राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जरूरतमंदों को मिलने वाले गेहूं में जोधपुर जिले में बड़े स्तर पर हेराफेरी और दुरुपयोग का मामला सामने आया है। सितंबर 2024 से 21 मार्च 2025 तक उचित मूल्य दुकानों को कुल 7 हजार 909 क्विंटल (7 लाख 90 हजार 900 किलो) गेहूं समय पर नहीं पहुंचा कर दुरुपयोग किया गया। इस हिसाब से ये 2 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपए का घोटाला किया गया। वसूली के समय 27 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गेहूं की रेट लगाई जाती है।
मामले में मैनेजर, परिवहनकर्ता ठेकेदार और अन्य लोग प्रथमदृष्ट्या गंभीर अनियमितताओं के दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ जिला रसद अधिकारी (प्रथम) राजकरण बारहठ ने बासनी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
विभागीय, संयुक्त जांच दल तथा जिला कलेक्टर की ओर से गठित समिति की रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि एफसीआई से लिए गए गेहूं को निर्धारित समयावधि में उचित मूल्य दुकानों (FPS) तक नहीं पहुंचाया गया और बड़ी मात्रा में गेहूं का दुरुपयोग किया गया।

एफसीआई से उठाव, लेकिन जनता तक नहीं पहुंचा गेहूं
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2024 में एफसीआई से आवंटित गेहूं का उठाव तो समय पर कर लिया गया, लेकिन सप्लाई को 15 से 35 दिन तक जानबूझकर रोके रखा गया। इस अवधि में बड़े पैमाने पर गेहूं के अन्यत्र खपाए जाने की संभावना है।
मामले को लेकर तत्कालीन प्रवर्तन अधिकारी व निरीक्षक द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर जिला रसद अधिकारी प्रथम ने विस्तृत विभागीय जांच दल का गठन किया। इसके बावजूद प्रबंधक द्वारा परिवहन ठेकेदार पर आवश्यक वस्तु अधिनियम में कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पूरा मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा और अतिरिक्त खाद्य आयुक्त जयपुर को रिपोर्ट भेजी गई।
रिलीज ऑर्डर (आरओ) शर्तों का खुला उल्लंघन
थाने में दी रिपोर्ट के अनुसार जयपुर मुख्यालय की विशेष सतर्कता टीम ने विस्तृत रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि करते हुए ये जानकारी दी-
- प्रबंधक ने जिला रसद अधिकारी प्रथम द्वारा जारी रिलीज ऑर्डर (RO) को दरकिनार कर मनमर्जी से दूसरा क्षेत्र चुनकर वहां गेहूं भेजा।
- जनवरी–फरवरी 2025 के उठाव की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा के फर्जी चालान जारी किए गए।
- सितंबर 2024 में उचित मूल्य की (FPS) 88 दुकानों को कुल 6166.26 क्विंटल गेहूं समय पर नहीं पहुंचा कर स्पष्ट दुरुपयोग किया गया।
- 21 मार्च 2025 को किए गए लिखित समझौता पत्र से पुष्टि होती है कि जोधपुर शहर की दुकानों को 1743 क्विंटल गेहूं और भी नहीं भेजा गया था।
सतर्कता दल ने इन सभी को योजनाबद्ध तरीके से की गई हेराफेरी बताया है।
कलेक्टर समिति ने मानी गड़बड़ी
जिला कलेक्टर द्वारा गठित जांच कमेटी ने भी प्रकरण में गेहूं सप्लाई प्रणाली में हेरफेर की पुष्टि की है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि—
- एफसीआई से उठाव के बाद गेहूं की आवाजाही को बिना कारण देरी से किया गया।
- परिवहनकर्ता ठेकेदार और प्रबंधक के बीच मिलीभगत से सप्लाई रोकी गई।
- कई दुकानों को महत्त्वपूर्ण मात्रा में खाद्यान्न महीनेभर तक नहीं पहुंचा।
इन्हें माना प्रथमदृष्ट्या दोषी
विभिन्न स्तरों की जांचों में राजस्थान राज्य खाद्य निगम लिमिटेड (रा.रा.खा.आ.नि.लि) जोधपुर के प्रबंधक राजेश पंवार, परिवहन ठेकेदार मंगलाराम विश्नोई, ठेकेदार से जुड़ा व्यक्ति नरेश दातवानी उर्फ कालू, जेसीओ खेताराम प्रथमदृष्ट्या दोषी पाए गए हैं। विभागीय जांच दल ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन व्यक्तियों द्वारा की गई अनियमितताएं खाद्यान्न वितरण प्रणाली के साथ गंभीर धोखाधड़ी एवं योजनाबद्ध दुरुपयोग का संकेत देती हैं।
विशेष सतर्कता जांच दल ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, आपराधिक कृत्य के लिए एफआईआर दर्ज करने तथा विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की।





