Home » राजस्थान » नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा, 50 हजार के अर्थदंड से भी किया दंडित

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा, 50 हजार के अर्थदंड से भी किया दंडित

धौलपुर: धौलपुर जिले के विशेष न्यायालय पॉक्सो कोर्ट ने बाड़ी के पुलिस थाना सदर पर वर्ष 2021 में दर्ज हुए 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ जबरन दुष्कर्म करने के मामले में एक आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे बीस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई हैं. साथ ही 50 हजार रुपए के जुर्माने से दण्डित किया हैं. विशेष न्यायालय पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक संतोष मिश्रा ने बताया कि धौलपुर जिले के बाड़ी सदर पुलिस थाना पर एक परिवादी ने 22 सितम्बर 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी.जिसमें उसने बताया कि 21 सितम्बर 2021 की रात को उसकी 13 वर्षीय नाबालिग पुत्री अपने घर की छत पर शौच करने गई हुई थी. तभी वहां पहले से घात लगा कर बैठा आरोपी रामनरेश पुत्री का मुंह बंद कर अपने मकान की छत पर ले गया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया.

आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी की अगर किसी को बताया तो जान से मार दूंगा. पीड़िता ने छत से नीचे आकर घटना के बारे मे जानकारी अपनी मां को दी. पीड़िता की मां जब छत पर गई तो आरोपी रामनरेश और उसके भाई ने अवैध कट्टा तान कर जान से मारने की धमकी दे डाली. पुलिस ने आरोपी रामनरेश के खिलाफ मामला दर्ज कर पीड़िता का मेडीकल और बयान दर्ज कराये. पुलिस ने आरोपी रामनरेश को गिरफ्तार कर पॉक्सो न्यायालय में पेश किया. आरोपी रामनरेश तभी से न्यायिक अभिरक्षा में चल रहा हैं.

मामले में लोक अभियोजक मिश्रा ने कोर्ट में 17 गवाह पेश कर दस्तावेजों को साबित कराया. प्रकरण में न्यायाधीश जमीर हुसैन ने दोनों पक्षों की बहस और लोक अभियोजक की दलील सुनने के बाद आज आरोपी रामनरेश पुत्र छोटे कुशवाह को आईपीसी की धारा 376 एवं पॉक्सो एक्ट में दोषी मानते हुए बीस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई हैं. साथ ही मुल्जिम को 50 हजार रुपए के अर्थ दंड से दण्डित किया हैं.

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS

7k Network

Top Headlines

चम्बल अभयारण्य में बजरी माफिया पर राजस्थान पुलिस का पहले से ही कड़ा प्रहार धौलपुर-करौली में गत दो वर्ष में 392 मुकदमे दर्ज

वर्ष 2025 के प्रारम्भ से ही पुलिस चला रही है जीरो टॉलरेंस अभियान; माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद