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चाकसू उप जिला अस्पताल में नवजात की मौत:परिजनों का आरोप – टीका लगवाने से आया था बुखार, डॉक्टर बोले- आहार नली में दुध जमने से मौत

उप जिला अस्पताल में टीका लगवाने के एक दिन बाद नवजात की मौत होने का मामला सामने आया है। यह मामला जयपुर जिले के चाकसू थाना क्षेत्र का है। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बार-बार डॉक्टर को बुलाने पर भी कोई नहीं आया और इस लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हो गई।

डॉक्टर बोली- प्राइवेट अस्पताल नहीं है जो बार-बार जांच करते रहें

मृतक नवजात के ताऊ रमेश प्रजापति ने बताया कि उनके छोटे भाई की पत्नी कौशल्या देवी को रविवार सुबह 9 बजे चाकसू के उप जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। दोपहर 12:33 बजे डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के समय से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था। अगले दिन सोमवार सुबह करीब 10 बजे बच्चे को टीका लगाया गया। टीका लगते ही बच्चे को बुखार आ गया। अस्पताल से दवा लिखी गई, जो परिजनों ने मेडिकल से लाकर दे दी, लेकिन बुखार नहीं उतरा। सुबह की शिफ्ट वाले डॉक्टर हरिमोहन मीणा की ड्यूटी पूरी हो गई थी। परिजनों ने उन्हें फोन किया तो उन्होंने बताया कि डॉक्टर रेखा शर्मा और डॉक्टर नेहा चाहर ड्यूटी पर हैं, बच्चे को उन्हें दिखा दें। इसके बाद अस्पताल स्टाफ परिजनों को इमरजेंसी और शिशु जांच कक्ष के बीच काफी देर तक भेजता रहा। दो से तीन घंटे तक बच्चा बुखार में रहा।

इस दौरान परिजन डॉक्टर रेखा के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि यह कोई प्राइवेट अस्पताल नहीं है जो बार-बार जांच करते रहें। यह कहकर उन्होंने बच्चे को इमरजेंसी वार्ड में दिखाने की सलाह दी। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर से जांच करवाने पर बच्चे का तापमान 101 मिला। दवा देने के बाद बुखार उतरा और बच्चा सो गया।

कुछ देर बाद परिजनों ने देखा कि बच्चा उल्टी कर रहा है और उसके नाक और मुंह से पानी आ रहा है। डॉक्टर नेहा चाहर को बुलाया गया। जांच करने पर उन्होंने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि सुबह से शाम तक वे बच्चे को दिखाने के लिए अस्पताल में भटकते रहे, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। शाम करीब 8 बजे बच्चे की मौत हो गई।

हंगामे के बाद डॉक्टरों ने पुलिस को बुलाया

बच्चे की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में विरोध किया। हंगामे की सूचना पर डॉक्टरों ने पुलिस को बुलाया।

हेड कॉन्स्टेबल मुकेश कुमार और श्रवण कुमार ने बताया कि परिजनों को एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। परिवार का कहना है कि प्रशासन अस्पताल पर कार्रवाई करे। पुलिस ने यह भी कहा कि यदि परिजन चाहें तो एसएमएस अस्पताल जयपुर में पोस्टमॉर्टम करवाया जा सकता है, लेकिन परिवार इसके लिए तैयार नहीं हुआ और शव को लेकर गांव लौट गया।

अस्पताल प्रभारी डॉक्टर ऋतुराज मीणा ने बताया कि वार्ड में मौजूद दूसरी महिलाएं आपस में बात कर रही थीं कि बच्चों को बाहर से कटोरी में लाकर दूध पिलाया गया। उनके अनुसार बच्चे की मौत का कारण गले की आहार नली में दूध का जमा होना है, जिसे नवजात पचा नहीं सका और दूध गले में रुक गया।

परिवार कर रहा न्याय की मांग

जयपुरा निवासी रमेश प्रजापति ने बताया कि उनके छोटे भाई के घर तीन बेटियों के बाद यह पहला बेटा था। मृतक बच्चे के पिता रामजीलाल मजदूर हैं। परिवार गहरे सदमे में है और पूरे मामले में न्याय की मांग कर रहा है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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