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शिक्षक भर्ती 2018 की सिनियॉरिटी-लिस्ट मेरिट के आधार पर बनेगी:हाईकोर्ट ने कहा- कम योग्यता वाला, अधिक योग्यता वाले से वरिष्ठ नहीं हो सकता

शिक्षक भर्ती में वरिष्ठा निर्धारण के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2018 की शिक्षक ग्रेड-II लेवल-II (नॉन-TSP क्षेत्र) की भर्ती में चयनित उम्मीदवारों की वरिष्ठता सूची को मेरिट के आधार पर दोबारा तैयार किया जाए।

जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण ने गुरुवार 27 नवंबर को पारित आदेश में स्पष्ट किया कि सीधी भर्ती में वरिष्ठता का निर्धारण केवल चयन प्रक्रिया में प्राप्त मेरिट के आधार पर ही होना चाहिए।​ वर्ष 2018 की पूरी भर्ती की वरिष्ठता सूची को दो माह के भीतर तैयार करने का आदेश दिया है।​

कम प्रतिभावान से जूनियर मानने पर आपत्ति

दरअसल, बीकानेर के भीनासर निवासी शिवाली मदान ने रिट याचिका दायर कर यह शिकायत की थी कि उन्हें उन व्यक्तियों से जूनियर माना गया है, जो उनसे कम प्रतिभावान हैं और उसी भर्ती एवं चयन प्रक्रिया में शामिल थे। याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि वरिष्ठता निर्धारित करते समय चयन सूची की मेरिट का पालन नहीं किया गया।​

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि मेरिट के अलावा किसी अन्य आधार पर वरिष्ठता तय नहीं की जा सकती, जिससे कम योग्यता वाला व्यक्ति अधिक योग्यता वाले से वरिष्ठ हो जाए।

कोर्ट का निर्णायक आदेश

हाईकोर्ट ने याचिका पर अंतिम सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्थापित किया। अपने आदेश में कोर्ट ने सुमन बाई और अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य, मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष भर्ती में एक ही चयन प्रक्रिया के उम्मीदवारों की वरिष्ठता केवल मेरिट सूची में उनके स्थान के आधार पर तय होनी चाहिए।​​

हाईकोर्ट ने कहा-

  • “यदि कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई है, तो जो उनसे ऊपर मेरिट सूची में हैं, उन्हें ऐसी नियुक्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।”​
  • “सीधी भर्ती के मामले में वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में उम्मीदवारों की स्थिति के आधार पर होना अनिवार्य है। समान चयन में उम्मीदवारों को नियुक्ति का अधिकार उनके चयन से मिलता है, जो मेरिट पर आधारित है।”​
  • “राजस्थान शिक्षा अधीनस्थ सेवा नियम, 1971 के नियम के अनुसार, समान चयन में उम्मीदवारों की अंतर-से वरिष्ठता मेरिट सूची के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए।”​
  • कोर्ट ने पाया कि “वरिष्ठता तय करते समय चयन सूची की मेरिट का पालन नहीं किया गया है।”

मेरिट उल्लंघन स्वीकार्य नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “मेरिट के अलावा किसी अन्य आधार पर वरिष्ठता तय नहीं की जा सकती, जिससे कम योग्यता वाला व्यक्ति अधिक योग्यता वाले से वरिष्ठ हो जाए। समान भर्ती प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भर्ती के उम्मीदवारों की वरिष्ठता केवल चयन प्रक्रिया में प्राप्त मेरिट के आधार पर होनी चाहिए।”​

सेवा लाभों पर व्यापक असर

वरिष्ठता में बदलाव से शिक्षकों के वेतन निर्धारण, बकाया राशि, वार्षिक वेतनवृद्धि की तिथियां, नोशनल परिलाभ, पेंशन लाभ और पदोन्नति पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। हाईकोर्ट ने पूर्व में भी ऐसे मामलों में देरी से नियुक्त शिक्षकों को पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के समान वरिष्ठता और सेवा परिलाभ देने के आदेश दिए हैं। जिन शिक्षकों को पहले से पदोन्नति मिल चुकी है, उनकी पात्रता भी पुनर्विचार के दायरे में आ सकती है।​

न्यायिक मिसाल का महत्व

सुमन बाई मामले (2009) में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि समान चयन में मेरिट के आधार पर वरिष्ठता निर्धारण अनिवार्य है। उस मामले में न्यायालय ने कहा था, “केवल इसलिए कि एक समूह के कर्मचारी ने न्यायालय का दरवाजा बाद में खटखटाया और दूसरे ने पहले, और दोनों की नियुक्ति हो गई, तो जो उम्मीदवार मेरिट में नीचे है उन्हें निश्चित रूप से वरिष्ठता में ऊपर नहीं रखा जा सकता।”​​

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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