उदयपुर के सज्जनगढ़ सेंचुरी में 4 मार्च को आग लग गई। इसके 2 दिन बाद एक एक कर अलग-अलग जगहों पर आग लगी और इसे काबू करने में पूरा महकमा लगाना पड़ा। सेंचुरी से सटे रिहायशी इलाके को खाली करवाया गया। खुद कलेक्टर, एसपी और DFO ने मौके पर आकर रेस्क्यू ऑपरेशन करवाया। ठीक 2 साल पहले इसी इलाके में लगी आग को बुझाने के लिए सेना का हेलीकॉप्टर मंगवाना पड़ा था।
सबसे बड़ा सवाल आग लगने का क्या कारण था?- जवाब में एक्सपर्ट कहते हैं कि सेंचुरी के गोरेला वाले प्वाइंट पर लगे ट्रांसफॉर्मर के में सर्किट होने से आग लगने की बात सामने आ रही है। वहीं ड्राई मौसम के कारण सूखी झाड़ियों में अमूमन आग लग जाती है। हालांकि, आग अलग-अलग जगह लगी है ऐसे में, कारण तब ही स्पष्ट हो पाएंगे जब एक बार पूरी आग पर काबू पा लिया जाए।

कलेक्टर बोले- कारणों की जांच की जाएगी इधर, आग के कारणों पर उदयपुर के जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि प्राकृतिक कारणों से कई बार सेंचुरी में आग लग जाती है। वहीं ग्रामीण इलाकों में कुछ परंपराएं हैं जिसके चलते आग लगाई जाती है। हम इस बात का प्रयास करेंगे कि लोगों को सेंचुरी में आग न लगाने के लिए जागरूक किया जाए।
सेंचुरी में आग की घटना को लेकर यहां गोरेला चौकी के पास बिजली लाइन में स्पार्किंग होने से सूखी घास ने आग पकड़ ली थी। यहां लगे एक ट्रांसफॉर्मर पर बंदर ने छलांग लगा दी थी। यह भी एक कारण है। एक बार पूरी आग बुझ जाए इसके बाद पहाड़ियों पर स्पॉट पर जाकर इसके कारणों का पता लगाया जाएगा
बायो पार्क के एनक्लोजर में थे वन्यजीव DFO सुनील सिंह ने बताया- सज्जनगढ़ सेंचुरी की तलहटी में ही बायो पार्क है। इसी तलहटी के अंदर तक आग पहुंच गई थी। जब सेंचुरी की दीवार से आग बायो पार्क की दीवार से अंदर की झाड़ियों में पहुंच गई पूरा दस्ता और दमकलों को बायो पार्क बुलाया गया। किसी भी हालत में बायो पार्क तक यह आग नहीं पहुंचनी चाहए थी। बायो पार्क के अंदर जहां आग पहुंच जाती तो वहां लोमड़ी, लेपर्ड से लेकर कई वन्यजीवों के पिंजरे और एनक्लोजर थे।
आग इस ओर बढ़ने की सूचना पर महिला कर्मचारियों को लगाया गया था। ताकि आग अगर बायो पार्क तक पहुंचे तो सूचना मिल जाए और कार्रवाई तेज कर इसे रोका जा सके। इन महिलाओं की 24 घंटे यहां ड्यूटी लगाई गई। फूड पैकेट्स भी मौके पर ही उपलब्ध करवाए गए। बायो पार्क के अंदर जहां आग पहुंची वहीं लोमड़ी, लेपर्ड से लेकर कई वन्यजीवों के पिंजरे और एनक्लोजर थे। यहां पर महिला लेबर को भी लगाया गया। सबको चिंता इस बात की थी कि किसी भी सूरत में बायो पार्क में वन्जयीवों को नुकसान नहीं पहुंचे।
5 फायर स्टेशनों का स्टाफ लगाया मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी ने बताया- उदयपुर नगर निगम ने 5 फायर स्टेशनों से गाड़ियां और पूरा स्टाफ यहां लगा दिया। गाड़ियों ने इतने फेरे किए कि उसकी गिनती नहीं है। आग बुझाने में सबसे नजदीकी हाईड्रेंट उदयपुर एसपी के निवास के बाहर लगा था। वहां से दमकल में पानी भरा गया। इसके बाद जहां आग लग रही थी, वहीं के मैरिज गार्डन से पानी भरकर लाया गया। सुंदरवास, पारस तिराहा, अशोकनगर, पानेरियों की मादड़ी, गांधी ग्राउंड फायर स्टेशन से करीब 60 जनों का स्टाफ आग बुझाने में लगाया गया।
रिसोर्ट का पानी खाली हो गया फायर आफिसर शिवराम मीणा बताते हैं कि जब आग बायो पार्क पहुंच गई तब हमने वहां गाड़ियां भेजी। वहां से करीब 7 किलोमीटर दूर से पानी भरवाने में तो समय लग जाता। ऐसे में बायो पार्क के बाहर ही जो एक रिसोर्ट था उससे पानी भराया। मीणा बताते है कि इतनी गाड़ियां हमने वहां भराई कि लास्ट में रिसोर्ट में ही पानी खत्म हो गया।
रिटायर्ड सहायक वन संरक्षक डॉ. सतीश कुमार शर्मा बताते है कि आग से पक्षी उड़ जाते और भागने वाले जीव भाग जाते हैं। रेंगने वाले जीव जरूर आग की चपेट में आ जाते हैं। डॉ. शर्मा कहते हैं कि ये आसपास दरारों और बिल में घुसते हैं तो बच जाते हैं लेकिन, कई बार इनके मरने की संभावना बनती है। इसमें सांप, छिपकलियां और जमीन पर चलने वाले कछुए शामिल हैं।
डॉ. सतीश कुमार शर्मा बताते हैं-
इस जंगल में एक विशेष एप्लुडा म्यूटिका घास है। यह घास करीब एक से डेढ़ मीटर लंबी होती है और बहुत हल्की होती है। ये तेजी से आग पकड़ती है ये जल्दी बुझ जाती है और वापस सुलग जाती है।

14 दमकलें, 200 से ज्यादा का सरकारी अमला जुटा
- 100 के करीब वनकर्मी
- 14 फायर ब्रिगेड
- 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी
- 60 फायर टीम का स्टाफ
पहले भी हेलीकॉप्टर मंगा चुके सज्जनगढ़ में अप्रैल 2022 में सज्जनगढ़ की पहाड़ियों पर लगी आग पर जिला कलेक्टर को सेना का हेलीकॉप्टर मंगवाना पड़ा। तत्कालीन कलेक्टर तारांचद मीणा ने एयरफोर्स के फलौदी स्टेशन से हैलीकॉप्टर मंगवाया और यहां पर ऑपरेशन शुरू किया गया था। यहां पर करीब 4 राउंड में 14000 लीटर पानी डालकर तब आग पर काबू पाया गया था। उदयपुर के जिला कलेक्टर नमित मेहता कहते है फायर की टीम से बात की है तो अभी तो हेलीकॉप्टर की जरूरत नहीं है ऐसे में आग बुझाने पर स्थानीय स्तर पर काम किया गया है।






