Home » राजस्थान » छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर NSUI का अनूठा प्रदर्शन:कैंपस में सरकार की बारात निकाली, कैबिनेट मंत्रियों के मुखौटे लगा कर डांस किया

छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर NSUI का अनूठा प्रदर्शन:कैंपस में सरकार की बारात निकाली, कैबिनेट मंत्रियों के मुखौटे लगा कर डांस किया

राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव पर रोक के खिलाफ छात्रों ने अनोखे अंदाज में विरोध जताया। NSUI छात्र नेता अभिषेक चौधरी ने लोकतंत्र की विदाई बारात निकालकर छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग की।

इसमें सरकार की बारात में मुख्यमंत्री का फेस मास्क पहने एक युवक घोड़ी पर बैठा नजर आया। जबकि कई कैबिनेट मंत्री के मुखौटे लगाए युवक डांस करते नजर आए।

एनएसयूआई के छात्र नेता अभिषेक चौधरी ने कहा कि यह लोकतंत्र की विदाई बारात कोई साधारण विरोध नहीं है। यह उस गुस्से, निराशा और उपेक्षा का जीवंत रूप है, जो राजस्थान विश्वविद्यालय और प्रदेशभर के छात्रों के भीतर अब उबाल बन चुका है। छात्रसंघ चुनाव किसी भी विश्वविद्यालय की आत्मा होते हैं। वे केवल पद और राजनीति की दौड़ नहीं होते है। बल्कि, एक ऐसा मंच होते हैं। जहां छात्र नेतृत्व, जिम्मेदारी और भागीदारी के मायने समझते हैं। लेकिन पिछले कई सालों से जिस तरह से राजस्थान की सरकार ने बार-बार छात्रसंघ चुनाव को टालने या रद्द करने का प्रयास किया है। यह लोकतंत्र के गाल पर एक करारा तमाचा है।

प्रदर्शनकारियों ने बारात को लोकतंत्र की विदाई का नाम दिया।

बोले- छात्रों के सब्र का बांध टूटा

एनएसयूआई के छात्र नेता अभिषेक चौधरी ने कहा कि आज का आयोजन यह दर्शाता है कि अब छात्रों का सब्र टूट चुका है। यह प्रदर्शन सिर्फ मजाक नहीं है। यह बताता है कि जिनके हाथों में संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी है। वही उसकी चिता सजाने में लगे हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार की बारात का यह दृश्य यह दिखाता है कि पूरा सत्ताधारी तंत्र इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मिटाने में शामिल है। यह बारात असल में उस राजनीति की शव यात्रा है। जो युवाओं को सत्ता से जोड़ती थी, सवाल पूछना सिखाती थी और नेतृत्व करना सिखाती थी।

देखें तस्वीरें….

प्रदर्शन में कैबिनेट मंत्री के मुखौटे लगा कर युवा डांस करते नजर आए।

चुनने और चुने जाने का हक छीना जा रहा

चौधरी ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय जैसे ऐतिहासिक संस्थान में अगर छात्रों को बोलने, चुनने और चुने जाने का हक छीना जा रहा है। तो ये केवल शिक्षा की आत्मा का अपमान नहीं है। बल्कि, एक संपूर्ण पीढ़ी को राजनीतिक रूप से अपंग बनाने की साजिश है।

उन्होंने कहा कि सरकार अगर ये सोचती है कि चुनाव नहीं होने पर छात्र चुप रहेंगे। तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। आज यह विरोध एक प्रतीकात्मक बारात है। कल यही गुस्सा सड़कों पर लावा बनकर फूट सकता है। लोकतंत्र की विदाई सिर्फ एक विरोध नहीं, यह एक गंभीर चेतावनी है। अगर अब भी छात्रों की आवाज़ को कुचला गया। तो इतिहास यह सत्ता नहीं, यह साजिश याद रखेगा।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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