जोधपुर कमिश्नरेट में डिजिटल अरेस्ट का एक ओर मामला सामने आया है। इस बार शातिर ठगो ने रिटायर्ड डॉक्टर को निशाना बनाया और 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 87 लाख की ठगी कर ली। महिला डाॅक्टर को जब अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ तब वह थाने पहुंची और मामला दर्ज करवाया। बता दें कि अगस्त माह में आईआईटी की प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट किया गया था इसी माह पावटा निवासी बैंगलूरु में आई टी की जॉब कर रहे युवक के साथ डिजिटल अरेस्ट कर ऑनलाइन लोन लेकर ठगी की। अब एसएन मेडिकल कॉलेज से रिटायर्ड डॉक्टर अरुणा सोलंकी के साथ यह घटना हुई।
सोलंकी के साथ यह पुरा घटनाक्रम 20 अगस्त से 5सितंबर के बीच हुआ। डॉक्टर सोलंकी ने 19 सितंबर को रातानाडा थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच में जुटी है। रातानाडा थानाअधिकारी प्रदीप डागा ने बताया कि महिला डॉक्टर को कस्टम ऑफिसर प्रमोद कुमार के नाम से फोन आया और उन्हें कहा कि उनका एक पार्सल मुंबई में आया हुआ है, जिसमें नशे की सामग्री एमडी मिली है। साथ में कई जाली पासपोर्ट और क्रेडिट कार्ड भी हैं। यह मामला मुंबई पुलिस को दिया है। इसके बाद मुंबई पुलिस के अधिकारी सुनील कुमार ने फोन कर वित्तीय जानकारी लेकर घटना को अंजाम दिया।
बैंक खाते की डिटेल लेकर एफडी तुड़वा कर खाते में ट्रांसफर करवाई
ठगों ने डॉ. सोलंकी को फोन कर उनसे पूरे बैंक खातों की जानकारी ली। और फिक्स डिपोजिट के बारे में भी जानकारी ली। इस पूछताछ के बाद में चार लेटर भेजे, जिसमें सीबीआई के साथ एग्रीमेंट, एसेट सीजर, अरेस्ट वारंट और केस रिपोर्ट पेपर भी थे। यह सब सरकारी दस्तावेज देख कर डाॅक्टर घबरा गई और डर कर जानकारी दे दी।
ठगों ने डॉक्टर से तीन साल का वित्तीय लेन देन ले लिया, फिर दबाव देकर 51 लाख की एफडी तुड़वाकर खाते में डलवाई और उसे तुरंत खाते से निकाल दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिया। इस ट्रांजेक्शन के बाद कॉल रुकी नहीं लगातार हर दिन कॉल कर नई नई धमकी देते रहे। डॉक्टर को अरेस्ट करने की धमकी देते रहे और फिर इसके बाद जमानत याचिका के लिए 8 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। ठग डॉक्टर को आश्वासन देते रहे कि पूरा पैसा वापस आ जाएगा।
पैसा लौटाने को कहा तब धमका कर और पैसे ऐंठे
28 अगस्त को ठगों ने डॉक्टर से फोन कर कहा कि आपके बाकी के एफडी को भी रिव्यू करना है। इस पर डॉक्टर ने मना कर दिया और पैसे लौटाने को कहा. इसपर ठगों ने फिर धमकाया, जिसके बाद 21 लाख रुपए की दूसरी एफडी भी तुड़वाकर उन्होंने खाते में ट्रांसफर करवा लिया।
3 सितंबर को फिर ठगों ने कहा कि आपको ‘नो क्राइम बॉन्ड’ लेना पड़ेगा। इसके लिए पांच लाख रुपए लिए। 5 सितंबर को कहा कि रिफंड के लिए वकील काम करेगा, उसकी फीस के दो लाख देने होंगे, आखिरकार डॉक्टर ने दो लाख और दिए। इसके बाद कॉल आने बंद हो गए, इस तरह ठगों ने कुल 87 लाख रुपए ऐंठ लिए थे। ठगी का एहसास होने पर डॉक्टर पुलिस के पास पहुंची।






