटवारी पहुंचा घर 21 सितम्बर की सुबह करीब 8:45 बजे पटवारी नरेन्द्र मीणा अपने परिचित विकास शर्मा (36) के साथ प्रॉपर्टी कारोबारी के घर पर मिलने पहुंचा। पटवारी नरेन्द्र मीणा ने कहा- मुझे किसी के जरिए मेरी शिकायत होने के बारे में पता चला है।
प्रॉपर्टी कारोबारी ने विश्वास दिलाने के लिए कहा कि मेरा तो आप लोगों से काम पड़ता रहता है, मैं आपकी क्यों शिकायत करूंगा? मुझे पैसों की व्यवस्था करने में समय लग रहा है। प्रॉपर्टी कारोबारी के हाथ से उसका मोबाइल लेकर पटवारी ने स्विच ऑफ कर दिया। कहा- मामला सीरियस है। मैं आपका काम कर दूंगा। परन्तु आपको रकम एक साथ ही देनी पड़ेगी। अब इस संबंध में किसी से कोई बातचीत नहीं करोगे।
व्यवस्था होने पर सिर्फ ‘जय श्री बालाजी’ बोलोगे पटवारी नरेन्द्र मीणा के साथ आए विकास शर्मा को अपना परिचित बताकर उस जमीन में एक प्लॉट कम रेट में देने की बात भी कही। विकास शर्मा ने भी धमकाते हुए कहा- जमीन के नामान्तरण खुलवाने के बदले पैसे नहीं देने पर स्टे लगवा देंगे।
पटवारी ने कहा कि रुपयों की व्यवस्था होने पर कॉल कर ‘जय श्री बालाजी’ बोलकर व्यवस्था होने की जानकारी दोगे, इससे ज्यादा कुछ नहीं बोलोगे। प्रॉपर्टी कारोबारी के पास 5 लाख रुपए होने पर एसीबी की ओर से 25 लाख रुपए के डमी नोट की व्यवस्था की गई।
21 सितम्बर दोपहर करीब 2:30 बजे शिकायतकर्ता ने कॉल कर पटवारी को कोडवर्ड ‘जय श्री बालाजी’ बोलकर रुपयों की व्यवस्था होना बताया। पटवारी ने उसे गोविन्दपुरा पहुंचने की कहा।

एसीबी टीम ने घेराबंदी कर दलाल को पकड़ा गोविन्दपुरा में करीब 15 मिनट इंतजार करने के बाद कॉल कर होटल देसी ठाठ के सामने बुलाया। दोपहर करीब 3:15 बजे पटवारी नरेन्द्र मीणा स्कॉर्पियो गाड़ी से होटल देसी ठाठ के सामने आया। इधर-उधर देखकर स्कॉर्पियो लेकर रवाना हो गया। इसके बाद पटवारी ने वापस दो-तीन चक्कर लगाए।
करीब 20 मिनट बाद कॉल कर पटवारी ने रिश्वत की रकम अपने दलाल विकास शर्मा को देने को कहा। होटल के पास ही दुकान पर बैठे मिले दलाल विकास शर्मा ने स्विफ्ट कार का गेट खोलकर रुपए की थैली रखने को कहा। दुकान में शिकायतकर्ता को छोड़कर दलाल विकास शर्मा अपनी स्विफ्ट कार में आकर बैठा।
एसीबी ने घेराबंदी कर उसको पकड़ लिया। पूछताछ में विकास शर्मा ने सामने वाली दुकान कृष्णा इंटरप्राइजेज खुद की होना बताया। एसीबी ने दलाल विकास शर्मा निवासी पीथावास हाथोज को राउंडअप किया। उसके कब्जे से रिश्वत के लिए 30 लाख रुपए भी जब्त किए गए।
