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कैबिनेट सचिव ने ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस के तहत “कंप्लायंस रिडक्शन एवं डीरेगुलेशन” में राजस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ की सराहना की

कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने शुक्रवार को देशभर के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से “कंप्लायंस रिडक्शन एवं डीरेगुलेशन” एजेंडा के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा की।

इस दौरान राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस के अंतर्गत ‘कंप्लायंस रिडक्शन एवं डीरेगुलेशन’ के लिए राज्य की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और राज्य में समग्र विनियामक पर्यावरण में सुधार के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों को साझा किया।

कैबिनेट सचिव ने कार्यक्रम में तेज़ी से उपलब्धि प्राप्त करने के लिए राजस्थान की सराहना की। उन्होंने राज्य की उत्कृष्ट प्रदर्शन क्षमता और नियामक ढांचों के सरलीकरण, युक्तीकरण और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की प्रशंसा की, जो बिजनेस फ्रेंडली वातावरण बनाने में सहायक है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान ने ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस इकोसिस्टम को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए कई परिवर्तनकारी सुधार लागू किए हैं। एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए राज्य ने नियम 90ए में संशोधन कर चेंज ऑफ़ लैंड यूज प्रक्रिया को सरल बनाया है, जिसके तहत समय सीमा 60 से घटाकर 30 कार्य दिवस कर दी गई है। इस समय सीमा के बाद स्वतः स्वीक ति का प्रावधान किया गया है। इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी में कमी आएगी और नए उद्यमों की स्थापना तेजी से होगी।

प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में भी राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रगति की है। एमएसएमई के लिए कंसेट टू एस्टैब्लिश और कंसेट टू ऑपरेट हेतु थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन की समय सीमा 120 दिनों से घटाकर 21 दिन और रेड / वृहद् श्रेणी के उद्यमों के लिए 60 दिन कर दी गई है। इसके अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेल्फ सर्टिफिकेशन के आधार पर सभी श्रेणियों में सीटीओ का सिस्टम-जनरेटेड ऑटो रिन्यूवल शुरू किया है। साथ ही, वाटर एण्ड एयर पॉल्यूशन रूल्स में संशोधन के माध्यम से व्हाइट कैटेगरी उद्योगों की सूची को 104 से बढ़ाकर 877 कर दिया गया है, जिससे अधिक गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को नियामकीय आवश्यकता से छूट मिलेगी। इससे परियोजना अनुमोदनों में तेजी और औद्योगिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

एक और महत्वपूर्ण सुधार में ‘राजस्थान शॉप्स एण्ड कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 1958’ के अंतर्गत कर्मचारियों की सीमा शून्य से बढ़ाकर 10 कर दी गई है, जिससे सूक्ष्म उद्यमों पर अनुपालन बोझ कम हुआ है। राज्य ने थर्ड पार्टी फायर इंस्पेक्टर्स को भी लागू किया है और फायर एनओसी की वैधता अवधि बढ़ाई है, जिससे फायर सुरक्षा कंप्लांयस को सुगम बनाया गया है।

ग्रामीण उद्योगों के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई आवश्यकताओं के युक्तिकरण में राजस्थान अग्रणी राज्यों में शामिल है। लेआउट प्लान वाले क्षेत्रों में सड़क चौड़ाई 9 मीटर और बिना लेआउट वाले क्षेत्रों में 4.5 मीटर निर्धारित की गई है। राज्य ने औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में भूमि उपयोग को अनुकूलित करने हेतु भी महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। नगरीय विकास विभाग एवं रीको ने भवन मानकों में संशोधन कर भूमि के सदुपयोग को सुनिश्चित किया है और पार्किंग मानकों का भी युक्तीकरण किया गया है। पूर्व में वाणिज्यिक भूखण्डों पर 50 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की सीमा को अब समाप्त कर दिया गया है, जिससे नगरीय योजना में अधिक लचीलापन सुनिश्चित हुआ है।

राज्य की सिंगल विंडो प्रणाली ‘राजनिवेश’ को चैटबॉट के साथ उन्नत किया गया है, जो विभिन्न विभागों की जानकारी को एकीकृत कर निवेशकों को रियल टाइम स्वचालित सहायता प्रदान करता है।

इन व्यापक और दूरदर्शी सुधारों के माध्यम से राजस्थान ने कंपलांयस रिडक्शन, डीरेगुलेशन और इन्वेस्टर फैसिलिटेशन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। राज्य ने तेज़, पारदर्शी और कुशल शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।

वीडियो कॉन्फ्रेन्स में कौशल विकास एवं उद्यमिता के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा, ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अजिताभ शर्मा, राजस्व व उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव दिनेश कुमार, यूडीएच के प्रमुख शासन सचिव डॉ. देबाशीष पुष्टि और उद्योग, वाणिज्य व सीएसआर आयुक्त रोहित गुप्ता भी शामिल हुए।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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