राजस्थान के बीकानेर में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में शहीद जवान जितेंद्र सिंह (38) दौसा जिले के रहने वाले थे। गनर जितेंद्र सिंह अपने गांव के पहले शहीद हैं। उनके शहादत की खबर के बाद से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
रेंज के नॉर्थ कैंप में जब 35 किलो का गोला फटा तब जम्मू में पोस्टेड जितेंद्र सिंह की महीनेभर की ट्रेनिंग खत्म होने वाली थी। वे 19 दिसंबर को जम्मू लौटने वाले थे।
प्रैक्टिस के दौरान फटे गोल के कारण दो और जवान भी शहीद हुए थे। जितेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार शुक्रवार (20 दिसंबर) को उनके गांव में किया जाएगा।
12 बजे लौटना था, 10 बजे हुआ हादसा
शहीद ने हादसे से पहले पत्नी रेखा से कहा भी था कि 18 दिसंबर को 12 बजे तक ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी। उसी दिन सुबह 10 बजे टैंक में गोला लोड करते समय ब्लास्ट हो गया।जो गोला फटा उसका वजन करीब 35 किलो था। जितेंद्र आर्म्ड फोर्सेज में गनर की पोस्ट पर थे। हादसे में उनके साथी की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, एक अन्य जवान नायक ईश्वर तालिया भी चंडीगढ़ अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार (19 दिसंबर) को शहीद हो गए।

पत्नी को 18 घंटे बाद पता चला दुनिया उजड़ गई
हादसे के बाद शाम करीब 5 बजे सेना की ओर से जितेंद्र की पत्नी रेखा और उनके दोनों बच्चों दीपेंद्र और दिव्या को सूचना दी गई कि युद्धाभ्यास के दौरान जितेंद्र जख्मी हो गए हैं। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया है। उन्हें पहले गाजीपुर बाय एयर लाने की तैयारी थी। टिकट न होने के कारण उन्हें बाय रोड गाजीपुर लाया गया। करीब 18 घंटे तक बच्चों और पत्नी को इस हादसे के बारे में नहीं बताया गया। गांव पहुंचने पर उन्हें परिजनों से पता चला कि उनकी दुनिया उजड़ चुकी है।
पत्नी बोलीं- 17 साल कभी अलग नहीं हुई, एक महीने में बिछड़ गए
पत्नी रेखा जम्मू से गाजीपुर आते वक्त साथ आ रहे जवान से बार बार कह रही थी कि आप झूठ मत बोलना जो हुआ है सच बताना। हालांकि, उन्हें यही बताया गया कि वे घायल हैं। अस्पताल में भर्ती हैं, ठीक हो जाएंगे। रेखा को विश्वास नहीं हो रहा था। भास्कर से बातचीत में रोते बिलखते रेखा एक ही बात कहती रहीं कि शादी के 17 साल कभी उनसे अलग नहीं रही। अब एक महीने में ही बिछड़ गए। जितेंद्र के साथियों ने बताया कि वे करीब 20 साल से एक ही काम कर रहे थे। उसी के अभ्यास में उसकी जान चली जाएगी ये नहीं सोचा था।

19 साल की उम्र में भर्ती हुए
परिवार में ही उनके फौजी भाई हेमेंद्र ने बताया कि जितेंद्र बचपन से ही फौज में जाना चाहते थे। जितेंद्र 19 साल की उम्र में 2005 में सेना में भर्ती हुए थे। उन्हें दो साल पहले ही प्रमोशन मिला था। वे जून 2027 में रिटायर होने वाले थे। उनके एक और भाई नरेंद्र सिंह भी फौज में हैं। शुक्रवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ जितेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर पहले घर लाया जाएगा। उसके बाद तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी और अंतिम संस्कार होगा।
परिवार खेत में बनाएगा स्मारक
गुरुवार को परिवार से मिलने आए एसडीएम और तहसीलदार से परिजनों ने शहीद जितेंद्र का स्मारक बनाने की इच्छा जताई थी। हालांकि, बाद में परिवार ने अपने ही खेतों में जितेंद्र का स्मारक बनाना तय किया है। जितेंद्र की पार्थिव देह गुरुवार को जयपुर लाई गई थी। पार्थिव देह शुक्रवार सुबह 8 बजे उनके गांव गाजीपुर पहुंचेगी।





