वोट चोरी का मतलब वोट चोरी एक तरह से नहीं होती है, अगर मान लीजिए आप जो है वोटर लिस्ट में बेइमानी करते हो वो भी चोरी है। अगर आप फाउल खेल के, प्रॉसेस नहीं करके आप एकतरफा सपोर्ट करते हो वो भी वोट चोरी है, अगर आप चुनाव करवा रहे हो और काउंटिंग में बेइमानी करो वो भी वोट चोरी है तो हमें जो है इस प्रकार से सोचना पड़ेगा वोट चोरी का मतलब क्या है,किसी भी रूप में निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए, निष्पक्ष चुनाव, जिसके अंदर चुनाव आयोग नहीं देखे आगे पार्टी कौन है किसको फायदा मिल रहा है किसको नुकसान हो रहा है वो नहीं देखे, ईमानदारी के साथ में वो अपना काम करे, निष्पक्ष हो के चुनाव करवाए, वोटर लिस्ट भी ट्रांसपेरेंट हो, प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट हो, पोलिंग ट्रांसपेरेंट हो, बेइमानी वहां पर नहीं हो, ईवीएम में छेड़छाड़ नहीं हो ये तमाम बातें आती हैं वोट चोरी के अंदर मतलब राहुल गांधी का मतलब ये है कि भई आप इसमें बेइमानी कैसे करने लग गए, हरियाणा के अंदर क्या हुआ आप सब को मालूम है और महाराष्ट्र ने तो इनकी खुद की पोल खोल दी पूरे देश ने देखा ये क्या हो गया क्योंकि हार जीत का देखो अंतर का फर्क पड़ता है , हार भी होती है जीत भी होती है, हरियाणा के अंदर हुआ प्वाइंटों में रह गया फर्क ,लोगों ने सहन कर लिया भई चलो माइक्रो मैनेजमेंट किया होगा कुछ किया होगा, कुछ गलती हम से हो गई होगी, सहन कर लिया,पर जिस प्रकार से महाराष्ट्र में हुआ, महाराष्ट्र में कांग्रेस शिवसेना एनसीपी जो बिग प्लेयर हैं वहां पर, मजबूत पार्टियां हैं, तीन महीने पहले शानदार विजय हासिल करी है पार्लियामेंट के अंदर और तीन महीने बाद में आप गायब ही हो जाओ वहां से, हमारी तीनों पार्टियां गायब टाइप हो गईं वहां पर, तब लोगों ने पूरे मुल्क ने कहा मामला बहुत बड़ा दिखता है, बहुत बड़ी बेइमानी हो रही है, बहुत बड़ी मिलीभगत चल रही दिखती है , कोई जवाब नहीं है, अगर राहुल गांधी जी कहते कि आप हमें आज तो डिजिटल का युग है मोबाइल इंटरनेट का युग है, आप हमें लिस्ट दे दीजिए अपना डेटा बेस , हम पता कर लेंगे कहां कहां डबल वोट है कहां बेइमानी हो रही है कहां नहीं हो रही है, आप देने को तैयार नहीं हो, पोथे ले ले कर राहुल गांधी बताते हैं मीटिंगों के अंदर लाखों पैरे होते हैं, लाखों पैरों में ढूंढना बड़ा मुश्किल काम होता है वो भी वोट चोरी है, तो मेरा मतलब न है इसलिए अवेयरनेस के लिए ये प्रोग्राम चलाया गया है , आँखें खुलें देश के अंदर, डेमोक्रेसी को बचाना है तो खाली राहुल गांधी ने खुद ने कहा खाली मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता, पब्लिक को आगे आना पड़ेगा, कार्यकर्ताओं का कोई पार्टी का हो उनको आगे आना पड़ेगा तब जा के लोकतंत्र बचेगा, वरना ये जो व्यवहार कर रहा है चुनाव आयोग आपका वो बहुत खतरनाक व्यवहार कर रहा है, उनकी भाषा अच्छी नहीं है, व्यवहार अच्छा नहीं है, नेता प्रतिपक्ष किसे कहते हैं, प्रधानमंत्री अगर,प्रधानमंत्री पद है अलग गरिमा का पद है तो नेता प्रतिपक्ष पद भी कोई कम गरिमा का पद नहीं होता है आप उसके लिए व्यवहार देख लीजिए , देश देख रहा है, ये सब