जयपुर में लेबर इंस्पेक्टर पर फायरिंग करने वाले आरएसी जवान ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। उसने पुलिस को बताया कि उसे सगाई के बाद वो अपनी मंगेतर के साथ खुश था। रोज बात होती थी।
इस बीच उसे शक हुआ कि शंकर लाल के साथ युवती के अवैध संबंध हैं। इसलिए उसने सगाई तोड़ी थी, लेकिन युवती फिर भी लेबर इंस्पेक्टर के कहने पर उसे परेशान कर रही थी।
वहीं, मंगलवार (5 अगस्त) सुबह हुई हत्या के बाद मृतक के भाई ने आरोपी जवान व उसके भाइयों के खिलाफ हत्या व साजिश का केस दर्ज कराया है।
सगाई के 6 महीने बाद हुआ शक
आरोपी अजय ने पुलिस को बताया कि उसकी सगाई मार्च 2024 में हुई। उसकी सगाई लेबर इंस्पेक्टर के ससुर ने कराई थी। इसके बाद करीब 6 महीने तक सब अच्छा रहा। दोनों की वीडियो कॉल पर भी बात होती थी।
इस बीच उसे मंगेतर और शंकर लाल के बीच अवैध संबंध का शक होने लगा था। इस कारण उसने सातवें महीने में सगाई तोड़ दी, लेकिन युवती उसे परेशान करती रही। इसलिए उसने परेशान होकर शंकर लाल की हत्या की प्लानिंग की।
50 में से 23 राउंड फायर किए
मंगलवार सुबह लेबर इंस्पेक्टर की हत्या करने के लिए आरोपी 50 बुलेट लेकर पहुंचा था। फुलेरा थाना सीआई चंद्र प्रकाश ने आरोपी के पास एक बैग मिला है, जिसमें 27 राउंड मिले हैं।
बाकी उसने मैगजीन में भर दिए थे। क्राइम सीन पर पहुंचने पर उसने कई राउंड फायर किए, जिसमें कुछ हवा में चलाए बाकी लेबर इंस्पेक्टर शंकर लाल पर चले। उसे खुद भी ध्यान नहीं है कि कितने राउंड फायर एसएलआर से किए थे।
सीआरपीएफ कमांडेंट के खिलाफ भी केस दर्ज
डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद मीणा ने बताया- शंकर लाल के भाई बाबू लाल बलाई ने बगरू थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इसमें मुख्य आरोपी आरएसी जवान अजय कटारिया, उसके सगे भाई विजय कटारिया का नाम है।
वहीं, अजय के रिश्तदेार CRPF कमांडेंट शिवनारायण बलाई, उसके भाई पूरणदास पुत्र मनोहरदास बलाई पर हत्या करने और साजिश रचने का मामला दर्ज हुआ है। आरोपी को बुधवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।

पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा
हत्या के बाद परिवार मंगलवार को परिवार बगरू सीएचसी की मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठा था। परिजनों का कहना था कि मुख्य आरोपी अजय सहित चार जनों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर अरेस्ट किया जाए।
मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी मिले। इसके साथ ही मामले की जांच SIT की ओर से जाए। पुलिस आलाधिकारियों की समझाइश के बाद नामजद FIR दर्ज कर SIT का गठन कर जांच करवाने की बात पर सहमति बनी। इसके बाद पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया।






