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खामोर में सप्तदिवसीय नानी बाई के मायरे का आयोजन

शाहपुरा@(किशन वैष्णव)रामपुर खामोर में सप्त दिवसीय नानी बाई के मायरे का आयोजन 21 नवंबर से चल रहा है जिसमें सभी ग्राम वासियों की तरफ से सार्वजनिक रूप से यह भक्ति यज्ञ करवाया जा रहा है नानी बाई के मायरे की कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण लाभ लेने पहुंच रहे है कथा के तीसरे दिन भगवान कृष्ण और नरसी मित्रता और प्रेम के संदर्भ में भक्त शिरोमणि भगवान नरसी के जीवन लीला का वर्णन बड़े सुंदर भाव से किया जा रहा हैं कथा वाचक पंडित केदार महाराज ने बताया की जीवात्मा के द्वारा करी गई भक्ति कभी विफल नही होती नरसी जी के पिछले जन्म का वर्णन करते हुए के पंडित केदार ने बताया की नरसी भक्त पिछले जन्म में द्वापर युग में सुदामा थे और भगवान श्री कृष्ण के परम मित्र थे जब द्वापर युग में भक्त और भगवान के आत्म मिलन महारास का आयोजन हुआ तब भक्त सुदाम भी महारास में गए तब भगवान श्री कृष्ण के अलावा किसी भी पुरुष को प्रवेश नही था तब भगवान श्री कृष्ण ने मित्र धर्म निभाया और सुदामा को रोशनी का चिराग हाथ में पकड़ा दिया जब महारास शुरू हुआ! महारास के भक्तिरस में मित्र सुदाम इतना मग्न हो गए की उसका पूरा हाथ ही जल गया! महारास खत्म होने के बाद भगवान ने भक्त सुदाम को वचन दिया की कलयुग में उसका कर्ज चुकाने फिर आयेंगे उसी वचन को पूरा करने के लिए सुदामा का नरसी के रूप में जन्म हुआ और भक्ति को हृदय में लेकर ही आए! सारी संपत्ति धर्म में खर्च कर दी और भक्ति मय जीवन व्यतीत करने लगे।कथावाचक केदार महाराज ने कहा यदि हमें जिंदगी में कुछ अच्छा करना है तो उसके लिए अच्छी संगत का होना जरूरी है।आज के युवाओं में जोश बहुत है पर धैर्य की कमी है।यदि उन्हें पोस्ट चाहिए तो अपने घर के बुजुर्गों के साथ बैठना होगा।उन्होंने कहा, जब हम अच्छी संगत में रहते हैं तो हर काम अच्छे होते हैं। आपकी जिंदगी है, आपकी आजादी है, यदि हम जबरदस्ती करेंगे भी तो कितने दिन कर लेंगे?घर के बुजुर्ग युवाओं को रास्ता दिखा सकते हैं। मानना है या नहीं मानना,यह उन पर निर्भर है। यदि घर में बच्चा गलती कर रहा है तो उसे समझा दो। बता दो,लेकिन फिर भी यदि वह गलती करता है तो करने दो, लेकिन उसके साथ खड़े रहो।भगवान ने सभी को बुद्धि दी है। इस बुद्धि का इस्तेमाल करो।भगवान रास्ता बताते हैं,इस रास्ते में सुगमता है और इस रास्ते में खाई भी है सोचना हमको है!

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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