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जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित आदिवासियों के उत्थान हेतु प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार- जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के आदिवासियों के उत्थान हेतु प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में आदिवासी बहुल इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सहित सभी क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति सुनिश्चित की जा रही है।

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री सोमवार को विधान सभा में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की (मांग संख्या-30) अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की 381 अरब 99 करोड़ 72 लाख 27 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं।

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने बताया कि जनजाति भागीदारी योजना के तहत प्रदेश सरकार द्वारा गत दो सालों में 346 करोड़ से अधिक की राशि से 2593 कार्यों को पूरा करवाया गया है। वहीं धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत राज्य के 37 जिलों के 6019 गांवों का विकास किया जा रहा है। गत वर्ष 15 जून से 15 जुलाई तक अभियान के तहत अनुसूचित जनजातियों के उत्थान हेतु जनजातीय बहुल गांवों में आधारभूत ढांचे का विकास, रोजगार, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में संचालित कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राजस्थान राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया है। उन्होंने बताया कि 83 करोड रुपए के खर्च से अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रावासों के मरम्मत कार्य करवाए जा रहे हैं।

मंत्री खराड़ी ने बताया कि आदि कर्मयोगी अभियान द्वारा 26 जिलों में आदिवासी युवाओं का प्रशिक्षण विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है। इसके माध्यम से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल, आधारभूत ढांचे आदि से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 5093 गावों में आदि सेवा केंद्र शुरू किए गए हैं। इसके तहत सरकारी योजनाओं का अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने के लिए आदिवासी बहुत गांवों में एकल खिड़की नागरिक सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों से सीधे संपर्क स्थापित कर शिकायतों का तत्काल निवारण करना एवं राहत देना है।

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने बताया कि जनजातीय समुदायों के बलिदान, संस्कृति और विरासत का सम्मान करने के लिए महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक जनजाति गौरव वर्ष मनाया गया। इस दौरान आदिवासी कलाओं, परंपराओं, संस्कृति से संबंधित भाषण, लेखन, भजन सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मंत्री खराड़ी ने बताया कि सौंध माटी आदि धरोहर प्रलेखन योजना के तहत जनजातीय कलाकारों के वाद्य यंत्रों, पाक कला, आस्था केंद्रों, ऐतिहासिक स्थलों, चित्रकारी, काष्ठ एवं प्रस्तर कला, नृत्य, गायन आदि का दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जाएगा।

मंत्री खराड़ी ने बताया कि आदिवासी संस्कृति को पहचान दिलाने के क्रम में गत वर्ष 15 से 17 सितंबर तक उदयपुर में नेशनल ट्राइबल फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी व्यंजनों एवं भोजन शैली का प्रचार प्रसार किया गया। इस आयोजन के दौरान आमजन एवं पर्यटकों को आदिवासी खान पान के बारे में जानने एवं पारंपरिक जनजातीय व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर मिला।

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार आदिवासी बहुल क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने हेतु लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में जनजाति क्षेत्र में एनीमिया पीड़ित मरीजों के बेहतर इलाज हेतु टोल फ्री नंबर जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कॉल करने पर एम्बुलेंस मरीज को लेने आएगी तथा अस्पताल पहुंचाकर उचित उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षिक उत्थान हेतु 11वीं कक्षा में अध्ययनरत आदिवासी बालिकाओं को भी निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्र में बसे आदिवासियों को पट्टा जारी करने के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर प्रकोष्ठ गठित किए गए हैं।

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Author: Kashish Bohra

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