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जयपुर में सरकारी हॉस्पिटल के अधीक्षकों ने सामूहिक इस्तीफे दिए:निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का विरोध, एसएमएस हॉस्पिटल के प्रिंसिपल को सौंपा पत्र

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और हॉस्पिटलों के अधीक्षकों को निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के आदेशों का विरोध तेज हो गया है। आज सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज (SMS) से अटैच तमाम हॉस्पिटल के अधीक्षकों ने प्रिंसिपल डॉक्टर दीपक माहेश्वरी को सामूहिक इस्तीफे की पेशकश की। इस दौरान वे सभी एसएमएस हॉस्पिटल अधीक्षक के चैंबर में पहुंचे और वहां इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद हेल्थ मिनिस्टर गजेन्द्र सिंह खींवसर से मिलने रवाना हो गए।

सोमवार दोपहर को जे.के. लोन हॉस्पिटल के आर.एम. सेहरा, सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय से आशा वर्मा, सैटेलाइट हॉस्पिटल सेठी कॉलोनी के गोर्वधन ​मीणा, गणगौरी हॉस्पिटल से डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन समेत अन्य हॉस्पिटल के अधीक्षक अपना इस्तीफा पत्र लेकर एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचे।

यहां एसएमएस हॉस्पिटल में प्रिंसिपल के चैंबर में बातचीत के बाद सभी ने अपना इस्तीफा पत्र और ज्ञापन पत्र प्रिंसिपल डॉक्टर दीपक माहेश्वरी को सौंपा। इसके बाद सभी इस मामले पर ज्ञापन पत्र और इस्तीफे की कॉपी सौंपने के लिए हेल्थ मिनिस्टर गजेन्द्र सिंह खींवसर से मिलने चले गए। विरोध कर रहे इन डॉक्टरों (अधीक्षकों) ने सरकार के फैसले को एक तरफा बताया। उन्होंने कहा- कि प्रशासन ने बिना किसी विचार-विमर्श करके ये आदेश जारी कर दिया, जिसमें कई अनियमितताएं है।

कल सचिव संग हो सकती है बैठक

मंत्री खींवसर से उनके आवास पर मुलाकात के बाद सभी डॉक्टरों ने अपनी बात रखी। उन्होंने क​हा- प्रेक्टिस पर रोक लगाने और हॉस्पिटलों में उनकी वर्किंग को 25 फीसदी तक सीमित करना न्यायोचित नहीं है।

उन्होंने कहा- 57 साल की उम्र तक के ही डॉक्टर अधीक्षक और प्रिंसिपल के लिए आवेदन कर सकते हैं, ये कैसा नियम है। जबकि सरकार ने इस पद पर रहने की उम्र 62 साल निर्धारित कर रखी है। ऐसे में अगर कोई डॉक्टर 58 या 59 साल का है और सीनियर है। वह इस पद के लिए आवेदन ही नहीं कर सकेगा।

ये तमाम बातें सुनने के बाद मंत्री खींवसर ने आश्वासन दिया कि वे जल्द इस विवाद का कोई निष्कर्ष निकालेंगे। इसके लिए उन्होंने मेडिकल एज्युकेशन सचिव संग 18 नवंबर को बैठक बुलाने के लिए कहा है।

RMCTA ने जताया था विरोध

इससे पहले 11 नवंबर को जारी आदेशों का राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) ने सरकार के इस फैसले का विरोध जताया था। इसे क्लिनिकल चिकित्सकों को हाशिए पर धकेलने वाला बताया था। साथ ही अधीक्षक, प्रिंसिपल पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन की अधिकतम 57 साल की आयु का नियम नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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