झालावाड़ पुलिस द्वारा सरकारी योजनाओं में साइबर फ्रॉड का खुलासा करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन शटरडाउन के तहत लगातार कार्रवाई जारी है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि इस चरण में सबसे बड़ी सफलता ₹25,000 के इनामी अपराधी कुलदीप ढोली पुत्र गजानन्द (29) निवासी देवरी खुर्द, थाना घाटोली की गिरफ्तारी से मिली। कुलदीप, जो कि ई-मित्र संचालक भी है, ऑपरेशन के प्रथम चरण के मुख्य सरगना रामावतार सैनी का मुख्य एजेंट था और फरार चल रहा था। पुलिस को उसके गुना, मध्य प्रदेश में छिपे होने के इनपुट मिले, जिसके बाद विशेष टीम ने उसे गिरफ्तार किया। कुलदीप की गिरफ्तारी के बाद फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र, पेंशन आवेदन, और अप्रूवल तक के सारे सिस्टम का पर्दाफाश हुआ।
सरकारी कर्मियों ने बांटी गोपनीय ID
एसपी कुमार ने बताया कि अनुसंधान में कुलदीप ढोली ने खुलासा किया कि फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए उसने तहसील कार्यालय के भीतर से गोपनीय एक्सेस प्राप्त किया था। इसी आधार पर तहसील कार्यालय अकलेरा में कार्यरत कनिष्ठ सहायक/रीडर पंकज कुमार पुत्र शंभूदयाल (30) निवासी सारोला कलां को राउण्ड अप कर गिरफ्तार किया गया। पंकज कुमार ने अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त कर कुलदीप को तहसीलदार अकलेरा की आधिकारिक आईडी और ओटीपी उपलब्ध कराई थी। कुलदीप ने यह एक्सेस रामावतार सैनी को दिया, जिसने इस आईडी का दुरुपयोग कर अपात्र लोगों का बल्क डेटा तहसील स्तर से अनुमोदित कर दिया, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ लेने के पात्र बन गए।
CMHO ऑफिस से फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट
पेंशन योजनाओं में पात्रता के लिए मुख्य आधार दिव्यांग प्रमाण पत्र था। इसकी जाँच के क्रम में रविन्द्र कुमार
पुत्र नन्दलाल (29) निवासी खुरी थाना कामखेड़ा, जो स्वयं ई-मित्र संचालक है को गिरफ्तार किया गया। रविन्द्र कुमार पूर्णतः स्वस्थ होते हुए भी फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के दम पर पेंशन और राज्य सरकार की मुफ्त स्कूटी वितरण योजना का अनुचित लाभ ले रहा था, जिसकी स्कूटी जब्त कर ली गई है। रविन्द्र से पूछताछ में खुलासा हुआ कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ऑफिस से जारी हुए थे। इस पर पुलिस ने CMHO ऑफिस में संविदा कर्मी ऑपरेटर युवराज सिंह पुत्र उम्मेद सिंह (41) निवासी झालावाड़ को गिरफ्तार किया। युवराज सिंह अपने एजेंटों से लाभ प्राप्त कर अपनी आधिकारिक आईडी से हजारों फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर चुका था।
अप्रूवल और DMIS पोर्टल में संलिप्तता
फर्जी दिव्यांगों को पेंशन का अंतिम अप्रूवल देने में तहसील अकलेरा के संविदा कर्मी ऑपरेटर हेमन्त कुमार पुत्र बाबूलाल (23) निवासी देवरी खुर्द और उसके एजेंट राकेश कुमार पुत्र मांगीलाल (28) निवासी रानीपुरा की संलिप्तता पाई गई। इन दोनों को भी डिटेन कर गिरफ्तार किया गया। हेमन्त कुमार तहसीलदार अकलेरा की आधिकारिक आईडी का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा कर रहा था। इसके अतिरिक्त फसल खराबा मुआवजा से संबंधित आपदा प्रबंधन सूचना प्रणाली (DMIS) पोर्टल में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में जीतमल पुत्र शिवनारायण (29) निवासी खुरी को भी गिरफ्तार किया गया।
ऑपरेशन की सफलता और बरामदगी
इस चरण की गिरफ्तारी के साथ ‘ऑपरेशन शटरडाउन’ के तहत सरगना राम अवतार सैनी वे मास्टरमाइंड विक्रम सैनी सहित अब तक कुल 47 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
अभी की कार्रवाई में गिरफ्तार अभियुक्तों से पुलिस ने 03 लेपटॉप, 07 एंड्रायड मोबाईल, 01 स्कूटी और फर्जीवाड़े से संबंधित बड़ी मात्रा में संदिग्ध डिजिटल डाटा बरामद किया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने दोहराया है कि सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ यह ऑपरेशन पूरी सख्ती और शिद्दत के साथ निरंतर जारी रहेगा





