Home » राजस्थान » पाकिस्तान में हमें पढ़ाया हिंदू इंसान नहीं’:हैंडपंप से पानी भी नहीं पी सकते थे, CAA के जरिए नागरिकता लेने पहुंचे युवक ने बताया दर्द

पाकिस्तान में हमें पढ़ाया हिंदू इंसान नहीं’:हैंडपंप से पानी भी नहीं पी सकते थे, CAA के जरिए नागरिकता लेने पहुंचे युवक ने बताया दर्द

सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया राजस्थान में आज से शुरू हो गई है। राजस्थान से सीएए के तहत नागरिकता के लिए अप्लाई करने वाले पांच लोगों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के साथ प्रोसेस आज से शुरू हुआ। संजय सर्किल स्थित पोस्ट ऑफिस में केंद्र सरकार द्वारा तय कमेटी ने तीन भाई-बहन विनोद कुमार, राहुल कुमार, रेखा देवी का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया गया। इनके साथ दिलीप कुमार और लालचंद को नागरिकता देने की प्रोसेस भी आज से शुरू हो गई।

इस दौरान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से परिवार के साथ राजस्थान आने वाले लालचंद ने बताया- उन्होंने अप्रैल में सीएए के तहत आवेदन किया था। जिन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए आज बुलाया है। मैंने फॉरेन कोटे से जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है। अब पीजी में एडमिशन के लिए एग्जाम दिया है। जल्द ही काउंसलिंग होने वाली है। काउंसलिंग में तभी शामिल हो सकेंगे, जब उनके पास भारत की नागरिकता होगी।

उम्मीद नहीं थी इतनी जल्दी नागरिकता मिलेगी

उन्होंने कहा- पहले मुझे कोई उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी नागरिकता मिल पाएगी। सीएए मेरे लिए एक चमत्कार के जैसा है। इसके चलते अब मुझे नागरिकता मिलने की उम्मीद है। नागरिकता मिलने के बाद आसानी से मेरा पीजी में एडमिशन हो सकेगा।

हमें लगता ही नहीं था कि हम इंसान हैं

उन्होंने कहा कि जब मैं परिवार के साथ पाकिस्तान से भारत आया था। तब मेरी उम्र 15 से 16 साल थी। मैं वहां 8वीं क्लास में पढ़ता था। स्कूलों में हमें कुरान पढ़ाई जाती थी। कलमे पढ़ना हमारे लिए जरूरी था। अगर हम कलमे याद नहीं करते थे, तो हमारी पिटाई होती थी। उन कलमों में हमें पढ़ाया जाता था कि हिंदू इंसान ही नहीं हैं। हम स्कूल में लगे वाटर कूलर और हैंडपंप से पानी भी नहीं पी सकते थे। कोई और हैंडपंप चलाता था। तब हम पानी पीते थे। हमें लगता ही नहीं था कि हम इंसान हैं। भारत आकर हमें एहसास हुआ कि सभी धर्म का सम्मान किया जाता है। यहां पर पाकिस्तान जैसा कोई भेदभाव किसी भी धर्म के साथ नहीं किया जाता है।

1955 के कानून में बदलाव किया गया

2016 में नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 (CAA) पेश किया गया था। इसमें 1955 के कानून में कुछ बदलाव किया जाना था। 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा गया। कमेटी ने 7 जनवरी 2019 को रिपोर्ट सौंपी थी।

सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल (CAB) को गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में पेश किया था। 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में इसके पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े थे। 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी।

CAA के 3 फैक्ट

3 देशों के गैरकानूनी मुस्लिम इमिग्रेंट्स का क्या: CAA विदेशियों को निकालने के बारे में नहीं है। इसका गैरकानूनी शरणार्थियों को निकालने से लेना-देना नहीं है। ऐसे शरणार्थियों के लिए विदेशी अधिनियम 1946 और पासपोर्ट अधिनियम 1920 पहले से लागू हैं। दोनों कानूनों के तहत किसी भी देश या धर्म के विदेशियों का भारत में प्रवेश या निष्कासन किया जाता है।
CAA को अब तक क्यों टालती रही सरकार: भाजपा शासित असम-त्रिपुरा में CAA को लेकर आशंकाएं रही हैं। सबसे पहले विरोध भी असम में हुआ। CAA में व्यवस्था है कि जो विदेशी 24 मार्च 1971 से पहले असम आकर बस गए, उन्हें नागरिकता दी जाए। इसके बाद बांग्लादेश अलग देश बन गया था।
CAA को लेकर लोगों को क्या आशंका थी: CAA को देश में NRC यानी नेशनल सिटीजनशिप रजिस्टर बनाने की सीढ़ी के तौर पर देखा गया। लोगों को आशंका थी कि विदेशी घुसपैठिया बताकर बड़ी संख्या में लोगों को निकाल बाहर किया जाएगा। पड़ोसी देश बांग्लादेश में आशंका व्यक्त की गई कि CAA के बाद NRC लागू होने से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी उसके यहां लौट आएंगे।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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