राजपूत परिवार ने समाज के सामने एक मिशाल पैदा की है। आसींद उपखंड क्षेत्र के पांडरु गांव में दूल्हे भूपेंद्र सिंह s/o सुरेंद्र सिंह चुंडावत की बारात बदनोर क्षेत्र के अक्षय गढ़ पहुंची जहां पर एक रस्म तिलक दस्तूर के दौरान वधु पक्ष के द्वारा वर पक्ष के समक्ष पांच लाख रुपए की पेशगी की गई लेकिन वर पक्ष से दूल्हे के पिता सुरेंद्र सिंह ने यह कहकर राशि लौटा दी की बेटी ही लक्ष्मी का स्वरूप होती है|एक राजपूत परिवार के विवाह समारोह में मौके पर जब वर पक्ष पहुंचा तो तिलक दस्तूर में समाज के लोगों के सामने दूल्हे को पांच लाख रुपए की राशि देना चाहा। इस पर दूल्हे ने ससुर का सम्मान करते हुए हाथ जोड़कर कहा कि आप हमें बेटी दे रहे हैं। इससे बड़ा कोई दहेज नहीं है। दूल्हे ने शगुन के तौर पर सिर्फ एक रुपया व नारियल रखा और पांच लाख रुपए की राशि लौटा दी। क्षत्रिय समाज के लोगों ने वर पक्ष के द्वारा इस प्रकार की अनूठी पहल के लिए सराहना की तथा समाज के प्रबुद्धजनो ने की सराहना..-
भीलवाड़ा जिले के पांडरु से सुरेंद्र सिंह के पुत्र भूपेंद्र सिंह की बारात अक्षय गढ़ पहुंची थी जहां पर भुपेंद्र सिंह का विवाह अक्षय गढ़ निवासी गणपत सिंह राठौड़ की पुत्री अंतिम कंवर राठौड़ से हुआ । वर पक्ष के द्वारा समाज के सामने टीके में मोटी रकम लेने की परंपरा पर अंकुश लगाने के लिए यह पहल की।यह देखकर वहां मौजूद राजपूत समाज के लोगों ने इस कदम की सराहना की।विवाह समारोह में सभी ने इस पहल को राजपूत एवं अन्य समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।





