जयपुर की मुरलीपुरा थाना पुलिस ने एक शातिर साइबर क्रिमिनल को अरेस्ट किया है। CCTNS से FIR डाउनलोड कर पुलिस अफसर बनकर शातिर ठगी करता था। मुकदमें में मदद करने का झांसा देने के साथ ही डरा-धमकाकर ऑनलाइन रुपए वसूलता था। पुलिस को आरोपी के जब्त मोबाइल में 20 से अधिक FIR डाउनलोड मिली है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
DCP (वेस्ट) अमित कुमार ने बताया- साइबर फ्रॉड में आरोपी राजेन्द्र प्रसाद मीणा (25) पुत्र मनमोहन मीणा निवासी राजगढ़ अलवर को अरेस्ट किया गया है। पुलिस ने वारदात करने में यूज किए उसके मोबाइल को भी जब्त किया है। जब्त मोबाइल में 20 से अधिक FIR डाउनलोड मिली है। पुलिस ने रुपए वसूली के लिए भेजे QR कोड का विश्लेषण कर आरोपी राजेन्द्र प्रसाद मीणा को दबिश देकर पकड़ा है।
अनुसंधान अधिकारी बनकर करता कॉन्टैक्ट
10 अक्टूबर को मुरलीपुरा थाने के कॉन्स्टेबल पूरण मल को मुखबिर से नए तरीके के साइबर क्राइम का पता चला। पुलिस के CCTNS पोर्टल पर दर्ज होने वाली FIR को कुछ व्यक्तियों की ओर से डाउनलोड की जाती है। डाउनलोड FIR से परिवादी के मोबाइल नंबर लेकर कॉन्टैक्ट किया जाता है। उनके केस का विशेष अनुसंधान अधिकारी बताकर मदद का झूठा आश्वासन देकर रुपयों की डिमांड करते है। आरोपी पक्ष से भी कॉन्टैक्ट कर डरा-धमकाकर ऑनलाइन रुपए की वसूली की जा रही है। दोनों पक्षों में राजीनाम करवाने की कहकर भी रुपए का सौदा करता था।
QR कोड से पकड़ में आया शातिर
मुरलीपुरा थाने के कॉन्स्टेबल पूरण मल की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। जांच के दौरान सामने आया कि पिछले कुछ समय में महिला थाना (वेस्ट) में दर्ज कुछ मुकदमों के आरोपियों से अनुसंधान अधिकारी बनकर साइबर क्रिमिनल से कॉन्टैक्ट किया है। डरा-धमकाकर मुकदमें में कार्रवाई नहीं करने का झांसा देकर ऑनलाइन रुपए ट्रांसफर करवाए। साइबर क्रिमिनल की ओर से वसूली के लिए QR कोड भेजा गया था। QR कोड के मिलने पर पुलिस ने विश्लेषण कर शातिर साइबर क्रिमिनल को धर-दबोचा।
आमजन से अपील
जयपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है। साइबर फ्रॉड करने वाले इस तरह ऑनलाइन पोर्टर्ल से मोबाइल नंबर लेकर किसी परिवादी या FIR के बहाने अगर किसी तरह से पैसे की मांग करते है तो उनके झांसे में नहीं आए। वर्तमान समय में इस तरह की प्रवृतियां बढ़ी है, अगर कोई इस तरह के पैसे की मांग व किसी तरह के लाभ की मांग करता है। तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दें।






