अजमेर के वैशाली नगर में रहने वाले रिटायर्ड अधिकारी को 13 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करने का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने सीबीआई ऑफिसर बनकर मनी लान्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 57 लाख रुपए हड़प लिए।
पीड़ित रिटायर्ड अधिकारी की ओर से सोमवार को साइबर थाने में शिकायत दी है। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फर्जी डॉक्यूमेंट भेज कर डराया, हड़पे 57 लाख
साइबर थाने के सीओ शमशेर खां ने बताया कि वेटरनरी डिपार्टमेंट से रिटायर्ड वैशाली नगर निवासी जगदीश कुमार को डिजिटल अरेस्ट किया गया। उन्हें मनी लान्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनके और पत्नी के अकाउंट से करीब 57 लाख रुपए हड़प लिए हैं। पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान जारी है।
पीड़ित जगदीश कुमार ने बताया कि 22 दिसंबर को उन्हें पहली बार वॉट्सऐप पर कॉल किया गया। कॉलर के द्वारा सीबीआई ऑफिसर बनकर मनी लान्ड्रिंग केस में उनके डॉक्यूमेंट, बैंक खाते और मोबाइल नंबर जुड़े होने की जानकारी दी गई। ठगों के द्वारा लगातार उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाकर झांसे में लिया गया।
पीड़ित ने बताया कि उन्हें सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज भी वॉट्सऐप पर भेजे गए। जिससे वह ठगों के झांसे में आ गए। उन्होंने करीब चार ट्रांजैक्शन के जरिए अपने अकाउंट से आरटीजीएस के जरिए 29 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में पत्नी के अकाउंट और एफडी तुड़वाकर 28 लाख रुपए और ट्रांसफर किया। कुल 57 लाख रुपए ठगों को ट्रांसफर किए थे।
पेंशन की राशि मांगी तो हुई कहासुनी
पीड़ित ने बताया कि 31 दिसंबर को जब उनके खाते में पेंशन की राशि आई तो ठग उसे भी ट्रांसफर करने का दबाव बनाने लगे। इस पर बुजुर्ग दंपत्ति नाराज हो गए और ठगों से फोन पर कहासुनी और गाली गलौज भी हुई। इसे लेकर उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दी है। मामला में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राशि होल्ड करने की प्रक्रिया जारी
सीओ शमशेर खां ने बताया कि मामले में पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। पीड़ित की ओर से करीब 57 लाख रुपए ठगों को ट्रांसफर किए गए थे। यह पूरी राशि आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर हुई थी। कुछ पैसे हॉल करवाने की प्रक्रिया चल रही है।





