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राजसमंद में 18 दिन से मार्बल उद्योग ठप:80 रुपए रायल्टी बढ़ाने पर खदानें बंद, कल कलेक्ट्रेट का करेंगे घेराव

राजसमंद में मार्बल पर राज्य सरकार द्वारा रायल्टी बढ़ाए जाने के बाद अब मार्बल उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे है। पिछले महीने 23 जुलाई को सरकार ने रायल्टी बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके बाद मार्बल व्यापारियों में मायूसी छा गई।

पहले से संकट के दौर से गुजर रहा मार्बल व्यवसाय अब गर्त की ओर जाने लगा। सरकार द्वारा रायल्टी की दरे 320 रुपए प्रतिटन से 80 रुपए बढ़ाकर अब 400 रुपए कर दी है। जिसके बाद खदान मालिकों ने 1 अगस्त से खदानों से डिस्पैच पूरी तरह से बंद कर दिया है। सोमवार को 18वां दिन जब राजसमंद से किसी भी प्रकार का मार्बल ब्लॉक लोडिंग नहीं हुआ।

कलेक्ट्रेट के घेराव का लिया निर्णय इस कड़ी में सोमवार को स्टोन इंडस्ट्री से जुड़े सभी एसोसिएशन ने एकजुटता दिखाते हुए 19 अगस्त मंगलवार को कलेक्ट्रेट के घेराव का निर्णय लिया। सभी संगठन एक साथ मांग करेंगे कि रायल्टी की दरे पूर्व की भांति की जाए, नहीं तो बाद में आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा जिसके तहत सबसे पहले सभी उद्योग अपने बिजली के कनेक्शन को डिसकनेक्ट करवाएंगी।

खदान मालिकों के समर्थन में मंगलवार को मार्बल माइनिंग एसोसिएशन, मार्बल गैंगसा एसोसिएशन, कट्टर एसोसिएशन और ट्रक एसोसिएशन साथ रहेगी ओर कलेक्ट्री का घेराव कर प्रदर्शन करेंगी।

मार्बल उद्योग को गर्त में धकेला इस अवसर पर मार्बल माइंस एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव सिंह राठौड़ ने कहा कि पहले मार्बल ब्लॉक पर 320 रुपए प्रति टन रॉयल्टी थी, जिसे बढ़ाकर 400 रुपए कर दिया गया है। तीन वर्षों से मंदी झेल रहे व्यवसाय पर यह 80 रूपए की अतिरिक्त मार पड़ने से कारोबार ठप हो गया है। ऊपर से 18 प्रतिशत जीएसटी ने मार्बल उद्योग को और गर्त में धकेल दिया है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी राजसमंद के मार्बल को बचाने के लिए व्यापारी वर्ग ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मार्बल की वजह से कई उद्योग प्रभावित हुए है, अप्रत्यक्ष रूप से 1 लाख लोग इससे प्रभावित हुए है करीब 20 हजार श्रमिकों पर रोजगार का संकट छाया हुआ है, कई श्रमिक यहां से पलायन कर चुके है। वही एसोसिएशन के संरक्षक तनसुख बोहरा ने बताया कि सरकार को इस संदर्भ में पुन विचार करना चाहिए और बढ़ी हुई रॉयल्टी की दरों का वापस लेना चाहिए।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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