चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में B.Sc. नर्सिंग फाइनल ईयर के 30 कश्मीरी सहित 33 स्टूडेंट्स को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया। तभी से स्टूडेंट्स धरने पर बैठे हैं।
स्टूडेंट्स का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने B.Sc. नर्सिंग कोर्स के लिए राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से मान्यता नहीं ली है।
इन संस्थाओं की मान्यता के बिना उनकी डिग्री वैध नहीं मानी जाएगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन उनके भविष्य से खेल रहा है।
इससे पहले, यूनिवर्सिटी परिसर में बुधवार को धरने पर बैठे स्टूडेंट्स और पुलिस प्रशासन के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। इनके अलावा जीएनएम के 6 स्टूडेंट्स को भी सस्पेंड किया गया।
गंगरार थानाधिकारी श्यामाराम ने बताया- बुधवार से शुरू हुआ धरना आज भी जारी है। छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, लेकिन वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।
लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए पुलिस मौके पर मौजूद है। अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है।
पहले देखिए, प्रदर्शन की PHOTOS…



स्टूडेंट्स का आरोप- डिग्री की वैलिडिटी पर संकट
कश्मीर निवासी स्टूडेंट अबरार ने बताया कि वे 2022 बैच के स्टूडेंट हैं। इस समय उनका फाइनल ईयर चल रहा है। मार्च में उनकी फाइनल परीक्षा होनी है, लेकिन अब तक कोर्स को RNC और INC से मान्यता नहीं मिली है।
अगर कोर्स को मान्यता नहीं मिली तो उनकी डिग्री बेकार हो जाएगी। वे न तो प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन करा पाएंगे, न ही नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे।
अबरार ने कहा कि छात्र पहले भी 2024 में इसी मुद्दे पर विरोध कर चुके हैं। उस समय यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया था कि 4 दिसंबर 2024 तक अगर मान्यता नहीं मिली तो छात्रों को किसी अन्य मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में उसी स्कॉलरशिप पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। लेकिन अब 2026 आ गया है। छात्रों के अनुसार, अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

समय की कमी से बढ़ी चिंता, फिर शुरू किया आंदोलन
स्टूडेंट्स का कहना है कि अब उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा है। फाइनल सेमेस्टर चल रहा है और कुछ ही महीनों में परीक्षा है। ऐसे में वे बार-बार “हमें समय दीजिए” का जवाब सुन-सुनकर परेशान हो चुके हैं।
उनका कहना है कि जब परीक्षा सिर पर है तो और इंतजार करना उनके लिए संभव नहीं है। इसी कारण उन्होंने दोबारा आंदोलन शुरू किया।
छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन केवल आश्वासन दे रहा है, लेकिन मान्यता लेने की दिशा में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा।
सस्पेंशन की कार्रवाई को छात्र अपनी आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं। बुधवार को मैनेजमेंट की ओर से गंगरार थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के साथ भी स्टूडेंट्स की झड़प हुई है।

50 से ज्यादा स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर
इस पूरे मामले में केवल 33 नहीं, बल्कि 50 से ज्यादा स्टूडेंट्स प्रभावित बताए जा रहे हैं। यदि कोर्स को RNC और INC से मंजूरी नहीं मिलती है तो इन सभी छात्रों की डिग्री की वैधता पर सवाल खड़े हो जाएंगे।
बिना मान्यता के नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी वे सरकारी या निजी हॉस्पिटल्स में पंजीकरण नहीं करा सकेंगे। इससे उनकी नौकरी और करियर की संभावनाएं खत्म हो सकती हैं।
मेवाड़ यूनिवर्सिटी पहले भी डिग्री विवादों को लेकर चर्चा में रह चुकी है। अब एक बार फिर नर्सिंग कोर्स की मान्यता को लेकर उठे सवालों ने छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
छात्र मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द मान्यता दिलाई जाए या फिर उन्हें किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में शिफ्ट किया जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
इधर, मैनेजमेंट से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, मेवाड़ एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष गोविंद गदिया से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वे मेवाड़ कॉलेज की व्यवस्था देखते हैं, मेवाड़ यूनिवर्सिटी की नहीं, इसलिए इस मामले में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
इन स्टूडेंट्स को किया सस्पेंड
बीएससी नर्सिंग के छात्र आदिल ऐजाज, आदिल फारूक लोन, आकिब बशीर लोन, आकिब मुश्ताक वार, अबरार अहमद सोफी, अबरार फारूक, अजहर सादिक़ राथर, बाबर सादिक, बिलाल अहमद डार, बुरहान उद्दीन, फैजान अकबर, फैजान नजीर मीर, इब्रिश भट, इशरत हुसैन, कमरान कयूम, काजिम जमाल, खुशबू अकबर, मरयम खातून, मोहद आसिफ, मोहम्मद मुदासिर भट, मोहम्मद साजिद, नादिया फारूक, रोहित मारू, रोहित रेगर, रोहित सिंह, साइबा कोसर, साकिब अहमद सोफी, साकिब राजा, शाहबाज फरीद, शेहरियार शाबान, सिरफराज हसन, तसवीर फातिमा और उबैद उल इस्लाम को सस्पेंड किया गया है।
इसके अलावा जीएनएम के छात्र कमलेश गहलोत, शीतल शर्मा, लीला सालवी, कन्हैया लाल, करण गर्ग और चंचल रेगर को भी सस्पेंड किया गया है।





