कुचामन सिटी में बुधवार को विश्व यूनानी दिवस गरिमा, उत्साह और विचार-विमर्श के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में मौजूद शिक्षाविद और शायर अतीक अहमद उस्मानी ने संबोधन में कहा कि हकीम अजमल खान केवल एक चिकित्सक नहीं थे, बल्कि वे राष्ट्रनिर्माता, शिक्षाविद और सामाजिक चेतना के प्रतीक थे। उस्मानी ने कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति आज भी अपनी समग्र सोच, प्राकृतिक उपचार और मानवीय दृष्टिकोण के कारण समाज के लिए प्रासंगिक है तथा हमें इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
राजकीय जिला अस्पताल, कुचामन सिटी में आयोजित कार्यक्रम में यूनानी चिकित्सा पद्धति के महत्व, उसकी समग्र उपचार प्रणाली और जटिल व दुर्लभ बीमारियों में इसके सकारात्मक प्रभाव को विस्तार से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों को सम्मानित भी किया गया।गौरतलब है कि विश्व यूनानी दिवस प्रसिद्ध यूनानी चिकित्सक, विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी हकीम अजमल खान की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2016 में 11 फरवरी को विश्व यूनानी दिवस घोषित किया था। इसका पहला औपचारिक आयोजन वर्ष 2017 में केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, यूनानी चिकित्सा, हैदराबाद में हुआ था। तब से यह दिवस देशभर में नियमित रूप से मनाया जा रहा है।
समारोह की शुरुआत हकीम अजमल खान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। वक्ताओं ने उन्हें “मसीह-उल-मुल्क” और यूनानी चिकित्सा पद्धति के गॉडफादर के रूप में याद करते हुए आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इस पद्धति को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को नमन किया।
यूनानी चिकित्सा विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. तनवीर हुसैन ने बताया कि इस दिवस को मनाने का उद्देश्य हकीम अजमल खान के अद्वितीय योगदान को श्रद्धांजलि देना और यूनानी चिकित्सा पद्धति के निवारक एवं उपचारात्मक दृष्टिकोण के प्रति आमजन को जागरूक करना है।
यूनानी चिकित्सक डॉ. असदुल्लाह खान ने कहा कि यूनानी चिकित्सा शरीर, मन और प्रकृति के संतुलन पर आधारित समग्र उपचार प्रणाली है। उन्होंने बताया कि कई दीर्घकालिक और जटिल रोगों के साथ-साथ कुछ दुर्लभ बीमारियों में भी यूनानी चिकित्सा से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यह पद्धति रोग के मूल कारण पर कार्य करती है और प्राकृतिक औषधियों तथा जीवनशैली में सुधार के माध्यम से स्वास्थ्य संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में यूनानी चिकित्सा की शुरुआत लगभग 10वीं शताब्दी से मानी जाती है, लेकिन इसे पुनर्जीवित कर आधुनिक स्वरूप देने का श्रेय हकीम अजमल खान को जाता है।
हकीम अजमल खान का जन्म 11 फरवरी 1868 को हुआ था। वे एक प्रख्यात यूनानी चिकित्सक, महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने यूनानी चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा दी। वे जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली तथा आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज, नई दिल्ली के संस्थापकों में शामिल रहे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे और राष्ट्रसेवा व चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए “मसीह-उल-मुल्क” की उपाधि से सम्मानित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान यूनानी चिकित्सा पद्धति में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले चिकित्सकों और चिकित्सा विभाग के कार्मिकों का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर शिक्षाविद और शायर अतीक अहमद उस्मानी ,राजकीय जिला अस्पताल कुचामन के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. शकील अहमद, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण मोहनपुरिया, यूनानी चिकित्सा विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. तनवीर हुसैन, यूनानी चिकित्सक डॉ. असदुल्लाह खान, नर्सिंग अधीक्षक अनवर हुसैन सहित अन्य चिकित्सा कर्मी और नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में पीएमओ डॉ. शकील अहमद और डॉ. लक्ष्मण मोहनपुरिया ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का संरक्षण और संवर्धन समय की आवश्यकता है। विश्व यूनानी दिवस केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि समग्र और प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली के प्रति समाज में विश्वास और जागरूकता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम है।






