विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान डिप्टी सीएम दीया कुमारी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच सड़कों की मंजूरी में विधायकों की सिफारिश के मुद्दे को लेकर जमकर बहस हो गई। नेता प्रतिपक्ष ने विपक्षी विधायकों की सड़कों में सिफारिश नहीं चलने की बात कही तो दीया कुमारी ने पलटवार किया।
कांग्रेस विधायक प्रशांत शर्मा के सवाल के जवाब में दीया कुमारी ने कहा कि सड़कों की रिपेयर कमेटी की सिफारिश के आधार पर और जनप्रतिनिधियों की राय से चयन किया जाएगा। विधायक कोई सड़क की रिपेयर या नई सड़क का काम बताएंगे तो परीक्षण के बाद मंजूर करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तर्क दीया कि मुख्यमंत्री ने एप्रुपरिएशन बिल पर बहस के जवाब में कहा था कि विधायक जो प्रस्ताव देंगे उसके बाद सड़कें मंजूर करेंगे। आप कमेटी की जगह विधायकों की राय से सड़कें मंजूर करें।
दीया कुमारी ने कहा- मैं तीसरी बार एक ही बात रिपीट कर रही हूं। अगर कोई ऐसी सड़क है तो कमेटी को भेज दें। मुझे भी अगर भेजेंगे तो पूरा परीक्षण करवा कर ऐसी सड़क को हम रिपेयर भी करवाएंगे और नई सड़क भी बनाएंगे।
विश्वविद्यालय बिल में प्रस्तावित बदलाव आज विधानसभा में बहस के बाद विश्वविद्यालयों का विधियां संशोधन बिल पास होना है। इस बिल में प्रदेश के सभी 32 सरकारी सहायता वाली विश्वविद्यालयों के कानून में बदलाव को मंजूरी दी जाएगी। इस बिल के प्रावधानों के अनुसार अब कुलपति का नाम कुलगुरु और प्रति कुलपति का नाम प्रति कुलगुरु होगा।
बिल के प्रावधानों के अनुसार केवल हिंदी में ही कुलपति और प्रतिकुलपति के नामों में बदलाव होंगे। सरकार के इस बिल के बाद प्रदेश के सभी सरकारी सहायता से चलने वाले 32 विश्वविद्यालयों में कुलपति का नाम कुलगुरु हो जाएंगे। वहीं, तीन विधायकों के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर मंत्री जवाब देंगे।
सरकार का तर्क सरकार ने इस बिल लाने के पीछे उद्देश्य में यह तर्क दीया है कि हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति में विश्वविद्यालयों के कुलपति को कुलगुरु कहा जाता था। प्राचीन संस्कृति का हवाला देकर कुलपति के नाम में बदलाव के लिए बिल लाने का तर्क दिया गया है।






