पंचायतीराज विभाग की और से ग्राम पंचायतों के पुर्नगठन की अधिसूचना के बाद कुछ पंचायतों को लेकर ग्रामीणों ने आपत्तियां दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने इसके लिए अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मिलकर इसे ठीक कराने का आग्रह किया है।
जिले की फलासिया पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत आमीवाड़ा के राजस्व मुण्डकोशिया को पुनर्गठन के तहत देवड़ावास पंचायत में शामिल करने पर विरोध सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस निर्णय को अव्यवहारिक और जनविरोधी बताया।
उनका कहना है कि मुण्डकोशिया को देवड़ावास में शामिल करने का प्रस्ताव भौगोलिक स्थिति और राजस्व सीमाओं के लिहाज से उचित नहीं है।
एक प्रतिनिधिमंडल ने जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। ग्रामीणों ने तर्क दिया कि इस बदलाव से उनकी पारंपरिक सीमाएं, प्रशासनिक कामकाज और मूलभूत सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। खराड़ी से कांतिलाल कटारा, ताराचंद गरासिया, शांतीलाल गरासिया, अंबालाल गरासिया, गोपाल गरासिया आदि मौजूद थे।
सलूंबर में भी विरोध
इधर, सलूंबर जिले के जयसमंद पंचायत समिति में आने वाले सेमाल, नईझर दोनों ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने निकटतम दूरी वाली प्रस्तावित गींगला पंचायत समिति में शामिल होने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर ये गींगला पंचायत समिति मेवल क्षेत्र की केंद्र बिंदु भी है।
सेमाल सरपंच चंदा देवी, नईझर सरपंच तारादेवी ने बताया कि नवीन पंचायत समिति गिंगला की दूरी मात्र 6-8 किलोमीटर है और प्रस्ताव के अनुसार यदि यह पंचायत समिति बनती है तो सेमाल, नईझर की दोनों पंचायत को इसमें मिलाया जाता है तो निकटतम दूरी होकर के आमजन को पंचायत समिति मुख्यालय में पहुंचने पर आसानी होगी