पोल खुल रही है इनकी, एसआईआर कर रहे हैं तो शक लोगो को हो रहा है, क्यों हुआ शक, आप ऑल पार्टी मीटिंग बुलाते, बात सबसे करते बताओ भई हम चाहते हैं एसआईआर करा के ट्रांसपेरेंसी हो जाए लिस्टों के अंदर, उसके अंदर आपकी सलाह क्या है, हर पार्टी अपनी सलाह देती, सबके सुझावों का समावेश करते,एसआईआर शुरू करवाते, सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है, सबजुडिस है, आपने एसआईआर शुरू कर दी 12 राज्यों के अंदर, तमाम तरह की बातें शक पैदा करती हैं, जहां शक शुभा होता है वहां पर विश्वास उठता है चुनाव आयोग पर और चुनाव आयोग पर विश्वास उठना मैं समझता हूं बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि पूरे चुनाव में डेमोक्रेसी तो टिकी होती है चुनाव आयोग पर टिकी होती है , ये बात है।
एसआईआर के बाद पहला चुनाव बिहार में होने तथा मतदान बढ़ने पर प्रश्न का जवाब :
तीन दशक में पहली बार इतना हुआ है, तीस साल हो गए कम से कम, तो ये भी शक पैदा करता है , तो इसलिए मैं समझता हूं कि हमारी जो मीटिंग हो रही है ये अपने आप में हमारे कार्यकर्ताओं को ग्रूम करने के लिए है, अवेयर करने के लिए है, आगाह करने के लिए है, हम चाहेंगे कार्यकर्ता भी पब्लिक भी, बेइमानी नहीं हो हमारे बीएलए बनें वो ट्रेंड बनें उनकी अच्छी ट्रेनिंग करवाएंगे, जिससे कि वो अपनी जिम्मेदारी समझें और बीएलओ बीएलए की दोनों की भूमिका इंपॉर्टेंट होती है वो मिलकर ऐसी लिस्टें बनवाएं जिससे कि तमाम तरह से निष्पक्ष हो के चुनाव हो सकें।
बिहार के एक्जिट पोल को लेकर सवाल का जवाब :
दस- दस हजार रुपए बांटे हुए हैं वहां पर महिलाओं को, एक करोड़ पैंतीस लाख महिलाओं को दस दस हजार रुपए आप देखिए इतिहास में कभी नहीं हुआ, हम ने जब मोबाइल फोन बांटने शुरू किए आचार संहिता लागू हुई कोड ऑफ कंडक्ट,उसी दिन बंद हो गया, 34 लाख महिला को दिए कम से कम सवा करोड़ महिलाओं को देने थे हमें , वाजपेई जी के बोर्ड लगे हुए थे नेशनल हाईवेज पे जैसे ही चुनाव शुरू हुए चुनाव आयोग ने कहा आप हटा दीजिए बोर्ड ,बोर्ड हटे गवर्मेंट से, वाजपई जी के,पहली बार है दस दस हजार रुपए बांट रहे हैं अभी तक बांट रहे हैं। आज मैंने सुबह बात करी एक ऑफिसर से जो वहां लगे हैं , डिप्युट किए हुए हैं, कल तक बंट रही थी शराब, पैसा, तो चुनाव में पैसे बंट रहे हैं दस दस हजार रुपए प्रति महिलाओं को, इसको क्या कहेंगे, ब्राइब नहीं है क्या ये ? चुनाव जीतने के लिए आप पैसा बांटते हो कैश , कैश पैसा बांटते नहीं बांटते कई जगह, उसकी जगह ऑफिशली उनके बैंक खातों में डाल रहे हो, यही तो है, चुनाव आयोग क्या कर रहा है फिर ? बोल नहीं रहा कोई ,तो ये तमाम बातें देश में हो रही हैं, ध्रुवीकरण हो रहा है देश के अंदर ,देश किस दिशा में जा रहा है कोई नहीं जानता,किस दिशा में जाएगा किसी को पता नहीं है धर्म ने नाम पर डिवाइड कर दिया देश को, क्या होगा देश का फ्यूचर, इस दिशा में इसकी चिंता सबको करनी चाहिए।
राहुल गांधी जी द्वारा वोट चोरी का मुद्दा उठाने से संबंधित सवाल का जवाब :
गांव गांव में पहुंच चुका है वोट चोरी वोट चोरी अब वोट चोरी की डेफिनेशन मैने आपको दे दी है वो और विस्तार हो सकता है उसका।





