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रामभद्राचार्य बोले- गोविंद देवजी मंदिर नहीं जाऊंगा:श्रीकृष्ण जन्मभूमि का फैसला होने के बाद करूंगा दर्शन; गलता गद्दी हमें मिलेगी, हक लेना जानता हूं

जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा- मैंने गोविंद देवजी के दर्शन का मन बनाया था, पर फिर मेरा मन बदल गया। जब तक श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा,यूपी) का फैसला नहीं हो जाता, तब तक दर्शन करने नहीं आऊंगा। उन्होंने जयपुर की गलता पीठ को लेकर कहा- हमारी गलता गद्दी, हमें मिलकर रहेगी। मैं अधिकार लेना जानता हूं। इंतजार कीजिए, गलता गद्दी पर भी रामानंदियों का ही विजय स्तंभ हाेगा।

रामभद्राचार्य ने विद्याधर नगर स्टेडियम में आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन ये बात कही। उन्होंने कहा कि जयपुर मेरा परिचित शहर है। 2003 में भी यहां कथा की थी। उन्होंने कहा- गोविंद देवजी से हमने कह दिया है, आप कितनी भी मनुहार करो, पर जब तक श्री कृष्ण जन्मभूमि हमें नहीं मिल जाती, तब तक हम किसी भी कृष्ण मंदिर में दर्शन नहीं करेंगे।

रामभद्राचार्य की इस बात पर पूरा पांडाल तालियों से गूंज उठा। बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर की मांग लगातार हिंदू संगठनों की ओर से की जा रही है।

गलता की गद्दी पर भी रामानंदियों का ही होगा विजय स्तंभ

रामभद्राचार्य ने कहा- श्रीराम जन्मभूमि हम ले आए। मेरी वही प्रतिभा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी हम लाकर रहेंगे। मेरी प्रतिभा ने श्री राम जन्मभूमि की साक्षी बनकर 550 साल का कलंक समाप्त करके रामजी को विराजित करवा दी।

अब कृष्ण जन्म भूमि में भी मेरा साक्ष्य हो रहा है, वो भी मिलेगा। काशी विश्वनाथ भी हमें प्राप्त होगा।

आपके देखते-देखते गलता गद़्दी हमको मिलकर रहेगी। अधिकार लेना मैं जानता हूं। प्रतीक्षा कीजिए गलता गद्दी पर भी रामानंदियों का ही विजय स्तंभ होगा।

राजस्थान वैष्णव और वीरों की भूमि

रामभद्राचार्य ने कहा- राजस्थान वैष्णव और वीरों की भूमि है। यहां पर आज मेरी 1394 वीं कथा छोटी काशी में शुरू हुई है। राजस्थान की मीरा ने कहा था कि मैं तो गोविंद रा गुण गास्यां, राम जी रुसे तो म्हारो काई करसी। राजस्थान में तिलक भी है और तलवार भी है।

जब देश में क्रांति हो तो संत को भाला भी ले लेना चाहिए

रामभद्राचार्य ने कहा- राम कथा बहुतों ने लिखी है, लेकिन तुलसीदास जी जैसी किसी ने भी नहीं लिखी। भगवान श्रीराम जैसा किसी का प्रभाव भी नहीं और स्वभाव भी नहीं। संत को हाथ में माला लेनी चाहिए, लेकिन जब देश में क्रांति हो तो भाला भी ले लेना चाहिए।

राम मंदिर के केस में भी मुझे मुस्लिम जज ने कहा की चिंता मत करो रामलला यही विराजेंगे। मैं बाबा स्थान के लिए नहीं, राघव प्रेम के लिए बना हूं। राम बहुत बड़े क्रिकेटर हैं, क्रिकेटर एक और चार रन के प्रयास ही करता है, लेकिन वो जब लगाते हैं तो छक्के ही लगाते हैं।

क्या है गलता तीर्थ को लेकर विवाद

राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 जुलाई को जयपुर के गलता पीठ तीर्थ के महंत अवधेशाचार्य की नियुक्ति रद्द कर दी। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने अवधेशाचार्य और अन्य की अपील को निस्तारित करते हुए यह फैसला सुनाया था।

पिता रामोदराचार्य की मृत्यु के बाद वे गद्दी पर बैठे थे। अवधेशाचार्य को लेकर विवाद साल 2005 से चल रहा था। गलता तीर्थ की गद्दी को लेकर विवाद नई बात नहीं है। 25 साल पहले 1999 में भी विवाद हुआ था। तब गद्दी पर अवधेशाचार्य के पिता रामोदराचार्य थे।

104 साल पीछे चलें तो एक और ऐसा ही विवाद सामने आता है। उस समय राजघराने के दखल से विवाद सुलझा था। वहीं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब गलता तीर्थ का प्रबंधन सरकार संभालेगी। इसके लिए जयपुर जिला कलेक्टर को प्रशासन नियुक्त किया गया है।

जानिए, कौन हैं रामभद्राचार्य

रामभद्राचार्य चित्रकूट में रहते हैं। उनका वास्तविक नाम गिरधर मिश्रा है। वे प्रवचनकार, दार्शनिक और हिंदू धर्मगुरु हैं। वे रामानंद संप्रदाय के मौजूदा चार जगद्गुरुओं में से एक हैं और इस पद पर 1988 से आसीन हैं।

महाराज चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति भी हैं। चित्रकूट में तुलसी पीठ की स्थापना का श्रेय भी इन्हें ही जाता है। इन्होंने दो संस्कृत और दो हिंदी में मिलाकर कुल चार महाकाव्यों की रचना की है।

इन्हें भारत में तुलसीदास पर सबसे बेहतरीन विशेषज्ञों में गिना जाता है। साल 2015 में भारत सरकार ने इन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

-इनके वक्तव्य से बदला राम जन्मभूमि का फैसला

गौरतलब है कि पद्मविभूषण रामभद्राचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में वेद-पुराण के उद्धरण देकर गवाही दी थी। जब श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में वे वादी के रूप में शीर्ष कोर्ट में उपस्थित थे। उन्होंने ऋगवेद की जैमिनीय संहिता से उदाहरण देना शुरू किया, जिसमें सरयू नदी के स्थान विशेष से दिशा और दूरी का सटीक ब्योरा देते हुए श्रीराम जन्मभूमि की दूरी बताई गई है।

कोर्ट के आदेश से जैमिनीय संहिता मंगाई गई और उसमें जगद्गुरु की ओर से बताए गई पृष्ठ संख्या को खोल कर देखा गया तो समस्त विवरण सही पाए गए। इस प्रकार जगद्गुरु के वक्तव्य ने फैसले का रुख मोड़ दिया।

जज ने भी कहा कि आज मैंने सनातनी प्रज्ञा का चमत्कार देखा है। एक व्यक्ति जो भौतिक रूप से आंखों से रहित है वो भारतीय वांग्मय और वेद-पुराणों के उद्धरण दे रहा है जो बिना ईश्वरीय कृपा के संभव नहीं है।

2 महीने की उम्र में चली गई आंखों की रोशनी

सिर्फ दो माह की उम्र में इनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। आज इन्हें 22 भाषाएं आती हैं और ये 80 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं। न तो ये पढ़ सकते हैं और न लिख सकते हैं और न ही ब्रेल लिपि का प्रयोग करते हैं।

केवल सुन कर सीखते हैं और बोल कर अपनी रचनाएं लिखवाते हैं। पद्मविभूषण रामभद्राचार्य एक ऐसे संन्यासी हैं, जो अपनी दिव्यांगता को हरा कर जगद्गुरु बने हैं।

 

 

 

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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