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280 दिन आचार संहिता लगाकर गहलोत ने रोका था प्रदेश का विकास, भजनलाल सरकार 40 दिनों में करा रही चुनाव : राठौड़

जयपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए करीब 280 दिनों तक प्रदेश को चुनावी आचार संहिता में रखने वाले गहलोत आज मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की नीति के तहत महज करीब 40 दिनों में पंचायत एवं निकाय चुनाव कराने के निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत भाजपा सरकार से ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड मांग रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में ही कांग्रेस को अपना रिपोर्ट कार्ड रखने की चुनौती दे चुके हैं।

राठौड़ ने कहा कि सफाईकर्मियों की भर्ती को लेकर भी गहलोत सवाल उठा रहे हैं, जबकि भजनलाल सरकार ने 24,752 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने सफाईकर्मियों के साथ धोखा किया और आचार संहिता लागू होने से महज तीन दिन पहले भर्ती का विज्ञापन जारी किया, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। राठौड़ ने गहलोत को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के रोड शो पर सवाल उठाने के बजाय वे अपने विधानसभा क्षेत्र में रोड शो करके दिखाएं।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की सोच को राजस्थान में उतार रही सरकार

राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की सोच देश के सामने रखी है। इसका उद्देश्य केवल चुनाव सुधार नहीं, बल्कि चुनावों में लगने वाला समय, संसाधन और भारी खर्च कम करने के साथ बार-बार लगने वाली आचार संहिता के कारण प्रशासनिक एवं विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को खत्म करना भी है।

उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी, पुलिस, प्रशासन, शिक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में लग जाते हैं। इससे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता प्रभावित होती है। प्रधानमंत्री की इसी सोच को राजस्थान में धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की घोषणा की थी।

राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के पुराने बयान पर तंज कसते हुए कहा कि डोटासरा ने कहा था कि ऐसा करना असंभव है और कोई ‘काकाजी’ इसे नहीं करा सकते। उन्होंने कहा, “अब देख लीजिए, आपके काकाजी ही चुनाव करवा रहे हैं।”

309 नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से राजस्थान में पहली बार 309 नगरीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित किए गए हैं। उनके अनुसार नगरीय निकाय चुनाव के लिए 19 अगस्त 2026 को आचार संहिता लागू हुई है, जो 17 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी नवंबर तक संपन्न होने की संभावना है। इस तरह सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया कम से कम समय में पूरी हो और विकास कार्यों पर आचार संहिता का असर न्यूनतम रहे।

उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2019 से 2021 के बीच नगरीय निकाय चुनाव पांच चरणों और पंचायती राज चुनाव आठ चरणों में हुए थे। इस तरह कुल 13 चरणों में चुनाव कराए गए और लंबे समय तक आचार संहिता लागू रही। राठौड़ ने दावा किया कि इस अवधि में करीब 280 दिनों तक आचार संहिता रहने से विकास कार्य प्रभावित हुए और इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा।

राठौड़ ने विभिन्न चुनावों का विवरण देते हुए कहा कि 25 अक्टूबर से 27 नवंबर 2019 तक 49 नगर निकायों के चुनाव में 34 दिन, 26 दिसंबर 2019 से 30 जनवरी 2020 तक पंच एवं सरपंच चुनाव में 36 दिन, वर्ष 2020 में ग्राम पंचायत चुनाव में 25 दिन, जयपुर-जोधपुर-कोटा के छह नगर निगमों के चुनाव में 22 दिन तथा जिला परिषद एवं पंचायत समिति चुनाव में 49 दिन तक आचार संहिता लागू रही। इसके अलावा जनवरी 2021 में 90 नगर निकायों के चुनाव में भी 27 दिन आचार संहिता रही।

राठौड़ ने कहा, “कांग्रेस जनता को चुनावों में उलझाती है, हम जनता को सुलझाते हैं।”

‘आचार संहिता कम, विकास ज्यादा’ हमारा संकल्प

भाजपा नेता ने कहा कि पिछली सरकार के समय लंबे समय तक चुनावी आचार संहिता का सिलसिला चलता रहा, जबकि भाजपा सरकार चाहती है कि चुनाव लोकतंत्र को मजबूत करें, लेकिन विकास की गति को बाधित न करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की सोच का मूल भाव है—“बार-बार चुनाव नहीं, बार-बार विकास।”

उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि “आचार संहिता कम से कम, विकास ज्यादा से ज्यादा” और “चुनाव में समय कम, राजस्थान के निर्माण में समय ज्यादा” हो।

शेखावाटी की हवेलियों को यूनेस्को सूची में शामिल होने पर खुशी जताई

राठौड़ ने कहा कि अलसीसर से सीकर तक की 100 साल से अधिक पुरानी 14 हवेलियों का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना शेखावाटी ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव की बात है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण के लिए पहल की।

प्रताप सिंह खाचरियावास के बयान पर भी साधा निशाना

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राठौड़ ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खाचरियावास का बयान राजस्थान की परंपरा, लोकलाज और लोक संबंधों के विपरीत है तथा यह उनकी कुंठा और कांग्रेस के राजनीतिक चरित्र को दर्शाता है।

राठौड़ ने कहा कि राजनीति में नीतियों और सरकार के कामकाज की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन किसी के व्यक्तिगत जीवन पर छींटाकशी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था है। व्यक्तिगत चरित्रहनन की राजनीति लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

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Author: newsinrajasthan

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