राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को धानक्या स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक पहुंचकर उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
राज्यपाल ने वहां आयोजित पंडित उपाध्याय की प्रार्थना सभा में भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि ‘एकात्म मानववाद’ के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय व्यक्ति नहीं संस्था थे। उनकी ‘एकात्म मानववाद’ की दृष्टि निर्धनता और अशिक्षा को दूर कर समाज में सभी स्तरों पर समानता स्थापित करने की रही है। उन्होंने दीनदयाल जी के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि वह अपने सारे कार्य स्वयं करते थे। वह बहुत सहज और सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते थे।
राज्यपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में भारतीय ज्ञान परम्परा के बीज निहित है। उन्होंने कहा भारतीय संस्कृति में निष्ठा रहेगी तभी भारत एकात्म रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत को अगर विश्व में पहचान मिलेगी तो उसके मूल में भारतीय संस्कार व संस्कृति ही होगी। पंडित दीनदयाल जी ने सदा इसी सोच का प्रसार किया।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए एकात्म मानववाद की मौलिक विचार दृष्टि हमें दी। उनके अंत्योदय के विचारों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए हमें समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल बागडे ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्मारक पर पंडित जी के जीवन आलोक से जुड़ी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।





