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सहयोग, नवाचार एवं महिला सशक्तिकरण पर राजीविका के राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन रहा सार्थक

राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका), ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एग्रीकल्चर एंड लाइवस्टॉक एंटरप्रेन्योरशिप पर तीन दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस के दूसरे दिन आज विविध सत्रों के माध्यम से सहयोग, नवाचार एवं महिला सशक्तिकरण पर गहन मंथन किया गया।

कार्यक्रम में सचिव, ग्रामीण विकास विभाग,भारत सरकार शैलेश कुमार सिंह भी ऑनलाइन वीसी के माध्यम से जुड़कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान अपनी मज़बूत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आधारशिला और उद्यमशीलता की भावना के साथ एनआरएलएम 2.0 के लिए एक प्रकाशस्तंभ राज्य बन सकता है।
उन्होंने शी–लाइफ़ (She-LiFE) के माध्यम से महिलाओं को कृषि–पशुधन उद्यमियों (Agri-LivPreneurs) के रूप में सशक्त बनाकर ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने पर बल दिया।
सम्मेलन ने जलवायु-स्मार्ट, कम-कार्बन मूल्य श्रृंखलाओं और क्रेडिट से आगे समावेशी वित्तीय ढाँचों के एकीकरण का आह्वान किया।कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों, नीति–निर्माताओं, उद्यमियों, बैंकिंग प्रतिनिधियों एवं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिला सदस्यों ने भाग लिया।
दिनभर चले विभिन्न सत्रों में ग्रामीण आजीविका को मज़बूती देने, महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने तथा कृषि एवं पशुधन आधारित उद्यमिता के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रमुख सत्रों में –

“सहयोग के लिए कार्यवाही: आजीविका इकोसिस्टम को सशक्त बनाना”

इस सत्र में विशेषज्ञों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सामूहिक मॉडल के माध्यम से सशक्त करने पर बल दिया। महिलाओं के समूह–आधारित व्यवसायों को संस्थागत समर्थन देने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।“क्रेडिट से आगे – अभिनव वित्तीय आर्किटेक्चर”–

इस सत्र में ग्रामीण उद्यमियों के लिए वित्तीय पहुंच बढ़ाने के नए तरीकों, वैकल्पिक फंडिंग मॉडल्स तथा डिजिटल फाइनेंस प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर विचार–विमर्श हुआ। बैंकों एवं माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं द्वारा ग्रामीण महिला उद्यमियों को सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराने के उपाय सुझाए गए“शी–लाइफ: महिला नेतृत्व वाले कृषि एवं पशुधन उद्यमिता”–

इस सत्र में सफल महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा बताया कि कैसे प्रशिक्षण, सहयोग एवं नवाचार के माध्यम से महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया आयाम जोड़ रही हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाने के लिए सामूहिकता, प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और तकनीकी सहयोग आवश्यक है।

राजीविका की ओर से बताया गया कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य है — ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करना, नवाचार को बढ़ावा देना एवं राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी तंत्र तैयार करना।

सम्मेलन के दौरान प्रदर्शनी में महिला उद्यमियों द्वारा बनाए गए कृषि एवं पशुधन उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे सभी प्रतिभागियों ने सराहा।
कार्यक्रम में रमन वाधवा, उप निदेशक, national rural livelihood mission (NRLM) ने क्षमता, प्रौद्योगिकी, बाज़ार और साझेदारी के माध्यम से सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण पर ज़ोर दिया ताकि भारत का ग्रामीण अर्थतंत्र अधिक लचीला और समृद्ध बन सके।

सम्मेलन का समापन कल होगा, जिसमें नीति सुझावों का संकलन कर ग्रामीण महिला उद्यमिता के सशक्त रोडमैप पर चर्चा की जाएगी।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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