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वृद्ध दंपति हत्याकांड में फैसला कल संभव:सुप्रीम कोर्ट से जमानत निरस्त होने से तीनों आरोपी जेल में, लूट की मंशा से की थी हत्या

अजमेर के अलवर गेट थाना क्षेत्र में 3 साल पहले वृद्ध दंपति की हत्या के मामले में कोर्ट शुक्रवार को फैसला सुना सकती है। मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई, गवाहों और आरोपियों के बयान व अंतिम बहस पूरी हो चुकी है। नशे में धुत युवकों ने लूट की मंशा से वृद्ध दंपति की हत्या की थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को 24 घंटे में गिरफ्तार कर लिया था।

बेटा चाय देने गया तो देखी दोनों की लाशें

मामले के अनुसार गुलाबबाड़ी क्षेत्र में 85 वर्षीय मदन और 80 वर्षीय उनकी पत्नी मैना देवी अपने पैतृक मकान में रहते थे और परचूनी की छोटी दुकान चलाकर अपना जीवन यापन कर रहे थे। उनका बेटा दिनेश सिंह चौहान पास ही दूसरे मकान में रहता था, किंतु वह रोजाना सुबह अपने माता-पिता के लिए चाय, नाश्ता और खाना लाकर उनकी देखभाल करता रहता था।

29 जून 21 की सुबह करीब साढ़े पांच बजे दिनेश रोजाना की तरह माता-पिता को चाय देने गया तो उसने देखा कि मकान का मुख्य दरवाजा खुला है। अंदर कमरे का भी दरवाजा खुला मिला और माता-पिता की लाश व खून पड़ा दिखा। उसने तत्काल अपने परिवार और पास-पड़ोसियों को सूचना देकर बुला लिया। इसी बीच अलवर गेट थाना पुलिस भी पहुंच गई। मृतक दंपती और उनके बेटे का किसी से विवाद नहीं होने से मामला उलझने लगा था। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया और शव उनकेपरिजन को को सौंप दिया।

वारदात के बाद चौबीस घंटे में पकड़े गए थे आरोपी

मृतक दंपती के पुत्र दिनेश अलवर गेट थाने में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज कराया था। तत्कालीन सीआई सुनीता गुर्जर ने वारदात के चौबीस घंटे के भीत्र ही आरोपी दीपक कुवाल, दिव्यांश भाटी व सुमेर सिंह को दबोच लिया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि दीपक कुवाल को पचास हजार रुपए की आवश्यकता थी। यह बात उसने दोनों दोस्त दिव्यांश व सुमेर सिंह को बताई। उन्होंने परचूनी की दुकान चला रहे मदन सिंह व मैनादेवी के अकेले रहने व अच्छा पैसा होने की संभावना व्यक्त की। तीनों 28-29 जून 21 की रात्रि में योजनाबद्ध तरीके से वृद्ध दंपती के मकान में घुसे और धारदार हथियार से उनकी गर्दन रेत कर हत्या की और वहां से जेवर व नकदी लेकर फरार हो गए थे।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत हुई थी निरस्त

चूंकि आरोपी सुमेर सिंह की जमानत हाईकोर्ट से हुई थी, इसलिए पीड़ित दिनेश सिंह ने अपने वकीलों के जरिए सुप्रीम कोर्ट की शरण लेकर आरोपियों की जमानत के आदेश अपास्त करने की गुहार की। जिसे अदालत ने स्वीकार किया और जमानत पर रिहा हुए तीनों आरोपियों को अलवर गेट थाना पुलिस ने दुबारा न्यायिक अभिरक्षा में पहुंचा दिया।

पुख्ता व साक्ष्य पेश किए अभियोजन ने

अदालत में अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक राजेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रकरण की सुनवाई पूरी हो चुकी है। उन्होंने आरोपियों का अपराध प्रमाणित करने के लिए पुख्ता साक्ष्य व गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं। अदालत ने प्रकरण का निर्णय करने के लिए 16 अगस्त की तारीख पेशी तय की है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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