जोधपुर में प्लॉट के जाली दस्तावेज तैयार कर जेडीए से फर्जी पट्टा बनाने और भूखण्ड पर अवैध कब्जा करने के प्रकरण में दो आरोपियों को अरेस्ट किया। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुट गई है।
3 सितंबर 2025 को राधा देवी, निवासी कागा कॉलोनी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। राधा देवी ने रिपोर्ट में बताया था कि उनके दिवंगत पति पांचाराम उर्फ कुशलाराम मेघवाल के नाम से ग्राम चौपासनी जागीर, खसरा संख्या 122 में स्थित प्लॉट नंबर 71 से 74 और 82 से 86 का वैध पट्टा वर्ष 1989 में जारी हुआ था।
अधिकांश प्लॉटों को बेच दिया, एक प्लॉट बचा था
आगे बताया कि पांचाराम ने इन प्लॉटों के संबंध में अपना जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी विजयचंद जैन के पक्ष में कर रखा था, जिनकी ओर से अधिकांश प्लॉटों को बेच दिया गया है, केवल प्लॉट नंबर 71 ही बचा था।
राधा देवी ने बताया कि पांचाराम के निधन (13 फरवरी 2014) के बाद आम मुख्तियारनामा स्वतः ही निष्प्रभावी हो गया था और प्लॉट नंबर 71 पर पूरा अधिकार उनके वैध वारिसों, उनकी पत्नी और संतान का था।
ऐसे रचा गया था फर्जीवाड़ा
थानाधिकारी ईश्वरचन्द्र पारीक के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी प्रेमाराम पुत्र लालाराम, निवासी गसूरिया ने राजेन्द्र कुम्भट के नाम से फर्जी आम मुख्तियारनामा तैयार कर उसे नोटरी से सत्यापित करवाया।
इसी फर्जी अधिकार के आधार पर प्रेमाराम ने प्लॉट नंबर 71 का बेचान भैरूसिंह देवड़ा के नाम कर दिया।
बेचाननामा दिनांक 12 मार्च 2025 को उप-पंजीयक प्रथम कार्यालय में पंजीबद्ध किया गया। दस्तावेज़ में कई कथित गवाहों जैसे सवाई सिंह और जितेंद्र सिंह भाटी की साख डाली गई, जिनकी भूमिका भी संदिग्ध पाई जा रही है। जांच में स्पष्ट हुआ कि राजेन्द्र कुम्भट के पास प्लॉट नंबर 71 पर कोई हक नहीं था।
पुलिस ने दस्तावेज़ों की जांच, गवाहों के बयान और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की पड़ताल के आधार पर दोनों मुख्य आरोपी प्रेमाराम चौधरी और भैरूंसिंह देवड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। प्रकरण में अन्य शामिल व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।






