Home » राजस्थान » देवशयनी एकादशी पर नटवर वेश में होंगे गोविंददेवजी के दर्शन:नई दर्शन व्यवस्था लागू होने के बाद पहली एकादशी, दर्शन समय बढ़ाया, विरोध नहीं थमा

देवशयनी एकादशी पर नटवर वेश में होंगे गोविंददेवजी के दर्शन:नई दर्शन व्यवस्था लागू होने के बाद पहली एकादशी, दर्शन समय बढ़ाया, विरोध नहीं थमा

ठिकाना मंदिर श्री गोविंददेवजी में रविवार, 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी का पर्व श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाएगा। इस मौके पर ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक कर उन्हें नवीन लाल रंग की नटवर वेश पोशाक पहनाई जाएगी और विशेष फूलों से शृंगार किया जाएगा। इस बार नई दर्शन व्यवस्था के तहत दर्शन होंगे।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह मंगला झांकी के बाद ठाकुर श्रीजी का शालिग्राम स्वरूप में रथ पर विराजित कर दक्षिण-पश्चिम कोने पर स्थित तुलसा मंच पर ले जाया जाएगा, जहां महंत अंजन कुमार गोस्वामी पंचामृत से अभिषेक करेंगे। इसके बाद तुलसी महारानी का पूजन होगा और भोग अर्पित कर चार परिक्रमा और आरती की जाएगी। फिर ठाकुरजी को खाट पर विराजित कर निज मंदिर की परिक्रमा कराई जाएगी और अंत में गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा।

दर्शन समय में बढ़ोतरी, लेकिन विरोध भी जारी

देवशयनी एकादशी वह पहली तिथि है जब नई दर्शन व्यवस्था के तहत पर्व मनाया जाएगा। दर्शन के समय में मंदिर प्रशासन ने बढ़ोतरी की है। अब दर्शन प्रातः 4:15 से 11:30 तक और सांय 4:00 से रात्रि 8:30 बजे तक होंगे।

हालांकि नई व्यवस्था को लेकर विरोध थमा नहीं है। मंदिर आने वाले भक्तों का कहना है कि समय बढ़ाने के बावजूद दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में जटिल हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह ने भी दर्शन व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से इसे पूर्ववत करने की मांग की है। कई स्थानीय संगठनों ने भी विरोध में स्वर बुलंद किए हैं।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि दर्शन को सुव्यवस्थित और भीड़ नियंत्रण के उद्देश्य से नई प्रणाली लागू की गई है, लेकिन श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया के आधार पर भविष्य में इसमें संशोधन भी किया जा सकता है।

मंदिर में एंट्री और एग्जिट अब अलग-अलग

दर्शन व्यवस्था में आंशिक बदलाव करते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए गए हैं। नंगे पांव आने वाले श्रद्धालु मंदिर छावन से प्रवेश कर परिक्रमा करते हुए मुख्य निकास से बाहर निकलेंगे। वहीं, चप्पल-जूते पहने श्रद्धालु रैंप मार्ग से दर्शन करेंगे और उसी रास्ते से लौट जाएंगे।

बैठने और फोटोग्राफी पर पाबंदी

नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में बैठने, रुकने, फोटोग्राफी और वीडियो बनाने पर पाबंदी रहेगी। भीड़ नियंत्रण के लिए 50-60 स्वयंसेवक, 20 सिक्योरिटी गार्ड और करीब 25 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।

झांकी समय इस तरह रहेगा –

मंगला झांकी: सुबह 04:15 से 06:30 तक

धूप झांकी: सुबह 07:15 से 09:00 तक

श्रृंगार झांकी: सुबह 09:30 से 10:15 तक

राजभोग झांकी: सुबह 10:45 से 11:30 तक

ग्वाल झांकी: शाम 04:00 से 04:15 तक

संध्या झांकी: शाम 05:45 से 06:45 तक

शयन झांकी: रात 08:00 से 08:30 तक

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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