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डोटासरा बोले- स्पीकर आखिर तक सजायाफ्ता विधायक को बचाते रहे:जूली बोले- स्पीकर ने बेवजह देरी की, आगे किरकिरी से बचने करना पड़ा फैसला

बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी खत्म होने के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने देरी पर सवाल उठाते हुए स्पीकर पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- बीजेपी विधायक कवंरलाल मीणा को तीन साल की सजा हाईकोर्ट से बरकरार रखने के आदेश के बाद उनकी सदस्यता खत्म करने की जगह बचाने के उपाय खोजे जाने लगे।

उन्होंने कहा- हमारी लड़ाई तो संविधान और विधान सभा के प्रक्रिया नियमों की गरिमा को बनाए रखने के लिए थी। विधानसभा अध्यक्ष ने निर्णय लेने में अनावश्यक देरी की। इसके कारण विधायक पद पर रहते हुए वो जेल गए और विधानसभा की गरिमा धूमिल हुई।

जूली ने कहा- कंवरलाल मीणा की सदस्यता बर्खास्तगी को लेकर कांग्रेस विधायक दल के सदस्यों ने तीन बार विधानसभा अध्यक्ष और एक बार राज्यपाल के सामने ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात को रखा। इसके बाद निर्वाचन आयोग में अपनी शिकायत दर्ज की। पूरे मामले में संवैधानिक प्रावधानों और नियमों की रक्षा की बजाय सजायाफ्ता विधायक की सदस्यता को बचाये रखने के लिए नित नए प्रयास किए जाने लगे।

आखिर में न्याय की उम्मीद में कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें बुधवार को सुनवाई की जानी थी। आगे होने वाली किरकिरी को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कंवरलाल मीणा की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लेना पड़ा।

डोटासरा बोले- स्पीकर आखिर तक सजायाफ्ता विधायक को बचाते रहे

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक्स पर लिखा- सत्यमेव जयते। कांग्रेस पार्टी के भारी दबाव और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ की अर्जी पेश करने के बाद आखिरकार भाजपा के सजायाफ्ता विधायक कंवर लाल मीणा की सदस्यता रद्द करनी पड़ी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान सर्वोपरि है। कांग्रेस पार्टी यह बात बार-बार RSS-BJP के नेताओं बताती रहेगी और उन्हें मजबूर करेगी वो संविधान के मुताबिक काम करें।

डोटासरा ने लिखा- क़ानून के मुताबिक भाजपा विधायक कवंरलाल मीणा को कोर्ट से 3 साल की सजा होते ही उनकी सदस्यता रद्द कर देनी जानी चाहिए थी। लेकिन कोर्ट के आदेश के 23 दिन बाद भी भाजपा के सजायाफ्ता विधायक की सदस्यता विधानसभा अध्यक्ष द्वारा रद्द नहीं की गई। विपक्ष के ज्ञापन सौंपने और चेताने के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष दंडित विधायक को बचाते रहे।

इस दौरान उन्होंने एक अभियुक्त को बचाने के लिए न सिर्फ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया बल्कि संवैधानिक प्रावधानों एवं कोर्ट के आदेश की अवहेलना की। लेकिन अंतत: जीत सत्य की हुई और कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द करनी पड़ी, क्योंकि देश में क़ानून और संविधान की पालना कराने के लिए कांग्रेस की सेना मौजूद है। एक देश में दो कानून नहीं हो सकते।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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