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जेडीए में घूस की पैमाइश:2 एईएन ने 1 करोड़ का घोटाला किया, काश्तकारों को विकसित भूमि देने के बदले ली ‌50 करोड़ रुपए की रिश्वत

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की सीकर रोड स्थित लोहामंडी स्कीम में करोड़ों रुपए का घोटाला करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जेडीए अ​धिकारियों के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने और 50 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के संबंध में एफआईआर दर्ज की है। एसीबी के अनुसार जेडीए की विद्युत शाखा के अधिकारियों ने लोहामंडी स्कीम में विद्युतीकरण के नाम पर चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अवहेलना करते हुए काम दे दिया।

जिसकी माप पुस्तिका के अनुसार 5.70 करोड़ रुपए का सामान खरीदकर लगाना बताया गया, जबकि मौके पर 4.66 करोड़ रुपए का सामान लगाया हुआ मिला। इस घोटाले की जेडीए ने कमेटी बनाकर जांच करवाई और रिपोर्ट के आधार पर विद्युत शाखा के सहायक अभियंता सत्येन्द्र सिंह मीणा व सिद्धार्थ मीणा को निलंबित कर दिया था। इस मामले में सूचना मिलने पर एसीबी ने भी गोपनीय रूप से जांच शुरू कर दी।

एसीबी की जांच में विद्युत शाखा के अलावा अवाप्त जमीन के बदले काश्तकारों को विकसित भूमि देने के बदले भी अधिकारियों ने करोड़ों रुपए की रिश्वत लेने के इनपुट मिले हैं। ऐसे में एसीबी ने भ्रष्टचार करने वाले कर्मचारियों पर केस दर्ज कार्रवाई करने के लिए नगरीय विकास विभाग से अनुमति मांगी। जहां से अनुमति मिलने के बाद अब एफआईआर दर्ज की गई है। एसीबी के एएसपी भूपेन्द्र की तरफ मिली रिपोर्ट के आधार पर एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर ली। इस मामले का अनुसंधान एएसपी बलराम सिंह मीणा करेंगे।

एसीबी के प्राथमिक अनुसंधान में सामने आया कि लोहामंडी स्कीम में अवाप्त जमीन के बदले काश्तकारों को 25 फीसदी विकसित जमीन देने के बदले 40 से 50 करोड़ रुपए की रिश्वत ली है। ये रिश्वत संबंधित जोन के कर्मचारियों से उच्चाधिकारियों तक बांटी गई है।

कमेटी में 25% विकसित जमीन देने का फैसला हुआ, फिर काश्तकाराें से खरीदी जमीनाें पर चला मुआवजा उठाने का खेल

20 साल पहले स्टील मर्चेंट व्यापारियाें के लिए सीकर राेड पर लाेहामंडी याेजना जमीन अवाप्ति प्रक्रिया से ही विवादाें में रही। याेजना की प्लानिंग के साथ ही प्रभावित काश्तकाराें से जमीनें खरीद फराेख्त की साैदे हुए और मुआवजा बढ़ाकर देने के नाम पर याेजना काे अटका दिया।

जब जमीन अवाप्त की प्रक्रिया शुरू हुई, तब मुआवजे में केवल 15 फीसदी विकसित जमीन देने का प्रावधान था। 15 साल तक काश्तगाराें की आड़ में भू-काराेबारियाें ने मुआवजा बढ़ाने का दबाव बनाया। करीब 157 हैक्टेयर में डवलप हाेने वाली इसी याेजना में 35 बीघा में सहकारी समिति की आवासीय याेजना हिल व्यू के मुआवजे को लेकर भी पेंच फंसा रहा।

माेतीभवन निर्माण सहकारी समिति के पट्टाें पर 1999 में बसी आवासीय याेजना का कृषि भूमि से आवासीय भू रूपांतरण किया हुआ था, ऐसे में मुआवजा दिया जाना था। खातेदार व इस योजना के आवंटियों के मुआवजे को लेकर मामला काेर्ट में चला।

केबिनेट एम्पावर्ड कमेटी की 14 फरवरी 2021 की बैठक में मुआवजा बढ़ाकर 15 से 25 फीसदी कर दिया। इसके बाद जेडीए ने अक्टूबर 2021 में आरक्षित दर 11 हजार से बढ़ाकर 25200 रुपए प्रति वर्गमीटर कर दी। विकसित जमीन बढ़ाकर और चाैड़ी सड़काें पर लेने के लिए जाेन से लेकर उच्चाधिकारियाें तक रिश्वत की राशि का खेल चला

जेडीए से याेजना का रिकाॅर्ड भी गायब हुआ

याेजना में पहले काश्तकाराें ने जमीन साेसायटी काे सरेंडर कर अावासीय याेजना बसा दी और फिर मुआवजे के लिए फाइलें लगा दी। इस मामले में रिकाॅर्ड में हेराफेरी करने के लिए साेसायटी का रिकॉर्ड भी गायब हुआ था। तकनीकी स्वीकृति से पहले ही वर्कऑर्डर दे दिया। एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मुआवजा 25 फीसदी तय हुआ और जेडीए ने इसके तुरंत बाद बिजली कार्याें के लिए 17.83 कराेड़ का कार्यादेश जारी कर दिए। इसमें बिछाई जाने वाले केबल की जेवीएनएल से तकनीकी जांच करवानी थी, लेकिन नहीं करवाई गई। इसके बिना ही कार्यादेश जारी कर चहेती फर्म से 5 कराेड़ के काम करवा लिया।

जांच में घपला मिला

तत्कालीन जेडीसी रवि जैन ने जांच के लिए कमेटी बनाई। जिसकी जांच में लाेहामंडी याेजना में 33 केवी की 2.86 कराेड़ की करीब 18000 मीटर केबल, 1.57 कराेड़ रुपए की 11 केवी की 19500 मीटर और 54.78 लाख कीमत में एलटी की 9349 मीटर केबल ही योजना में मिली। 1 करोड़ से ज्यादा के सामान नहीं मिले।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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