बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार पर पूर्व सीएम और सीनियर ऑब्जर्वर अशोक गहलोत ने कहा- यह चुनाव धनबल और सत्ता के दुरुपयोग से लोकतंत्र की लूट है। चुनाव में हार-जीत चलती रहती है, लेकिन इस चुनाव को भाजपा, जेडीयू और चुनाव आयोग ने मिलकर हाईजैक कर लिया। इससे INDIA गठबंधन को हार का मुंह देखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
गहलोत जयपुर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा-
बिहार में आचार संहिता लगने के बाद एक करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपए डाले गए। यह एक तरीके से ‘कैश फॉर वोट’ यानी वोट खरीदी हुई और चुनाव आयोग मौन होकर देखता रहा। यह चुनाव में पैसे बांटकर वोट खरीदने के समान है, जो गैरकानूनी है। यह वोट चोरी का ही एक नया संस्करण है।

बिहार में चुनाव के दौरान भी महिलाओं को 10-10 हजार रुपए बांटे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- राजस्थान में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को स्मार्टफोन देने वाली योजना पर रोक लगा दी गई थी। जबकि ये योजना फरवरी 2022 में आए राज्य बजट की घोषणा के अनुसार चलाई जा रही थी। करीब 30 प्रतिशत पात्र महिलाओं को स्मार्टफोन दिए जा चुके थे।
साथ ही पहले से चल रहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन, अन्नपूर्णा योजना तक को भी रोक दिया गया। इसके ठीक विपरीत बिहार में महिलाओं के खाते में चुनाव के दौरान भी 10 हजार रुपए नई योजना के तहत डाले गए, जो आचार संहिता से महज कुछ दिन पहले शुरू की गई थी। पहले महाराष्ट्र में भी चुनाव से पहले महिलाओं को 7500-7500 रुपए बांटे गए थे।
चुनाव आयोग भी एनडीए की जीत में सहभागी बना SIR के माध्यम से चुनाव से पहले बिहार में काटे गए वोटों को लेकर गहलोत ने कहा- बिहार चुनाव से ठीक पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिए बिना, SIR के माध्यम से लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। वर्तमान में SIR से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। फिर भी 12 राज्यों में SIR लागू किया जा रहा है।
ऐसे कदमों के माध्यम से निर्वाचन आयोग भी NDA की जीत में एक सहभागी बन गया है। महाराष्ट्र के बाद बिहार में ऐसा इकतरफा चुनाव परिणाम देशवासियों के लिए चिंता का विषय है। अब समय आ गया है कि देशवासियों को लोकतंत्र बचाने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।





