बीजेपी ने अपने 7 मोर्चों में से दो की जिम्मेदारी पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों को दी थी। तभी से सियासी चर्चा थी कि पार्टी ने इन केन्द्रीय मंत्रियों को प्रमोशन किया है या डिमोशन। इनमें से किसान मोर्चे का पदभार आज पूर्व केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने संभाल लिया।
इस पदभार कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि देखिए, लॉन्ग जंप (लंबी छलांग) करने के लिए पीछे आना पड़ता है। तब लॉन्ग जंप होती है तो मैं भी इनको शुभकामनाएं दे रहा हूं कि थोड़ा पीछे आकर के लॉन्ग जंप करेंगे।
बता दें कि कैलाश चौधरी के साथ ही बीजेपी पूर्व केन्द्रीय मंत्री निहालचंद मेघवाल को भी अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चे का प्रदेशाध्यक्ष बनाया था।

किसान मोर्चा अध्यक्ष का अजीब संयोग
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान को समझने के लिए बीजेपी किसान मोर्चे से जुड़े एक संयोग को समझना जरूरी हैं। दरअसल, पिछले 7 सालों से बीजेपी किसान मोर्चे के अध्यक्ष की कुर्सी के साथ एक अजीब संयोग जुड़ा है। किसान मोर्चे के नव नियुक्त प्रदेशाध्यक्ष कैलाश चौधरी जब पहले किसान मोर्चे के अध्यक्ष थे। उस समय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने साल 2018 में बाड़मेर की बायतू सीट से विधायक का चुनाव लड़ा। लेकिन वे चुनाव हार गए। इसके बाद पार्टी ने उन्हें साल 2019 में लोकसभा चुनावों में बाड़मेर टिकट दे दिया। यह चुनाव उन्होंने जीता और केन्द्र में मंत्री बने।
इसी तरह से कैलाश चौधरी से पहले किसान मोर्चे के अध्यक्ष भागीरथ चौधरी को साल 2023 में किसान मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में उन्हें पार्टी ने किशनगढ़ से टिकट दिया। लेकिन वे चुनाव हार गए। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में पार्टी ने उन्हें अजमेर से लड़ाया, वे जीते और आज केन्द्र में कृषि राज्यमंत्री हैं।






