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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं, आध्यात्मिकता का मतलब अपनी भीतर की शक्ति को पहचानना है

आबू रोड : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैश्विक शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मा स्वच्छ और स्वस्थ हो तो अपने आप सभी अच्छा हो जाता है. ब्रह्माकुमारी के वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ समय बिताने का मौका मिला.

आध्यात्मिकता का मतलब अपनी भीतर की शक्ति को पहचानना है. अपने आचरण विचारों में शुद्धता लाना है. मनुष्य अपने कर्मों को सुधार कर अच्छा इंसान बन सकता है. विचारों की शुद्धता जीवन में संतुलन शांति लाने का मार्ग है. यह एक स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है. यह माना जाता है स्वस्थ शरीर में ही पवित्र आत्मा निवास करती है.

सभी परंपराओं में स्वच्छता को महत्व दिया जाता है. कोई भी पवित्र क्रिया करने से पहले स्वयं को साफ सफाई का ध्यान रखा जाता है. लेकिन स्वच्छता केवल बाहरी नहीं हो, बल्कि हमारे विचार कर्मों में भी स्वच्छता हो. भावनात्मक व मानसिक स्वच्छ शुद्धता पर ही ध्यान दिया जाता है. हमारे विचार, शब्द, व्यवहार का रूप देते हैं.

दूसरों के प्रति राय बनाने से पहले हमें अपने अंतर मन में झांकना चाहिए. किसी दूसरे की स्थिति में अपने आप को रखकर देखें तो सही राय बनेगी. सरकार द्वारा रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा हैय जैसा अन्न खाएंगे वैसा ही मन बनेगा.

यहां आकर आज बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है : हरिभाऊ बागड़े

इससे पहले राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि यहां आकर आज बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है. आध्यात्मिक होने का अर्थ है कि हम अपने आप को जानते हुए कार्य करे तो सब सफल होगा. ब्रह्माकुमारीज बहुत ही अच्छे विषय पर वैश्विक शिखर सम्मेलन आयोजित कर रही है. समाज में नैतिकता का पतन हुआ है, इसमें आध्यात्मिकता व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण है.

भारत संतों की भूमि हैं, तपस्वियों की धरा हैं:

भारतीय संस्कृति में व्यक्तिव विकास, जीवन की स्वच्छता, विचारों की स्वच्छता पर जोर दिया गया है. भारतीय संस्कृति वासुदेव कुटुम्बकम पर आधारित है, सभी सुखी रहे, सभी निरोग रहें. विश्व में शांति स्थापित करने के लिए ब्रह्मकुमारीज का विशेष योगदान है. आज स्वच्छ और स्वस्थ समाज की कल्पना के साथ विचार विमर्श कर रहे हैं. भारत संतों की भूमि हैं, तपस्वियों की धरा हैं. भारत की सनातन संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है.

 

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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