आईटीएटी घूसकांड मामले में सीबीआई ने 22 स्थानों पर सर्च किया, जहां पर बड़ी मात्रा में अवैध दस्तावेज, केसों से संबंधित फाइलें, दो लॉकर में नकदी व सोने के जेवर मिले हैं। सीबीआई की जांच सोमवार को 6वें दिन भी जारी रही। जांच में गत चार वर्ष के मामलों में दिए गए निर्णय संदिग्ध लग रहे हैं। आईटीएटी की न्यायिक सदस्य एस. सीता लक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया,मुजम्मिल और अकाउंटेंट सदस्य कमलेश राठौर के 22 ठिकानों पर सीबीआई ने सर्च किया, जिसमें बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, कैश, जेवर और रुपए के लेन-देन का डिजिटल डेटा बरामद किया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिछले करीब 4 वर्षों से आयकर अपीलों में राहत दिलाने के बदले भारी रिश्वत ली जा रही थी। आईटीएटी की बेंच में बिल्डर्स, रियल एस्टेट और बड़े कारोबारी समूहों के टैक्स विवादों में मनमानी राहत देने का आरोप है। इसी आधार पर सीबीआई सभी संदेहास्पद फैसलों की जांच कर रही है।इधर, सीबीआई ने सोमवार को कमलेश राठौर को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं, गिरफ्तार ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीता लक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया 2 दिसंबर तक रिमांड पर चल रहे हैं।
ये चार गिरफ्तारियां हुई हैं
ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीता लक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया, मुजम्मिल और अकाउंटेंट-मेंबर कमलेश राठौर की गिरफ्तारी हुई है। इस बात की तस्दीक की जा रही है कि आईटीएटी के निर्णयों पर असर डालने के खेल में इनके अलावा कौन-कौन शामिल हैं। ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीता लक्ष्मी के घर की तलाशी में प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज, महंगे कपड़े, सोने के गहने और लग्जरी आइटम मिले हैं। इन सभी का भुगतान नकद में किया गया और कई बिल दूसरे लोगों के नाम पर बने मिले। यानी लाभ किसी और को और बिल किसी और के नाम। कानूनी भाषा में कहें तो यह एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर था।
ITAT आदेशों के ड्राफ्ट भी संदिग्ध
सीबीआई अब उन निर्णयों की जांच में जुटी है, जिनका ड्राफ्ट मोबाइल और डिजिटल डिवाइस में मिला है। आरोप है कि ड्राफ्ट कुछ और रहते थे और फाइनल आदेश कुछ और निकलते थे। यह बदलाव कैसे और किस दबाव व कितनी रिश्वत के आधार पर होते थे—सीबीआई अब उसकी कड़ियां जोड़ रही है। डिलीट की गई चैट्स और बरामद दस्तावेजों को क्रॉस-वेरिफाई किया जा रहा है।
एडवोकेट राठौर की डायरी में निकला हिसाब
एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया से मिली डायरी में आईटीएटी अधिकारियों से हुए लेन-देन की एंट्रियां मिली हैं। सीबीआई का मानना है कि केस वर्तमान घूसकांड का नहीं, बल्कि पुराने मामले भी खुल सकेंगे।





