राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूल में छात्रा से यौन शोषण के आरोपी शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने 25 नवंबर को सुनाए फैसले में कहा- 6 फरवरी 2015 को कक्षा 6 की छात्रा से यौन उत्पीड़न के आरोपों में बच्ची के बयान ही आरोपी को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
ऐसे व्यक्ति के प्रति सहानुभूति नहीं हो सकती। जिस पर बच्चों के भविष्य का निर्माण करने का दायित्व हो और उसने बच्ची के साथ अनुचित व्यवहार किया हो।

कोर्ट ने कहा- बच्ची ने अपने बयान में साफ तौर पर बताया कि शिक्षक उसके साथ छेड़छाड़ करता था। मेरे बार-बार मना करने के बावजूद शिक्षक नहीं माना। उसने कहा कि मैं तुम्हें टच करना चाहता हूं। इससे तुम और भी सुंदर लगोगी। बच्ची के बार-बार मना करने के बावजूद शिक्षक ने यह सब किया। इसके अलावा, आठ अन्य बच्चों ने भी जांच समिति के सामने शिक्षक की इस हरकत की पुष्टि की।
महिलाओं के प्रति अनुचित व्यवहार समाज पर नकारात्मक प्रभाव कोर्ट ने कहा कि इसके बाद गठित की गई अनुशासन समिति ने मामले की तफ्तीश की और शिक्षक को दोषी पाया। इसी आधार पर शिक्षक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
फैसले में न्यायालय ने संस्कृत श्लोक ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ का भी उल्लेख किया, जिसका अर्थ है- ‘जहां महिलाओं का सम्मान किया जाता है, वहां देवता वास करते हैं।’
पहचान छुपाने के नियमों का कड़ाई से पालन हो अदालत ने संबंधित एजेंसियों को आदेश दिया कि ऐसे मामलों में बच्चों की पहचान छुपाने के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए ताकि पीड़ितों का सम्मान और सुरक्षा बनी रहे। यह फैसला शिक्षा व्यवस्था और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि बच्चों से जुड़ी यौन शोषण की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों को कठोर सजा दी जाएगी।
टीचर ने याचिका में कहा था- रंजिश के कारण फंसाया शिक्षक ने ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें उसने आरोप लगाया कि उसे स्कूल की एक शिक्षिका की निजी रंजिश के कारण झूठे मुकदमेबाजी के तहत फंसाया गया है।
कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह न्यायसंगत और वैध थी। आरोपी शिक्षक को उचित सुनवाई का अवसर मिला था।