रिश्वत के रुपए लेते समय लगा रहा था चक्कर विकास शर्मा ने पूछताछ में बताया- पटवारी नरेन्द्र मीणा ने उसे कॉल कर कहा था कि ये मेरे भांजे का मोबाइल नंबर है। तुम्हारे पास प्रॉपर्टी कारोबारी 30 लाख रुपए लेकर आएगा। रुपए लेने के बाद राजास आकर इस मोबाइल नंबर पर कॉल कर लेना। मैं तुम्हारे को वहीं पर मिलूंगा और पैसे ले लूंगा।
प्रॉपर्टी कारोबारी से रुपए लेने के बाद पटवारी नरेन्द्र मीणों को बताया। उसने पहले बताए अनुसार रुपए लेकर आने को कहा। रिश्वत की रकम लेकर दुकान पर आने के दौरान पटवारी नरेन्द्र मीणा अपनी स्कॉर्पियो से सामने रोड पर चक्कर लगा रहा था।
दो-तीन बार रोड पर दुकान के सामने से निकला था। दलाल विकास शर्मा से कॉल करवाने पर पटवारी नरेन्द्र शर्मा के दो मोबाइल नंबर स्विच ऑफ बता रहे थे। फरार पटवारी की तलाश के दौरान लखेर गांव की तरफ स्कॉर्पियो से भागने का पता चला।
एडि. एसपी (एसीबी) संदीप सारस्वत ने बताया- फरार पटवारी नरेन्द्र मीणा कालवाड़ रोड पर मीणों का मोहल्ला चम्पापुरा का रहने वाला है। वह पिछले साढ़े तीन साल से पटवारी हाथोज के पद पर तैनात है। गृह जिला होने के बाद भी जालसाजी कर हाथोज पटवारी के पद पर लग गया।
एसीबी टीमों की लगातार दबिश के चलते रिश्तेदार-परिचित भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आए। एसीबी का दावा है कि जल्द ही घूसखोर पटवारी उनकी गिरफ्त में होगा।

दर-दर भटक रहा रिश्वतखोर पटवारी पटवारी नरेन्द्र मीणा अब तक पकड़ा नहीं गया है। दर-दर भटक रहा रिश्वखोर पटवारी फरारी के दौरान साथी महिला पटवारी, एक कमांडो सहित 12 से अधिक लोगों के पास मदद मांग चुका है। पटवारी का पीछा कर रही एसीबी टीम भी इन सभी लोगों तक पहुंची।
एसीबी मुख्यालय बुलाकर इन सब से पूछताछ की जा चुकी है। एसीबी के पीछे पड़े होने की जानकारी के बाद इन लोगों ने भी मदद नहीं की और उससे दूरी बना ली। फरारी के दौरान पटवारी की मदद करने वालों पर भी एसीबी सख्त कार्रवाई करेगी।
घूसखोरी के लिए रखता था तीन मोबाइल फोन एसीबी कार्रवाई के बाद पटवारी नरेन्द्र मीणा ने अपने तीनों मोबाइल बंद कर दिए। एसीबी से बचने के लिए वह सबसे पहले अपने साले के पास पहुंचा था। उसके बाद वह साथी महिला पटवारी के घर पर भी गया था। एसीबी के पीछे लगे होने का पता चलने पर भाग निकला।
एसीबी सूत्रों की मानें तो नरेन्द्र मीणा सौदेबाजी का बड़ा खिलाड़ी है। रिश्वत की रकम को बहुत ज्यादा बताते हुए शिकायतकर्ता ने कम करने को कहा। पटवारी नरेन्द्र मीणा का कहना था कि ऐसे मौके बार-बार थोड़े आते हैं। अब नहीं कमाऊंगा तो कब कमाऊंगा। वह जल्द अमीर बनाना चाहता था। घूमने के साथ ही घूसखोर पटवारी पार्टियों का भी शौकीन था। आए दिन पार्टियों के चलते ही वह अय्याशी का शौकीन हो गया था। उसकी एक गर्लफ्रेंड भी है।





