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पेपरलीक मास्टरमाइंड जगदीश विश्नोई सहित चार की जमानत खारिज:हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती पेपरलीक में जमानत खारिज की, विश्नोई पर नकल-पेपरलीक के 11 मामले दर्ज हैं

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 पेपरलीक मामले में मास्टरमाइंड जगदीश विश्नोई सहित चार आरोपियों की जमानत खारिज कर दी हैं। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली ने आज फैसला सुनाते हुए मुख्य सरगना जगदीश विश्नोई, राजीव विश्नोई, कार्तिकेय शर्मा और रिंकू यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी।

मामले में राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनुराग शर्मा और एडवोकेट अक्षत शर्मा ने बहस करते हुए कहा कि जगदीश विश्नोई मामले में मुख्य आरोपी हैं। इसने गैंग तैयार करके पेपरलीक किया और भर्ती की पवित्रता को भंग किया।

राजीव बिश्नोई अभ्यर्थी के साथ-साथ, गैंग हैंडलर भी है, उसने पेपर को सर्कुलेट भी किया है। कार्तिकेय शर्मा ने पेपर खरीदकर रिंकू यादव को बेचा। ऐसे में आरोपियों ने एक गैंग की तरह काम करते हुए भर्ती के प्रश्न पत्र को लीक किया है। अभियोजन पक्ष के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। ऐसे में इन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जाए।

वहीं, जमानत याचिकाओं में आरोपियों की ओर से कहा गया कि उन्हें प्रकरण में फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष के पास उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। प्रकरण की ट्रायल पूरी होने में लंबा समय लगने की संभावना है और वे लंबे समय से जेल में बंद हैं, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

आठ महीने पहले जेईएन भर्ती में मिली थी जमानत मुख्य आरोपी जगदीश विश्नोई को आठ महीने पहले जेईएन भर्ती-2020 पेपरलीक मामले में जमानत मिली थी। लेकिन एसआई भर्ती मामले में बंद होने से वह जेल से बाहर नहीं आ सका। लेकिन आज कोर्ट ने उसकी एसआई भर्ती मामले में जमानत खारिज कर दी।

जिसके बाद अब उसे जेल में ही रहना पड़ेगा।

सांचौर जिले के दांता निवासी जगदीश विश्नोई को गिरोह के लोग मास्टरमाइंड गुरुजी या गुरुजी नाम से पुकारते थे। सबसे पहले उसने साल 2005 में बीएड की फर्जी डिग्री खरीदी थी। फिर साल 2007 पेपर लीक करके ग्रेड थर्ड का टीचर बन गया था। टीचर बनने के बाद जगदीश का सबसे पहले कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2007 में नकल करवाने में नाम सामने आया था।

टीचर रहते जगदीश पर दो मामले दर्ज हुए जगदीश पर नकल कराने और पेपर लीक के 11 मामले दर्ज हैं। पहला मुकदमा 2008 में टोंक में दर्ज हुआ। दूसरा मुकदमा 2010 में करधनी थाने में दर्ज किया गया था। इस दौरान वह थर्ड ग्रेड टीचर था। बाद में उसे निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में जेल काटने के बाद वह 4 साल तक फरार रहा।

फरारी के दौरान भी जगदीश पर 2011 से 2013 के बीच उस पर 3 मामले दर्ज हुए, लेकिन पुलिस पकड़ में नहीं आया। 2014 में एसओजी में अभियान चलाकर जगदीश को गिरफ्तार किया लेकिन 3 मामलों में 2 माह की सजा के बाद बाहर आ गया।

2015 में दर्ज हुए 3 मामलों में 2 माह तक जेल में रहा। जेल से छूटने के बाद 2018 तक उस पर पेपर लीक व नकल करवाने आैर डमी अभ्यर्थी बैठाने के 3 मामले दर्ज हुए। जिनमें 5 माह जेल में काटने के बाद वह जनवरी 2019 में बाहर आया।

इसके बाद फरवरी 2024 में जगदीश विश्नोई की गिरफ्तारी हुई।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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