संस्थागत प्रसव (हॉस्पिटलों में डिलीवरी करवाने) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू हुई जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) की लाभार्थी प्रसुताओं को राशि के लिए हॉस्पिटलों में भटकना पड़ रहा है। हाल ही में प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ के सामने ये मामला आया। उन्होंने इस योजना के नोडल अधिकारी और अन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इसकी पेंडेंसी कम करने और मामलों का समय पर निस्तारण करने के निर्देश दिए।
सरकार जेएसवाई योजना के तहत शहरी क्षेत्र में प्रसव पर प्रसूता को एक हजार रुपए और ग्रामीण इलाके में 1400 रुपए देती है। ये पैसा जिस दिन प्रसूता हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होती है, उसी दिन या उसके एक या दो दिन में प्रसूता के बैंक खाते में जमा होते हैं। स्थिति ये है कि 2 से 3 माह का समय हो गया, लेकिन कई प्रसूताओं को ये राशि नहीं मिली।
जयपुर के महिला चिकित्सालय में सबसे ज्यादा परेशानी
जयपुर के सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय में इस मामले में सबसे ज्यादा लापरवाही देखने को मिल रही है। यहां प्रसूता की हॉस्पिटल से छुट्टी होने के बाद भी डेटा को सरकार के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा रहा। इसके कारण यहां डिलीवरी करवाने वाली महिलाओं को इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि नहीं मिल रही।
प्रदेश में 1.90 लाख डिलीवरी, 1.60 लाख का ही डेटा अपलोड
प्रदेश स्तर पर स्थिति देखे तो तमाम मेडिकल कॉलेजों से अटैच हॉस्पिटल, जिला हॉस्पिटल, उपजिला हॉस्पिटल, सैटेलाइट हॉस्पिटल, सीएचसी और पीएचसी में एक अप्रैल से अब तक कुल 1.90 लाख डिलीवरी हुई है, जिनमें से 1.60 महिलाओं का ही डेटा पोर्टल पर अपलोड हुआ है। इनमें से 1.44 लाख प्रसूताओं को ही प्रोत्साहन राशि मिल सकी है।






