महेश नगर थाना क्षेत्र में निलंबित व्याख्याता मनोहरलाल भादू की आत्महत्या का मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक ने सुसाइड नोट में एसओजी के दो अधिकारियों पर आरोप लगाने के बाद परिजन पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए मोर्चरी के बाहर दूसरे दिन भी धरने पर बैठे है।
पूर्व मंत्री भी धरने पर बैठे
धरने में सुबह पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई भी शामिल हुए। उन्होंने कहा अभी तक वार्ता के लिए कोई आया नहीं है। परिवार की चार मांगे है। मृतक पर दो अधिकारियों का दबाव था, उसने मरने से पहले सुसाइ़ड नोट पर सारी बाते लिखी है। पुलिस दोनों अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करें।
उन्होंने कहा- परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है परिवार में तीन छोटे-छोटे बच्चे है। ऐसे में उसकी विधवा को नौकरी दी जाए। उसकी बची हुई तनखाह भी परिवार को दी जाए या कोई पैकेज जारी की जाए ये परिवार की मांग है। मांग जब तक पूरी नहीं होगी तब तक धरना जारी रहेगा।

मंत्री केके विश्नोई से वार्ता को पहुंचा प्रतिनिधिमंड़ल
मृतक के चचेरे भाई पूनमाराम ने बताया- सरकार की ओर से अभी कोई ठोस वार्ता नहीं हुई है। हालांकि चार लोगों का प्रतिनिधिमंडल मंत्री केके विश्नोई से बात करने गया है। हमारी सरकार से जायज मांग है कि मृतक की विधवा को अनुकंपा पर नौकरी मिले। दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। सरकार हमारी मांग नहीं मांगेगी तब तक हम धरने से नहीं हठेंगे।
बता दें कि मनोहरलाल भादू (35) जालोर जिले के सांचौर निवासी थे। उनके 3 बच्चे हैं, जो पत्नी के साथ गांव में रहते हैं। निलंबन के बाद वह जयपुर महेश नगर में किराए से रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बुधवार शाम उन्होंने अर्जुन नगर रेलवे फाटक के पास ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस परिजनों व ग्रामीणों से समझाइश कर रही है, लेकिन परिजन आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
किसी के भी पकड़े जाने पर जोड़ देते थे नाम: परिजन
इससे पहले गुरुवार को मृतक के परिजनों ने एसओजी के दो अधिकारियों श्यामसुंदर और मुकेश सोनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि मनोहर को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि किसी भी मामले में किसी के पकड़े जाने पर मनोहर का नाम जबरन जोड़ दिया जाता था। मनोहर ने दोस्तों को भेजे सुसाइड नोट में खुद को निर्दोष बताया था।

कई मामले दर्ज
मनोहर के खिलाफ 2021 में बजाज नगर थाना क्षेत्र में रीट परीक्षा में डमी बैठाने के मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। 2022 में उदयपुर के सवीना थाना क्षेत्र में भी डमी कैंडिडेट के प्रयास के आरोप में उसे पकड़ा गया था। वर्ष 2024 में स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा में भी उसका नाम सामने आया था।
परिजनों की मांगें:
ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि नामजद दोनों एसओजी अधिकारियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज हो। पूरा वेतन व एरियर तत्काल, परिजनों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। विधवा को अनुकंपा पर नौकरी देने की मांग।
मोर्चरी के बाहर धरना, नेताओं का समर्थन
गुरुवार को धरनास्थल पर कांग्रेस नेता अभिमन्यु पूनिया पहुंचे और मामले को केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि गंभीर दबाव का परिणाम बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी प्रकरण को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। आरयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी ने कहा कि पीड़ित को न्याय मिलने तक हम संघर्ष करते रहेंगे।





